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अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से बीजेपी को कितना फायदा, कितना नुकसान?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ही नहीं बीजेपी का समर्थक भी यह समझ नहीं पा रहा है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी लोकसभा चुनावों के पहले कैसे हो गई ? बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि इस गिरफ्तारी से आप और कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सारी सीटें जीतने एक मौका मिल गया है. लेकिन क्या ऐसा संभव है?

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तार का फायदा एनडीए उठाएगा या इंडिया गठबंधन अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तार का फायदा एनडीए उठाएगा या इंडिया गठबंधन
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद एक बात जिसकी चर्चा बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों के ही समर्थक कर रहे हैं कि गिरफ्तारी का असर आगामी लोकसभा चुनावों के नतीजों पर कितना पड़ेगा? आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के समर्थकों का मानना ​​है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक संभावनाओं के लिए एक हथियार के रूप में काम करेगी. बीजेपी के कट्टर समर्थकों को छोड़कर सामान्य वोटर जिनका वोट बीजेपी को जा सकता है उन्हें भी ऐसा लगता है कि अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस को बीजेपी सरकार ने लोकसभा चुनावों में दिल्ली में सारी सीटें जीतने एक मौका दे दिया. तो फिर क्या मान लिया जाए कि बीजेपी के चाणक्य जनता की नब्ज समझ नहीं सके? तो जान लीजिए कि ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी को धुरंधर नेताओं को जनता की नब्ज समझने की क्षमता नहीं है. आइए देखते हैं कि केजरवाल की गिरफ्तारी किस तरह अगले चुनाव में काम करेगी? इस गिरफ्तारी से मलाई कौन खाएगा?

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1-गिरफ्तारी एक कानूनी मामला या की राजनीतिक 

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के नागरिकों को जो यह अच्छी तरह समझा सकेगा कि यह गिरफ्तारी कानूनी मामला है, न कि राजनीतिक. उसे ही लोकसभा चुनावों में फायदा होने वाला है. अगर केजरीवाल अपने समर्थकों को यब समझाने में सफल हुए कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक है तो यह बीजेपी के लिए उल्टा पड़ जाएगा.  

केंद्र सरकार शायद इसीलिए किसी तरह के जल्दबाजी के मूड में नहीं थी. अरविंद केजरीवाल के पास महीनों से ईडी के समन आ रहे थे. लगातार 10 समन के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है. यह सब कसरत सिर्फ इसी लिए हुई होगी ताकि लोगों के मन में यह बात बैठाई जा सके कि कानून अपना काम कर रहा है.

भाजपा, जिसने पिछले साल  दिल्ली जल बोर्ड घोटाला सहित 10 बड़े घोटालों पर आप को घेरने के लिए 400-दिवसीय रणनीति पर काम करना शुरू किया था. इस बीच केजरीवाल को ईडी द्वारा समन भी जारी किया जाता रहा. ताकि आप संयोजक को भ्रष्टाचार का चेहरा बनाया जा सके. इसके बाद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई है. ताकि यह बताया जा सके कि यह एक कानूनी मामला था न कि राजनीतिक मामला.

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हालांकि इस गिरफ़्तारी से निश्चित रूप से दिल्ली में इंडिया गठबंधन के और मजबूत होने की सभावना है. जिस तरह कांग्रेस पार्टी के नेताओं संदीप दीक्षित और अरविंदर सिंह लवली आदि जो कभी केजरीवाल के लिए आग उगलते रहे हैं, अब केंद्र सरकार को  घेर रहे हैं. इससे यही लगता है कि इस गिरफ्तारी ने विपक्ष को दिल से एकजुट करने का मौका दे दिया है. दोनों पार्टियों का शहर की मलिन बस्तियों, अनधिकृत कॉलोनियों और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों में एक समान समर्थन का आधार है. केजरीवाल की गिरफ्तारी से अगर सहानुभूति की लहर दौड़ती है तो इंडिया गठबंधन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

2-केजरीवाल के बिना क्या आम आदमी पार्टी कमजोर हो जाएगी

केजरीवाल की गिरफ्तारी एक और कारण से बीजेपी के फेवर में जा सकती है. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि गिरफ्तारी का एक मुख्य परिणाम AAP की कमजोरी होगी. केजरीवाल आम आदमी पार्टी का मुख्य चेहरा हैं और भीड़ और संसाधन जुटाने वाली आवाज हैं. वह पार्टी के मुख्य वैचारिक आधार और स्तंभ भी हैं. केजरीवाल के बिना, AAP चुनाव प्रचार में कोई प्रभाव डालने की स्थिति में नहीं होगी.

पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा: "इससे इंडिया ब्लॉक के स्टार प्रचारकों में से एक की कमी हो जाएगी. साथ ही बीजेपी आम लोगों को भ्रष्ट लोगों के गठबंधन के रूप में प्रचारित प्रसारित करेगी. और भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा के रूप में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने केजरीवाल के भ्रम को तोड़ सकेगी.

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इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि कई भाजपा कैडर पार्टी से सवाल कर रहे थे कि जब केजरीवाल की बात आती है तो मोदी सरकार सुरक्षित क्यों खेलती है? इससे पार्टी कार्यकर्ताओँ में यह संदेश जाता है कि वह उनकी लोकप्रियता के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई करने से डर रही है. अरविंद केजरीवाल की  गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार के खिलाफ नेतृत्व के अडिग रुख के संबंध में बीजेपी कार्यकर्ताओँ का मनोबल बढ़ा दिया है.

3-जनता का उबाल देखने को नहीं मिला

बीजेपी ने पहले सत्येंद्र जैन, फिर मनीष सिसौदिया, संजय सिंह को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार होते देखा है. पर दिल्ली की जनता ने इसे बहुत सामान्य माना. बारी -बारी इतने नेता जेल गए पर पर दिल्ली में इसके खिलाफ कोई आंदोलन नहीं खड़ा हो सका है. इससे केंद्र को पहले ही पता था कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कानून व्यवस्था का सवाल नहीं खड़ा होने वाला है. जिस तरह झारखंड में हेमंत सोरेन जेल गए कोई हो हल्ला नहीं मचा.बीजेपी सूत्रों के हवाले से एक्सप्रेस लिखता है कि दिल्ली और उसके आसपास पार्टी द्वारा हाल ही में किए गए आंतरिक सर्वेक्षणों में केजरीवाल के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई के बारे में मतदाताओं की भावनाओं को पता  लगाने की कोशिश की गई . जो कि उनके उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को पद से हटाए जाने के एक साल से अधिक समय बाद आया है. सर्वे से संकेत मिला था कि विपक्ष गिरफ्तारी के खिलाफ लोगों को एकजुट नहीं कर पाएगा. सर्वे में यह पाया गया कि लोग कहते हैं कि 'शराब नीति के आरोप फंसने के चलते केजरीवाल की छवि को नुकसान पहुंचा है. जनता को यह लगता है कि 'कोई सबूत नहीं'' होता, तो सिसौदिया जमानत पर बाहर होते.

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4-भाजपा के भरोसे का कारण क्या है, पीएम मोदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ मसीहा के रूप में प्रतिष्ठित करना

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी तब हुई है जब लोकसभा चुनाव सर पर हैं. आखिर भाजपा को यह भरोसा क्यों है कि वह जनता की किसी भी प्रतिक्रिया का सामना कर सकती है.

पत्रकार विनोद शर्मा का कहना है कि ऐन चुनाव के समय केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने से जहां आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगता है वहीं पीएम नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार को खत्म करने वाले प्रतिबद्ध नेता की साख को मजबूत करता है. अगर यह दांव चल जाता है तो बीजेपी की बल्ले बल्ले हो जाएगी. भाजपा अपना पक्ष रखने के लिए ये बात जनता तक ले जाएगी कि आम आदमी पार्टी प्रमुख केजरीवाल ने ईडी के 10 समन की अवहेलना की. साथ ही बीजेपी जनता के बीच यह भी कहेगी कि सरकार ने यह जानते हुए भी कि चुनावों में बीजेपी का नुकसान हो सकता है न अरविंद केजरीवाल को बख्शा और न ही हेमंत सोरेन को. बीजेपी समर्थक अरविंद केजरीवाल का 2013 का एक ट्वीट वायरल कर रहे हैं जिसमें केजरीवाल लिखते हैं कि सोनिया-राहुल और मनमोहन सिंह आदि को भ्रष्टाचार के मामले में जेल क्यों नहीं भेजा जा रहा है. 

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5- चंडीगढ़ और इलेक्टोरल बॉन्ड पर जज बोले तो सही, आप नेताओं को बेल न दे तो गलत

बीजेपी कार्यकर्ता और नेता केजरीवाल की गिरफ्तारी के पहले से एक बात करते हैं कि आम आदमी पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी का कारण बीजेपी नहीं है. उनका कहना है कि जब कोर्ट आप नेताओं संजय सिंह, सत्येंद्र जैन और मनीष सिसौदिया आदि को बेल नहीं देता है तो यह कहा जाता है कि कोर्ट सरकार के दबाव में है. और चंडीगढ़ मेयर चुनाव और इलोक्टोरल बॉन्ड पर कोर्ट जब फैसले सुनाता है तो वह बेहतर हो जाता है.

बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष अपने फायदे के हिसाब से एजेंसियों और कोर्ट को भला बुरा कहती है. ईडी ने भी केजरीवाल को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जब तक कोर्ट ने भी हामी नहीं भर दी. केजरीवाल गुरुवार को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी की छूट मांगने गए थे. कोर्ट ने ईडी से सवाल किया वो ऐसा क्यों कर रहे हैं. ईडी ने कोर्ट को कुछ सबूत दिखाए. उसके बाद हाईकोर्ट ने भी गिरफ्तारी से राहत देने की बात पर हाथ खड़े कर लिए. बीजेपी इन बातों को जनता के बीच ले जाने में जितना सफल होगी, आगामी लोकसभा चुनावों में सफलता उस पर ही निर्भर होगी.

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