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आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने की अभी कितनी बची है संभावना?

जिस आधार पर कांग्रेस आज हरियाणा में आम आदमी पार्टी की सीटें देने की बात कर रही है, अगर उसी आधार को यूपी में समाजवादी पार्टी ने फार्मूला बनाया होता तो कांग्रेस को 17 सीटें नहीं मिलीं होतीं. इसलिए सही यही है कि कांग्रेस को दरियादिली दिखानी चाहिए.

अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST

हालांकि आप की ओर से 29 उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद समझा जा रहा है कि अब हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होने वाला है. पर राजनीति अनंत संभावनाओं का खेल है. कांग्रेस पार्टी की माने तो गठबंधन की उम्मीद अभी भी बाकी है और बातचीत अभी खत्म नहीं हुई है. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि आम आदमी पार्टी का हक है वो अपनी लिस्ट जारी करें लेकिन गठबंधन पर अभी बातचीत जारी है. कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी दीपक बाबरिया की तबीयत खराब है, इसलिए बातचीत थोड़ी देर के लिए रुकी हुई है. खत्म नहीं हुई है. कांग्रेस का कहना है कि आप ने जो भी निर्णय लिया है वह उनका एक तरफा फैसला है हमारी तरफ से गठबंधन की संभावना अभी भी बरकरार हैं. नामांकन करने की अंतिम तिथि 12 सितंबर है यानि कि अभी दो दिन बचे हैं. पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता चाहने वालों के पास समय तेजी से निकलता जा रहा है. 

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1-कांग्रेस को है आप की जरूरत

भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के सहारे की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता है. अगर लोकसभा चुनावों को नजीर माने तो 44 विधानसभा सीटों पर बीजेपी आगे थी जबकि कांग्रेस को 42 सीटों पर बढ़त थी. आम आदमी पार्टी करीब 4 सीटों पर आगे थी. इस तरह प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को साथ आना ही होगा. क्योंकि अगर आम आदमी पार्टी अलग चुनाव लड़ती है तो तय है कि कांग्रेस की कुछ सीटें कम ही होंगी. क्योंकि बीजेपी विरोधी वोट बंटने से नुकसान तो कांग्रेस का ही होगा. चूंकि प्रदेश की विधानसभी सीटें बहुत छोटी हैं और कुछ हजार वोटों से खेल बनेगा और बिगड़ेगा इसलिए कांग्रेस को दरियादिली दिखानी ही पड़ेगी. अगर आम आदमी पार्टी 90 सीटों पर चुनाव लड़ गई तो कांग्रेस को लेने के देने पड़ सकते हैं.

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2-आम आदमी पार्टी के पास बीजेपी से बदला लेने का मौका

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अधिकतर नेता आज भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में हैं या जेल जाने वाले हैं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद कई महीनों से जेल में हैं. राजनीति तो यह कहती है कि ऐसी स्थित में आम आदमी पार्टी को तो भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देना चाहिए .आम आदमी पार्टी अपनी महत्वाकांक्षा के चलते अगर कांग्रेस को समर्थन नहीं देती है तो भारतीय जनता पार्टी के राज्य में एक बार फिर से सत्ता में आने की संभावना बढ़ जाएगी. जाहिर है कि बीजेपी अगर हरियाणा में मजबूत होती है तो वो नैतिक रूप से इतनी मजूबत हो जाएगी कि आम आदमी पार्टी के कुछ और नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजवा सके. आम आदमी पार्टी यह अच्छी तरह जानती है कि उसे हरियाणा में सफलता नहीं मिलने वाली है. पर पार्टी यह भी जानती है कि अगर 90 सीटों पर प्रत्याशी खड़ा कर दिया तो कांग्रेस की तो बैंड बजनी तय है. इसलिए इसे आम आदमी पार्टी के धमकी के रूप में ही लिया जा रहा है. समझा यही जाता है कि फाइनली अगर कांग्रेस कुछ सीटें और बढ़ाती है तो गठबंधन पर सहमति बन जाएगा.

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3-जैसे अखिलेश यादव ने यूपी में दरियादिली दिखाई, कांग्रेस भी कर सकती है

कांग्रेस के सामने करो या मरो जैसी स्थिति है. लोकसभा चुनावों में बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी. पर राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी अगर फिर से सरकार बनाने में सफल होती है तो यही कहा जाएगा कि कांग्रेस को जो सफलता मिली थी वो बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसै था. दूसरी बात यह भी है कि कांग्रेस को अगर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना है तो उसे सहयोगी पार्टियों के साथ दरियादिली दिखानी होगी. जिस आधार पर कांग्रेस आज हरियाणा में आम आदमी पार्टी की सीटें देने की बात कर रही है ,अगर उसी आधार को यूपी में समाजवादी पार्टी ने फार्मूला बनाया होता तो कांग्रेस को 17 सीटें नहीं मिलीं होतीं. इसलिए सही यही है कि कांग्रेस को दरियादिली दिखानी चाहिए. आम आदमी पार्टी को इतनी सीटें तो देनी ही चाहिए जो उसे सम्मानित लगे.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी शायद इन्हीं कारणों के चलत इस गठबंधन के पक्ष में हैं ताकि भाजपा को एक मजबूत संदेश दिया जा सके, लेकिन हरियाणा कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व जैसे राज्य में विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा, रणदीप सिंह सुरजेवाला आदि AAP को कोई जगह देने के पक्ष में नहीं हैं.

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