
आम तौर पर अब तक दिल्ली वासियों को लग रहा था कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी फ्रेंडली मैच खेल रही है पर राहुल गांधी की सोमवार को हुई सभा ने जरूर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया है. ये बात अलग है कि राहुल गांधी के भाषण में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ऐसा कुछ नहीं कहा गया जिससे आम आदमी पार्टी का आधार कुछ कमजोर हो. राहुल गांधी का भाषण हमेशा की तरह राष्ट्रीय मुद्दों, आरक्षण, जाति जनगणना, अडानी और अरबपतियों के विरोध पर केंद्रित रहा. जाहिर है कि उनके निशाने पर केजरीवाल के मुकाबले नरेंद्र मोदी ज्यादा रहे. सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की रणनीति क्या है? क्या बिना आम आदमी पार्टी को कमजोर किए कांग्रेस दिल्ली में अपनी जमीन फिर से तैयार कर सकेगी? हालांकि कांग्रेस बहुत बारीक गेम खेल रही है. कांग्रेस की रणनीति ऐसी है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान पहुंचे. आइये देखते हैं कैसे?
1-राहुल का प्रतीकात्मक विरोध भी केजरीवाल के लिए नुकसानदायक
कांग्रेस ने राहुल गांधी की पहली चुनाव सभा सीलमपुर में रखी. जाहिर है कि उसके निशाने पर अरविंद केजरीवाल हैं. सीलमपुर नॉर्थ ईस्ट दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है. यह मुस्लिम बहुल सीट है. आम तौर पर माना जा रहा है कि पूरे देश में मुस्लिम समुदाय कांग्रेस को लेकर उत्साहित है. इस समुदाय को लगता है कि कांग्रेस ही उसकी एक मात्र हितैषी पार्टी है. अरविंद केजरीवाल वैसे भी सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति करने वाले हैं. कई मौकों पर उनका हिंदुत्ववादी एजेंडा सामने आ जाता है. राम मंदिर का दर्शन करने भी वो सपरिवार गए थे. मंदिरों के पुजारियों को वेतन देकर एक बार फिर वो चर्चा में हैं. शाहीन बाग आंदोलन हो या दिल्ली दंगे, केजरीवाल ने कभी इस तरह का रुख नहीं दिखाया कि वह मुसलमानों के साथ हैं.
इसके विपरीत कांग्रेस ने हमेशा खुलकर मुसलमानों के साथ इस तरह खड़ी रहती है. इस हद तक कि उसे एंटी हिंदू पार्टी कहा जाने लगा है. जाहिर है कि यह सब बातें मुस्लिम समुदाय समझ रहा है. ये हो सकता है कि बहुत से मुसलमान बीजेपी को हराने वाले कैंडिडेट को अपना वोट दें, पर इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि मुसलमानों के दिल में आजकल कांग्रेस के लिए हमदर्दी है. जो वोट में कब तब्दील हो जाएगी, ये कहा नहीं जा सकता. 2020 में सीलमपुर सीट से आम आदमी पार्टी के अब्दुल रहमान जीते थे. उन्हें 72 हजार 694 वोट मिले थे. बीजेपी के कौशल कुमार को 35 हजार 774 और कांग्रेस के चौधरी मतीन अहमद को 20 हजार 247 वोट ही मिले थे. चौधरी मतीन 5 बार विधायक रह चुके हैं.
2-कांग्रेस अगर जमकर लड़ती है तो बीजेपी को भी नुकसान
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स मुस्लिम और दलित वोटों पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा कर लिया. पर इससे भी कोई इनकार नहीं कर सकता कि दिल्ली में बीजेपी ने भी अपनी जमीन कांग्रेस के वोटरों को अपने पाले में लाकर ही तैयार की है. ब्राह्मण -बनिया वोट भी कभी कांग्रेस का ही हुआ करता था. मध्यवर्ग का सारा वोट कांग्रेस को ही मिलता था. कांग्रेस अगर जमकर मेहनत करती है तो आम आदमी पार्टी से नाराज वोटों के लिए बीजेपी के अलावा एक और विकल्प तैयार मिलेगा. पर ऐसा तभी होगा जब कांग्रेस फाइट करती दिखेगी. जिस तरह की लड़ाई अब भी कांग्रेस लड़ती दिख रही है उससे अभी ऐसा होने के चांसेस बहुत कम है. पर राहुल गांधी अगर सीलमपुर जैसी रैलियां ताबड़तोड़ करते हैं उसका नुकसान बीजेपी को भी जरूर होगा.
राहुल गांधी दिल्ली में अपने पहले चुनावी रैली में कहते हैं कि देश में 150 अरबपति लोग हैं, जो भारत को कंट्रोल करते हैं. देश का पूरा फायदा इन अरबपतियों को मिलता है. अडाणी-अंबानी, मोदी की मार्केटिंग करते हैं. कांग्रेस अरबपतियों का देश नहीं चाहती है. जाहिर है कि जो लोग महंगाई से परेशान हैं उसमें बीजेपी के भी वोटर्स भी हैं. राहुल ने कहा कि मोदी और अरविंद केजरीवाल ने महंगाई कम करने का वादा किया था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए. भारत में गरीब, और गरीब होते जा रहे हैं, जबकि अमीर, और अमीर. दिल्ली का वोटर्स समझता है कि यदि वह गरीब हो रहा है तो इसमें अरविंद केजरीवाल क्या कर सकते हैं? जाहिर है कि केजरीवाल के निशाने पर केवल बीजेपी है.
3-कांग्रेस को खुद की लड़ाई लड़नी है, जैसा केजरीवाल कहते भी हैं
कांग्रेस ने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में साढ़े चार प्रतिशत के करीब वोट था. यह उसका सबसे खराब समय चल रहा था. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि कांग्रेस की स्थिति 2020 की तुलना में 2025 में कुछ सुधरी है. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि इस बार दिल्ली में पहले से अच्छी स्थिति रहेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि अगर दिल्ली में कांग्रेस को फिर से अपनी जमीन हासिल करनी है तो उसे अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर हमले करने होंगे. पर राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति शायद ये नहीं है. राहुल गांधी आम आदमी पार्टी का विरोध सिर्फ कांग्रेस की पॉजिटिव वर्क्स को याद दिलाने भर से है.
राहुल कहते हैं कि जब केजरीवाल आए थे, आपको याद होगा शीला जी की सरकार थी. वो दिल्ली याद है आपको? केजरीवाल आए और उन्होंने प्रचार किया कि दिल्ली को मैं साफ कर दूंगा, भ्रष्टाचार मिटा दूंगा, पेरिस बना दूंगा. अब देखिए हुआ क्या. बाहर चला नहीं जा सकता है, इतना प्रदूषण है. आधे लोग बीमार रहते हैं, कैंसर बढ़ रहा है. पॉल्यूशन और महंगाई बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार को अरविंद केजरीवाल मिटाएंगे. आप बताइए दिल्ली में केजरीवाल ने भ्रष्टाचार मिटाया क्या? हां राहुल गांधी केजरीवाल के लिए एक सवाल जरूर छोड़ते हैं. वो सवाल करते हैं कि केजरीवाल से पूछना चाहिए कि क्या वह पिछड़ों के लिए आरक्षण और जाति जनगणना कराना चाहते हैं? राहुल कहते हैं कि पिछड़ों को उनका हक नहीं मिल रहा है. संसाधनों का असमान वितरण है. हम समानता चाहते हैं. गरीबों, अल्पसंख्यकों के लिए भागीदारी चाहते हैं.