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केजरीवाल के खिलाफ थाने चली गई कांग्रेस अडानी के मामले में बयानबाजी तक सीमित क्यों? । opinion

अडानी के खिलाफ राहुल गांधी कई साल से बोल रहे हैं. अब उन्होंने पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा के साथ एक वीडियो जारी किया है. देखने से लगता है कि उनके पास अडानी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुख्‍ता सबूत हैं. अगर राहुल की नीयत साफ है तो उन्हें कोर्ट या पुलिस का सहारा लेना चाहिए. जैसे उनकी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ किया.

राहुल गांधी और गौतम अडानी राहुल गांधी और गौतम अडानी
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

राहुल गांधी कई वर्षों से देश के मशहूर उद्योगपति गौतम अडानी के पीछे पड़े हुए हैं. उनका मकसद यह होता है कि अडानी के बहाने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टार्गेट करना. हर मंच पर वो अडानी के खिलाफ बोलते रहे हैं. अब कांग्रेस में उनके एक सहयोगी पवन खेड़ा जो उनकी पार्टी के प्रवक्ता भी हैं, ने एक वीडियो बनाकर राहुल गांधी को बताया है कि आप जो कह रहे थे वो सब सही है. उनकी दलीलों में वे राहुल को 'सर' कहकर संबोधित कर रहे हैं, और राहुल उनकी बातों से खुश और संतुष्‍ट भी नजर आ रहे हैं.

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28 अक्टूबर को X पर पोस्ट किया गया यह वीडियो राहुल के अकाउंट पर अब भी सबसे ऊपर पिन है. जिसका शीर्षक है- 'अडानी बचाओ सिंडिकेट'. कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा अडानी को विलेन साबित करने के लिए SEBI प्रमुख माधबी बुच का सहारा ले रहे हैं. उनके कहने का लब्बोलुआब यह है कि अडानी को बचाने के लिए माधवी बुच को सेबी में प्लांट किया गया है.

राहुल कहते हैं कि संस्थागत पतन ने अब भाई-भतीजावाद के अधिक खतरनाक स्वरूप 'अडानी बचाओ सिंडिकेट' को जन्म दिया है. मौजूदा सरकार अब केवल एकाधिकार को बढ़ावा नहीं दे रही है, बल्कि सक्रिय रूप से देश की संपत्ति को कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित कर रही है. परेशानी इस बात की नहीं है कि राहुल गांधी जो कह रहे हैं वो गलत है या सही. पर राहुल गांधी की नीयत पर संदेह इसलिए हो जाता है क्योंकि एक तरफ तो वो अडानी पर हमले करते हैं और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के तमाम नेता जिसमें राहुल के खास लोग भी शामिल हैं वो अडानी का पलक पावड़े बिछाकर स्वागत करते हैं.

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1- राहुल गांधी के पास पुख्ता सबूत हैं तो अडानी के खिलाफ कोर्ट क्यों नहीं जाते?

वीडियो में पवन खेड़ा कहते हैं कि वो किसी व्हिसिल ब्लोअर के हवाले से सबकुछ भी बता रहे हैं.  उनके पास पुख्ता सबूत हैं. अगर कांग्रेस के पास इतने ही सबूत हैं तो उन्हें कोर्ट के पास क्यों नहीं जाना चाहिए? यह तो एक बहुत बड़ा अपराध है कि हम किसी के अपराध के बारे में सबूत सहित जानकारी रखते हैं और यह सबूत कोर्ट और अन्‍य एजेंसियों से साझा नहीं कर रहे हैं. मान लिया कि वे सरकारी एजेंसियों पर भरोसा नहीं करते हैं, लेकिन क्‍या कोर्ट से भी उन्‍हें परहेज़ है? वही एजेंसियां खासकर पुलिस और कोर्ट, जिनके सहारे कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के शराब घोटाले को अंजाम तक पहुंचाया. घोटालेबाज नेताओं को जेल जाना पड़ा. तो फिर अडानी के खिलाफ कांग्रेस क्यों कोर्ट या पुलिस में शिकायत नहीं दे सकती है. क्‍या अडानी से डरती है कांग्रेस? या, उसका मकसद अडानी को बदनाम और ब्‍लैकमेल करना है? और उसके सहारे मोदी सरकार पर दबाव बनाए रखना?

2- 'घोटालेबाज' सेबी के नियंत्रण वाले शेयर बाजार में राहुल क्यों बढ़ाते जा रहे हैं निवेश?

राहुल गांधी बार-बार सेबी और अडानी के रिश्तों पर सवाल उठाते रहे हैं. हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जांच को भी इसी सिलसिले में संदिग्ध बताते हैं. अगर किसी संस्था पर इस कदर गलत होने का भरोसा है तो उन्हें वहां करोड़ों का जो निवेश किया है, जो मुनाफा कमा रहे हैं, उसे बंद करना चाहिए. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इस देश में करोड़ों लोगों को कांग्रेस की बातों पर भरोसा है. नेहरू परिवार के लोगों को भरोसा है. ये लोग जब सुनेंगे कि राहुल गांधी सेबी को भ्रष्ट बता रहे हैं तो हो सकता है कि उनका भरोसा शेयर बाजार से उठ जाए. पर जब वो देखेंगे उसी सेबी के माध्यम से राहुल गांधी करोड़ों कमा रहे हैं. रायबरेली लोकसभा के लिए भरे गए चुनावी नामांकन में दर्ज शेयरों के आधार पर 15 मार्च, 2024  उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू 4.33 करोड़ रुपये थी.शेयर बाजार में 12 अगस्त, 2024 तक उनके पोर्टफोलियो की कीमत बढ़कर 4.80 करोड़ रुपये हो गई थी.

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3- राहुल के ईमानदार कदम की राह देख रही है जनता और दूसरी राज्‍य सरकारें भी

राहुल गांधी की बातों पर आम लोगों को इसलिए यकीन नहीं होता क्योंकि उनकी पार्टी गौतम अडानी के साथ गलबहियां करती नजर आती है. राहुल गांधी बार-बार कई साल से कह रहे हैं कि अडानी और अंबानी देश को लूट रहे हैं पर दूसरी ओर कांग्रेस की सरकारें उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं. या जानबूझकर पूंजीपतियों को लेकर उनका डबल स्टैंडर्ड है.

अडानी फाउंडेशन का तेलंगाना की कांग्रेस सरकार को 100 करोड़ का दान चर्चा में है. अडानी समूह ने युवाओं में उद्योग-विशिष्ट क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से एक कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तेलंगाना सरकार को 100 करोड़ रुपये का दान दिया है. विपक्षी दलों ने इस दान की तीखी आलोचना की है, जिसमें भाजपा और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) दोनों ने कांग्रेस के डबल स्टैंडर्ड की आलोचना की. कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने अपनी एक्स पोस्‍ट में लिखा, 'राहुल गांधी पूरे दिन 'अडानी अडानी' चिल्लाते रहे, इसके बावजूद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी आगे बढ़े और गौतम अडानी से दान स्वीकार किया. अपने ही मुख्यमंत्रियों द्वारा एक पायदान की तरह व्यवहार किया जाना बहुत बुरा लगता होगा.'

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यह कोई पहली बार नहीं हुआ है जब अडानी ने किसी कांग्रेस सरकार के लिए कुछ किया हो. अडानी ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकारों में वहां खूब निवेश किया है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में 7 अक्टूबर 2022 को जब गौतम अडानी ग्रुप ने अशोक गहलोत सरकार के साथ राजस्थान में 65 हजार करोड़ के निवेश की घोषणा की थी. तब गौतम अडानी ने कहा था कि अशोक गहलोत की पुरानी सरकार में भी हमने काम किया है. यह कोई नया नहीं है.  कर्नाटक के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा था है कि कर्नाटक अदानी ग्रुप के निवेश के लिए खुला है. 

अडानी को लेकर राहुल और बाकी कांग्रेस के विरोधाभास के चलते जनता में भी भ्रम की स्थिति है. इसी के चलते राहुल गांधी की तमाम बातों के बावजूद कांग्रेस को चुनाव में फायदा नहीं होता. वरना, ऐसे ही भ्रष्‍टाचार के आरोपों के चलते 1989 में राजीव गांधी और फिर 2014 में यूपीए सरकार ने सत्‍ता गंवाई. राहुल गांधी यदि ईमानदारी से अडानी के भ्रष्‍टाचार और मोदी सरकार की मिलीभगत को साबित कर पाते तो शायद जनता भी उनके साथ खड़ी हो जाती. अभी तो राहुल गांधी के इरादों पर ही शक होता है!
 

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