Advertisement

केजरीवाल सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत पर क्यों मेहरबान हुए दिल्ली के एलजी सक्सेना?

दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर आज मंत्री कैलाश गहलोत ने झंडारोहण किया, जब‍कि अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि आतिशी ये काम करें. तो क्या समझा जाए कि एलजी वीके सक्सेना वेवजह आम आदमी पार्टी को परेशान कर रहे थे? आखिर बीजेपी को इससे क्या फायदा होने वाला है?

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत झंडारोहण करते. दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत झंडारोहण करते.
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 7:15 PM IST

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सीएम अरविंद केजरीवाल के बदले परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने गुरुवार को झंडा फहराया. अरविंद केजरीवाल के जेल में रहने के चलते उनकी ओर से यह सूचना आई थी कि दिल्ली सरकार की ओर से उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली सरकार की वरिष्ठ मंत्री आतिशी झंडारोहण करेंगी. पर एलजी विनय सक्सेना ने आतिशी को अनुमति न देकर कैलाश गहलोत को इसके लिए चुन लिया. इस सबंध में जीएडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी ने तर्क दिया था कि मुख्यमंत्री के निर्देश कानूनी रूप से अवैध हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता.जेल नियमों के अनुसार इसकी इजाजत नहीं है. 

Advertisement

 समझा जा रहा था कि इस फैसले से आम आदमी पार्टी में कुछ तनाव का माहौल बन सकता है. पर पार्टी ने परिपक्वता दिखाते हुए झंडारोहण के अवसर पर पूरी एकता दिखाई. झंडारोहण के दौरान कैबिनेट मंत्री आतिशी, गोपाल राय, भारद्वाज और इमरान हुसैन की मौजूदगी इसका गवाह थी. दूसरी ओर गहलोत ने भी अपने भाषण में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमकर तारीफ की . उन्होंने भरसक यह जताने की कोशिश की उनके नेता केजरीवाल हैं और हमेशा वही रहेंगे. अब सवाल उठता है कि आखिर एलजी वीके सक्सेना को दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी को झंडारोहण करने से मना करके क्या हासिल हुआ? देखा जाए तो दिल्ली में उनके इस फैसले से बीजेपी की किरकिरी ही हुई. पर इतने बड़े स्तर पर राजनीति को समझना इतना आसान नहीं होता. सक्सेना भी अनुभवी खिलाड़ी हैं. उनके कदम को हल्के में नहीं लिया जा सकता. आइये देखते हैं कि उन्होंने कैलाश गहलोत पर ये मेहरबानी क्यों दिखाई होगी? 

Advertisement

1-क्या सिर्फ अच्छे संबंधों के चलते 

नजफगढ़ से विधायक गहलोत को 2017 में कपिल मिश्रा की जगह मंत्री बनाया गया था. मिश्रा केजरीवाल और पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे. पिछले कुछ वर्षों में गहलोत की आम आदमी पार्टी सरकार में एक गंभीर नेता के तौर उपस्थिति रही है और उन्हें सीएम के भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में भी देखा जाता रहा है. इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि पिछले कुछ दिनों में गहलोत ने कई मौकों पर सक्सेना के साथ मंच साझा किया था. बीते मंगलवार को भी बहुस्तरीय इलेक्ट्रिक बस डिपो के शिलान्यास समारोह में सक्सेना मुख्य अतिथि थे और उनके साथ गहलोत भी थे. इससे पहले, सक्सेना उस समारोह में भी शामिल हुए जहां नई बसें दिल्ली के बेड़े में शामिल की गईं. आम आदमी पार्टी के अन्य नेता एलजी सक्सेना के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं पर कैलाश गहलोत हमेशा उन्हें यथोचित सम्मान देते रहे हैं. हो सकता है कि इस कारण एलजी ने उन्हें यह मौका दिया हो. पर आतिशी का नाम काटकर कैलाश गहलोत को मौका देने का वजह इतना सिंपल नहीं हो सकता . 

2-क्या पार्टी तोड़ने की रणनीति है

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी तोड़ने की रणनीति ही माना जा रहा है. आम आदमी पार्टी के नेता भी यही आरोप लगा रहे हैं. एक्सप्रेस ने लिखा है कि आप के नेता सक्सेना के इस कदम को दरार पैदा करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं. आम आदमी पार्टी के एक नेता ने एक्सप्रेस को बताया कि एलजी का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि वह सीएम के आदेशों का पालन नहीं करेंगे. इसीलिए उन्होंने निर्देशों को खारिज कर दिया और गहलोत से झंडारोहण कराया. एलजी झंडा नहीं फहरा सकते, इसलिए उन्होंने जानबूझकर दरार पैदा करने के लिए गहलोत जी को नियुक्त किया... लेकिन वह पार्टी कार्यक्रमों, बैठकों के साथ-साथ एक मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. गहलोत ने आज भी ट्वीट करके अरविंद केजरीवाल को मल्टी-लेवल बस पार्किंग डिपो का श्रेय दिया.हालांकि उनसे राजस्व विभाग छीनकर आतिशी को दिए जाने के बाद कुछ नाराजगी थी, लेकिन इसे पार्टी ने इस मुद्दे को सुलझा लिया था. पर यही एक उम्मीद की किरण कभी भी बीजेपी को प्रकाशमान कर सकती है. क्योंकि इसके पहले भी कई नेताओं ने पार्टी छोड़ने के दिन तक अपने पार्टी के प्रति वफादारी का सबूत देने के लिए ट्वीट करते रहे हैं.

Advertisement

3-क्या ईडी का दबाव काम कर सकता है

कैलाश गहलोत को ईडी ने इसी साल 30 मार्च को समन जारी करके पूछताछ के लिए बुलाया था. दरअसल जांच एजेंसी ईडी की टीम दिल्ली सरकार की रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ करना चाहती थी. हालांकि दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश गहलोत दिल्ली के परिवहन मंत्री हैं. जब दिल्ली सरकार की विवादित आबकारी नीति मामले में पॉलिसी बनाई जा रही थी उस समय दिल्ली सरकार ने एक समिति बनाई थी. उस कमेटी में तीन वरिष्ठ मंत्रियों को शामिल किया गया था, जिसमें एक मंत्री कैलाश गहलोत भी थे. शेष दो लोगों में दिल्ली के तत्कालीन पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तत्कालीन स्वास्थ मंत्री सतेंद्र जैन भी थे. जांच एजेंसी इसी केस में मनीष सिसोदिया और जैन को पहले गिरफ्तार कर चुकी थी. उसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया. आम आदमी पार्टी अकसर आरोप लगाती रही है कि उनकी पार्टी के नेताओं पर ईडी का खौफ दिखाकर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाया जाता रहा है. तो क्या समझा जाए कि भविष्य मौका देखकर बीजेपी कैलाश गहलोत की पार्टी में एंट्री करा सकती है.या एलजी कैलाश के रूप में अपना एक वेल विशर आम आदमी पार्टी में रखना चाहते हैं.

Advertisement

4-हरियाणा विधानसभा चुनाव से 'जाट' गेहलोत का कनेक्‍शन!

कैलाश गहलोत जाट समुदाय से आते हैं. हरियाणा में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना बस कुछ दिनों में जारी ही होने वाली है. भारतीय जनता पार्टी की मुश्किल यह है कि हरियाणा में जाट किसान आंदोलन, महिला पहलवानों के आंदोलन आदि के चलते नाराज हैं. लोकसभा चुनावों के समय तो कई गांवों में जाट किसानों ने बीजेपी प्रत्याशियों को घुसने नहीं दिया. कैलाश गहलोत का विधानसभा क्षेत्र नजफगढ़ है जो हरियाणा बॉर्डर पर ही है. बीजेपी की यह एक रणनीति भी हो सकती है कि जाट नेता को महत्व देकर हरियाणा के जाटों का गुस्सा थोड़ा कम किया जाए. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement