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गंभीर आरोपों से घिरीं महुआ मोइत्रा से ममता बनर्जी की दूरी की वजहें दिलचस्प हैं...

महुआ मोइत्रा विवाद से ममता बनर्जी ने पूरी तरह दूरी बना ली है. TMC नेताओं को भी चुप रहने की हिदायत मिली हुई है, लेकिन इसकी वजह अडानी ग्रुप का कारोबार है या राहुल गांधी?

महुआ मोइत्रा 2009 से ही कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच तकरार की वजह रही हैं महुआ मोइत्रा 2009 से ही कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच तकरार की वजह रही हैं
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

महुआ मोइत्रा एक बार फिर अकेले पड़ गयी हैं. तृणमूल कांग्रेस से बाहर तो थोड़ा थोड़ा सपोर्ट भी मिल रहा है, लेकिन अंदर से बिलकुल अकेले छोड़ दिया गया है. बिलकुल वैसे ही जैसे जुलाई, 2022 में देवी काली पर टिप्पणी के बाद महुआ मोइत्रा को अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ी थी, लेकिन ताजा मामला कुछ ज्यादा पेचीदा लगता है.

देवी काली को लेकर एक पोस्टर पर विवाद के बीच महुआ मोइत्रा ने कहा था, 'जिस तरह हर व्यक्ति को अपने तरीके से देवी-देवताओं की पूजा करने का अधिकार है, उसी तरह बतौर एक व्यक्ति उन्हें देवी काली के मांसाहारी और मदिरा स्वीकार करने वाली देवी के रूप में कल्पना करने का पूरा अधिकार है.' 

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और अब बिलकुल उसी अंदाज में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस ने महुआ मोइत्रा को लेकर चल रहे विवाद से दूरी बना ली है. टीएमसी नेता कह रहे हैं कि पार्टी के पास इस मुद्दे पर कहने के लिए कुछ नहीं है. प्रतिक्रिया वही दे सकता है, जिसके आस पास विवाद चल रहा है. 

महुआ मोइत्रा को लेकर ताजा विवाद संसद में कारोबारी गौतम अडानी से जुड़े सवाल पूछने को लेकर है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने महुआ बनर्जी पर आरोप लगाया है कि अडानी ग्रुप से जुड़े सवाल संसद में पूछने के लिए महुआ मोइत्रा ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे लिये. बीजेपी नेता ने इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को पत्र लिखकर अपनेआरोपों की जांच की मांग की है. महुआ मोइत्रा का मामला संसद की एथिक्स कमेटी के पास पहुंचा है.

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कारोबारी दर्शन हीरानंदानी की तरफ से दिये गये हलफनामे के मुताबिक, महुआ मोइत्रा ने संसद की साइट पर अपने अकाउंट का लॉगिन आईडी और पासवर्ड शेयर किया था. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने महुआ मोइत्रा का बचाव किया है - ऐसा ही बचाव तृणमूल कांग्रेस के एक नेता फिरहाद हाकिम की तरफ से भी किया गया है, जो पार्टीलाइन से अलग है. 

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी महुआ मोइत्रा पर लगे आरोप को खारिज करते हुए कहते हैं कि सदन के अंदर हर सदस्य को बोलने का अधिकार है. अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, केंद्र सरकार एक खास उद्योगपति को बचाने के लिए इतनी तत्पर है कि अगर कोई उसके खिलाफ सवाल पूछता है, वो उसकी दुश्मन बन जाती है. बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कह रहे हैं, 'महुआ मोइत्रा एक उच्च शिक्षित महिला हैं... राजनीतिक में आने से पहले एक बैंकर के रूप में उनका शानदार करियर रहा... दूसरी ओर, जो उनके खिलाफ अनर्गल आरोप लगा रहे हैं वो तमाम गलत कामों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें फर्जी डिग्री भी शामिल है.' 

सिर्फ एक टीएमसी नेता फिरहाद हकीम का भी कहना है कि महुआ मोइत्रा पर लगाये ये आरोप उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश है, क्योंकि वो बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के खिलाफ काफी मुखर हैं. कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम का कहना है कि वो पार्टी के प्रवक्ता नहीं हैं, इसलिए ये टिप्पणी नहीं कर सकते कि टीमसी क्या सोच रही है? कहते हैं, निजी तौर पर मेरा ये मानना है कि ये सब महुआ मोइत्रा को चुप कराने की साजिश है.

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महुआ मोइत्रा पर तृणमूल कांग्रेस का स्टैंड

महुआ मोइत्रा विवाद पर तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष का साफ साफ कहना है कि पार्टी के पास इस मसले पर कहने के लिए कुछ नहीं है. अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कुणाल घोष कहते हैं, 'हमें लगता है कि जो इंसान इस विवाद में घिरा है, वही इस पर बात करने के लिए सबसे सही व्यक्ति है.'

ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत में तृणमूल कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि टीएमसी नेतृत्व महुआ मोइत्रा को लेकर किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहता, लिहाजा पार्टी दूरी बना कर चलेगी. 

तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन अपनी नेता ममता बनर्जी के रुख को थोड़ा अलग तरीके से पेश करते हैं. डेरेक ओ ब्रायन का कहना है, तृणमूल कांग्रेस जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. रिपोर्ट आने के बाद ही पार्टी फैसला करेगी कि आगे क्या करना है. 

महुआ मोइत्रा अक्सर ही विवादों में रहती हैं. 2019 में संसद पहुंचने के बाद से कभी कभार ही ऐसा हुआ है जब महुआ मोइत्रा विवादों में न रही हों. संसद में महुआ मोइत्रा ने पेट्रोलियम, कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग से लेकर रेलवे तक 28 मंत्रालयों से जुड़े 62 पूछे हैं - और इसमें खास बात ये है कि 9 सवाल अडानी ग्रुप को लेकर है. ये भी नहीं कह सकते कि महुआ मोइत्रा ने सबसे ज्यादा सवाल अडानी ग्रुप को ही लेकर पूछे, क्योंकि 9 सवाल महुआ मोइत्रा ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से जुड़े हैं.

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ममता बनर्जी के दूरी बना लेने की क्या वजह हो सकती है?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता की डांट फटकार का एक वाकया काफी चर्चित रहा है, और वो महुआ मोइत्रा से ही जुड़ा है. 2021 के एक वायरल वीडियो को याद करें तो पाते हैं कि मंच पर ही ममता बनर्जी महुआ मोइत्रा को डपट रही हैं. महुआ मोइत्रा से ममता बनर्जी कह रही थीं, 'यहां जिस तरह से गुटबाजी हावी है, वो गलत है... महुआ आप तय नहीं करेंगी कि कौन चुनाव लड़ेगा?

ये वाकया नदिया का बताया जाता है. पता चला था कि वहां के तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी से शिकायत की थी कि मीडिया में जो भी खबरें चल रही थीं, उनके पीछे महुआ मोइत्रा का ही हाथ है. कार्यकर्ताओं की शिकायत थी कि महुआ मोइत्रा के बल पर ही यूट्यूबर भी उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे. 

हैरानी की बात ये रही कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने महुआ मोइत्रा को डांटने के पीछे कार्यकर्ताओं की शिकायत तो बहाना रही, असली गुस्सा तो अडानी ग्रुप को लेकर महुआ मोइत्रा के बयान थे. असल में महुआ मोइत्रा ने अडानी ग्रुप को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी की थी, जो उसके खिलाफ था. और ये टिप्पणी आने से कुछ ही दिन पहले ममता बनर्जी और कारोबारी गौतम अडानी की मुलाकात हुई थी. 

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उन दिनों ममता बनर्जी बंगाल में निवेश को लेकर कुछ उद्योगपतियों से मिली थीं. उसी क्रम में ममता बनर्जी और गौतम अडानी की भी मुलाकात हुई थी, और पश्चिम बंगाल में निवेश के लिए रिक्वेस्ट की थी. 

सोशल मीडिया पर तो कुछ भी चलता है, लेकिन हर बार धुआं दिखे और आग न लगी हो - ऐसा भी तो हमेशा नहीं होता. ऐसे और भी मौके देखने को मिले हैं जब ममता बनर्जी या उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस अडानी ग्रुप के मुद्दे पर या तो कदम पीछे खींच लेती है, या फिर बिफर पड़ती है - और ऐसा तब तो पक्का होता है जब एक किरदार कांग्रेस भी होती है. 

क्या महुआ और ममता के बीच राहुल गांधी आ गये हैं?

चीन के बाद अडानी ग्रुप का कारोबार राहुल गांधी के सवालों का सबसे पसंदीदा टॉपिक है. और चाहे हिंडनबर्ग रिपोर्ट का बहाना मिले या फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट का, राहुल गांधी कोई भी मौका नहीं चूकते. कभी भी रहें, फर्क नहीं पड़ता - राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस बुला कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अडानी ग्रुप को लेकर सवाल पूछते ही हैं. 

ये भी देखने को मिला है कि अडानी ग्रुप के मुद्दे पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में भी तकरार होती रही है. और ऐसा एक से ज्यादा बार हुआ है. जब अडानी ग्रुप के कारोबार को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनसे मुलाकातों और विदेशों में कारोबार को लेकर सवाल पूछे थे तो काफी बवाल मचा था - और कांग्रेस की तरफ से जेपीसी से जांच कराने की मांग हो रही थी. 

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अडानी के मुद्दे पर पूरे विपक्ष को कुछ हद तक एकजुट भी कर लिया था, लेकिन जेपीसी की जिद आड़े आ गयी और बीजेपी को घेरने का मौका थोड़ा सा जोर पकड़ने के बाद ही धराशायी हो गया. 

अडानी के मुद्दे पर संसद में सत्ताधारी बीजेपी को घेरने के मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से विपक्षी दलों की कई बार मीटिंग बुलायी गयी थी. कांग्रेस ने कुछ राजनीतिक दलों को राजी भी कर लिया था, लेकिन जेपीसी से जांच के मुद्दे पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बिदक गयी - और कांग्रेस हाथ मलती रह गयी. 

और वैसे ही विपक्षी गठबंधन की मुंबई बैठक के दौरान भी राहुल गांधी ने एक बार अडानी ग्रुप के मसले पर चर्चा शुरू कर दी थी. फिर क्या था, ममता बनर्जी आपे से बाहर हो गयीं. सूत्रों के हवाले से तब आयी खबरों के मुताबिक, ममता बनर्जी का सवाल था जो बात एजेंडे में नहीं शामिल था उस पर चर्चा करने का किसी को अधिकार नहीं है. ये भी सुनने में आया था कि ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व को साफ साफ चेता दिया था कि आगे कभी ऐसे मुद्दे नहीं उठाये जाने चाहिये जिसकी पहले से मंजूरी न ली गयी हो. 

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फिर तो सवाल यही उठता है कि क्या महुआ मोइत्रा से ममता बनर्जी के दूरी बनाने के पीछे अडानी ग्रुप के साथ साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हैं?

दर्शन हीरानंदानी का यहां तक दावा है कि अडानी के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट करने के लिए महुआ मोइत्रा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगातार संपर्क में थीं. हीरानंदानी का ये भी दावा है कि राहुल गांधी के साथ साथ महुआ मोइत्रा और भी कई कांग्रेस नेताओं के संपर्क में थी, जो अडानी ग्रुप के कारोबार का मुद्दा उठाने के लिए महुआ मोइत्रा की मदद कर रहे थे. 

जैसे महुआ मोइत्रा विवाद में फंस कर अकेली नजर आ रही हैं, करीब करीब ऐसे ही अडानी ग्रुप के मुद्दे पर कांग्रेस भी विपक्षी खेमे में अकेले पड़ जाती है. सिर्फ इसीलिए नहीं कि शरद पवार से लेकर ममता बनर्जी तक, ऐसे सारे नेता राहुल गांधी को भी भाव नहीं देते, बल्कि उसकी बड़ी वजह कारोबारी गौतम अडानी भी हैं - लेकिन गौतम अडानी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले अशोक गहलोत का राजस्थान के मामले में राहुल गांधी की परवाह न करने का मामला काफी अलग है.

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