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महाराष्ट्र चुनाव में 'बंटेंगे तो कटेंगे' का विरोध कर रहीं पंकजा मुंडे का दर्द समझना जरूरी है । Opinion

कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में दोनों गठबंधनों में विचारों की खिचड़ी पक रही है. योगी आदित्यनाथ के नारे 'बंटेंगे तो कटेंगे' का विरोध महायुति गठबंधन में सबसे पहले अजित पवार ने किया. अब बीजेपी नेता पंकजा मुंडे भी इसके खिलाफ उतर आईं हैं.

दिवंगत गोपीनाथ की दोनों बेटियों पंकजा और प्रीतम के साथ क्या बीजेपी में अन्याय हुआ? दिवंगत गोपीनाथ की दोनों बेटियों पंकजा और प्रीतम के साथ क्या बीजेपी में अन्याय हुआ?
संयम श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

भारतीय जनता पार्टी की एमएलसी पंकजा मुंडे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महाराष्ट्र में इस्तेमाल किए गए नारे बटेंगे तो कटेंगे के खिलाफ बयान देकर एक बार फिर पार्टी से पंगा ले लिया है. इसके पहले महायुति गठबंधन के हिस्सा एनसीपी के मुखिया अजित पवार ने भी बंटेंगे तो कटेंगे भाषण से अपना इत्तिफाक नहीं जताया था. इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में पंकजा ने कहा, सच कहूं तो मेरी राजनीति अलग है. मैं इसे सिर्फ इसलिए समर्थन नहीं दूंगी कि मैं उसी पार्टी की हूं. मेरा मानना है कि हमें सिर्फ विकास पर काम करना चाहिए. एक नेता का काम है कि वह इस भूमि पर रहने वाले हर व्यक्ति को अपना बनाए. इसलिए हमें महाराष्ट्र में ऐसे किसी मुद्दे को नहीं लाना चाहिए. अपने बयानों के चलते पंकजा को बहुत दिनों तक राजनीतिक वनवास में रहना पड़ा है. महाराष्ट्र के दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की दोनों बेटियों पंकजा और प्रीतम के साथ सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. हालांकि पिछड़ी जातियों विशेषकर वंजारा समुदाय में मुंडे परिवार की पैठ को देखते हुए पंकजा को बीजेपी ने एमएलसी जरूर बनाया हुआ है. 

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1-क्या बीजेपी के लिए यह शर्मनाक है?

पंकजा मुंडे अपनी बात को माइल्ड करने के लिए कहती हैं कि योगी आदित्यनाथ ने इसे एक अलग संदर्भ में और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में कहा था. इसका वही मतलब नहीं है जिसे हम महाराष्ट्र में इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही पीएम मोदी की तारीफ भी करती हैं. मुंडे कहती हैं कि  मोदीजी ने सभी के साथ न्याय किया है. उन्होंने राशन, आवास या सिलेंडर देने में जाति या धर्म को नहीं देखा है. हालांकि वो भूल जाती हैं कि खुद पीएम मोदी ने भी
'एक हैं तो सुरक्षित हैं' का नारा दिया है. जाहिर तौर पर यह बटेंगे तो कटेंगे का ही एक रूप है. विपक्ष भी यही कह रहा है. मुंडे की बात पर पार्टी में बवाल इस लिए भी मचा हुआ है, क्योंकि एनसीपी नेता अजित पवार ने भी अभी हाल ही में कहा था कि बटेंगे तो कटेंगे जैसे नारों की राजनीति महाराष्ट्र में काम नहीं करेगी. वो कहते हैं कि, मैंने कई बार कहा है कि यह महाराष्ट्र में काम नहीं करेगा. यह यूपी, झारखंड या अन्य जगहों पर हो सकता है. सवाल यह है कि जब सहयोगी दल और पार्टी के लोग ही किसी खास नारे का विरोध करने लगे तो मतलब या तो पार्टी में सर्व सहमति से काम नहीं हो रहा है और गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है.बीजेपी से जैसी अनुशासित पार्टी के लिए वाकई यह शर्मनाक है.

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2-लोकसभा चुनाव हारने पर किसे टार्गेट किया था मुंडे ने

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता पंकजा मुंडे ने लोकसभा चुनावों में हार मिलने के कुछ दिनों बाद ही पत्रकारों से बात करते हुए कहा था  कि जीत जाती तो उन्हें हीरो माना जाता, लेकिन कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आता. महाराष्ट्र के लातूर जिले में पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि उनके समर्थक उनके अनिश्चित भविष्य को लेकर चिंतित हैं. दरअसल पंकजा मुंडे लोकसभा चुनाव में बीड सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के बजरंग सोनवणे से 6,553 मतों के मामूली अंतर से हार गईं. बीजेपी नेता को 6.7 लाख वोट मिले थे.  मुंडे ने कहा कि 2019 का चुनाव हारने के बाद उन्हें पांच साल के वनवास का सामना करना पड़ा और हालिया हार के बाद उनके समर्थक समझ नहीं पा रहे हैं कि उनका भविष्य क्या है? उन्होंने कहा कि मैंने अपने लिए चुनाव नहीं लड़ा.क्योंकि जब तक पार्टी ने मेरी उम्मीदवारी घोषित नहीं की मुझे नहीं पता था कि मैं चुनाव लड़ूंगी. 

दरअसल पंकजा मुंडे को पार्टी ने बीड से टिकट दिया था जहां से उनकी बहन प्रीतम लगातार 2 बार से चुनाव जीत रही थीं.अचानक बहन का टिकट काटकर उस पर खुद चुनाव लड़ना वास्तव में पंकजा के लिए मुश्किल था.पर पंकजा के  पास और कोई रास्ता नहीं था.

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3-पहले भी बीजेपी को लेकर पंकजा का दर्द उभरता रहा है

महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने एक बार कहा था कि वह भाजपा की हैं. लेकिन भाजपा उनकी पार्टी नहीं है. दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से सुर्खियों से दूर हो गईं थीं. वह 2014 से 2019 के बीच देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री थीं.इसके बाद ही उनके सितारे गर्दिश में हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि भाजपा बड़ी पार्टी है. लेकिन वह उनकी नहीं है. उन्होंने महादेव जानकर नीत राष्ट्रीय समाज पक्ष का संदर्भ देते हुए कहा, मैं भाजपा की हूं.अगर मुझे मेरे पिता से कोई समस्या है तो मैं अपने भाई के घर जाऊंगी.'यह एक तरह से उनकी ओर से दी गई धमकी ही थी. फिर उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर और ट्वीटर से अपने प्रोफाइल से बीजेपी को गायब कर अपना रोष प्रकट किया था. उस समय तक ये मान लिया गया था अब पंकजा मुंडे शायद पार्टी छोड़ दें.इस तरह कई साल तक कयास लगाए जाते रहे कि प्रदेश भाजपा में मुंडे को किनारे कर दिया गया है. अगस्त 2022 में एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुंडे ने कहा था कि वह संभवत: ‘इतनी योग्य नहीं हैं कि मंत्री पद मिल सके.'

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4-क्या पंकजा के साथ अन्याय हुआ बीजेपी में?

बीजेपी में पिछले 10 सालों का इतिहास बताता है कि दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा के साथ बहुत अन्याय हुआ है.उनके समर्थकों का मानना है कि मोदी-अमित शाह युग के उदय के बाद से उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया गया है. हालांकि, मुंडे की विरासत के कारण वह पार्टी की एक महत्वपूर्ण ओबीसी चेहरा हैं, जिसे भाजपा नजरअंदाज नहीं कर सकती.पंकजा ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में भाग लिया था, जिसे उन्होंने अनिच्छा से लड़ा था क्योंकि वह राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ नहीं खोना चाहती थीं. महाराष्ट्र में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी को ऐसा लगा कि अगर मराठावाड में बीजेपी की स्थिति सुधारनी है तो पंकजा को आगे लाना होगा. इस क्रम में पार्टी ने उन्हें एमएलसी बना दिया. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनावों में गठबंधन के चलते उनके परिवार की सीट परली एनसीपी को मिल गई.एनसीपी ने पंकजा के चचेरे भाई धनंजय मुंडे को उम्मीदवार बनाया है.ये वही धनंजय हैं जिन्होंने 2019 के विधानसभा चुनाव में पंकजा को हराया था. जाहिर है जब आज पंकजा उनके लिए वोट मांगती होंगी तो उन्हें कैसा लगता होगा. एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार उन्होंने कि उन्हें दुख है कि भाजपा परली की दौड़ में नहीं है. लेकिन मैंने पार्टी कार्यकर्ताओं से ‘घड़ी’ (एनसीपी का चुनाव चिह्न) के लिए प्रचार करने की अपील की है, इसे ‘कमल’ के समान मानते हुए.

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5-एक बार फिर मंत्री बनते-बनते रह गईं पंकजा

इस बार लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में बीजेपी की जमीन खिसकने पर पार्टी को एक बार फिर से मुंडे परिवार की याद आई.दरअसल भाजपा इस बार मराठावाड़ की आठ लोकसभा सीटों में से एक भी नहीं जीत सकी. मराठावाड़ में कुल 46 विधानसभा क्षेत्रों पर पार्टी की नजर है और तभी संभव था जब पंकजा को कोई महत्वपूर्ण रोल दिया जाए.मराठा आरक्षण विरोध और ओबीसी लामबंदी के कारण बीजेपी को जमीन खिसकने का एहसास होने के पहले ऐसी चर्चा थी कि उन्हें राज्यसभा में भेजकर नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.फिर बाद में यह भी चर्चा हुई कि उन्हें एमएलसी बनाकर महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. दरअसल इस इलाके में वंजारा जाति निर्णायक पोजिशन में हैं. इसके बावजूद मुंडा एमएलसी तो बन गईं पर उनके मंत्री बनने पर ग्रहण लग गया. पंकजा ने देवेंद्र फडणवीस के उदय के बाद से राज्य इकाई में खुद को दरकिनार किए जाने का दुख कभी नहीं छिपाया.वो दर्द अब भी रह रह कर उभर जाता है. 

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