
महाकुंभ में हुई मौतों के मामले में भी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्टैंड बिल्कुल वैसा ही है, जैसा अगस्त, 2017 में गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में था.
तब भी वो सवाल उठाने वालों पर टूट पड़ते थे, अब भी वही कर रहे हैं. तब ये पूछा जा रहा था कि बच्चों की मौत कैसे हुई, अब ये पूछा जा रहा है कि प्रयागराज कुंभ में कितने लोगों की मौत हुई है. अस्पताल में बच्चों की मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी बताई गई थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ और उनके कैबिनेट साथी ऐसे सारे आरोपों को झुठलाते रहे. बच्चों की मौत की घटना योगी आदित्यनाथ के यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के छह महीने के भीतर ही हुई थी, और वो भी उनके ही इलाके के अस्पताल में.
अब योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं, मारीच और सुबाहु सनातन धर्म के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं, लेकिन धर्म को लाखों संतों का सान्निध्य प्राप्त है, ऐसे में उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. सनातन धर्म का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता, बिल्कुल सही है, लेकिन महाकुंभ की मौतों के मामले में सनातन धर्म के खिलाफ साजिश कैसे हो गई?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसद में दिये बयानों को निंदनीय और शर्मनाक करार दिया है - और दोनो नेताओं को 'सनातन विरोधी' बताया है.
महाकुंभ की मौतों पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती?
महाकुंभ में हुई मौतों पर अखिलेश यादव के बयान पर योगी आदित्यनाथ का कहना है, कुछ लोगों ने सनातन के खिलाफ सुपारी ली थी... वे चाहते थे कि बड़ा हादसा हो... लेकिन विपक्ष का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा.
संसद के बजट सत्र में सबसे पहले अखिलेश यादव कुंभ में मची भगदड़ के दौरान हुई मौतों का मामला उठाया था, और उसके बाद राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पूछा था कि भगदड़ में कितने लोग मारे गये?
लोकसभा में अखिलेश यादव का कहना था, जिस तरह सरकार बजट के आंकड़े दे रही है… महाकुंभ में मरने वालों के आंकड़े भी दे… घायलों के इलाज, भोजन, परिवहन आदि का आंकड़ा संसद में पेश किया जाये… महाकुंभ की व्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाये… और वहां खोया पाया, प्रबंधन आदि की जिम्मेदारी सेना को दी जाये.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कुंभ की मौतों पर सरकार को घेरने का अलग ही तरीका अपनाया. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘29 जनवरी को महाकुंभ में हुई भगदड़ में मारे गये हजारों लोगों को मेरी श्रद्धांजलि.’
जब सभापति जगदीप धनखड़ की तरफ से बयान वापस लेने को कहा गया, तो बोले, ये मेरा अनुमान है… अगर आंकड़े सही नहीं हैं, तो सरकार को बताना चाहिये कि सच्चाई क्या है? अगर मैं गलत हूं, तो मैं माफी मांगूंगा.
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था, ये मेरा अंदाज है... ये गलत है तो आप बताइये... अगर ये सच नहीं है, तो आप बताइये, क्या सच है?
योगी आदित्यनाथ का कहते हैं, हमें दुख है… इतने वरिष्ठ नेता, और सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष से यह उम्मीद नहीं थी कि वो संसद में ऐसे विवादित बयान देंगे, और गुमराह करेंगे… ऐसा ही एक बयान सपा प्रमुख ने दिया… दोनो पार्टियों में होड़ मची है… कौन ज्यादा सनातन विरोधी हो सकता है.
अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खड़गे को योगी आदित्यनाथ पुरानी बातों की याद दिलाते हुए घेरते हैं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सनातन धर्म का ये विराट स्वरूप अच्छा नहीं लग रहा है… ये वही लोग हैं, जो राम जन्मभूमि का विरोध करते रहे, और कुंभ जैसे आयोजनों पर भी सवाल उठाते रहे... ये वही लोग हैं, जो कोरोना महामारी के दौरान जांच, इलाज और टीकाकरण का भी विरोध कर रहे थे.
बेशक ये वही लोग हैं, जो पहले भी सवाल उठाते रहे हैं. मुमकिन है सवाल उठाने का मकसद राजनीतिक विरोध भी हो, लेकिन क्या महाकुंभ में मौतें नहीं हुई हैं?
ये भी ठीक है कि मौतों पर सरकार की तरफ से 30 लोगों की मौत की बात बताई गई है, लेकिन आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी तो जवाबदेही बनती है. ऐसी कई चीजें सामने आई हैं जिसकी वजह से मौतों का बताये जा रहे सरकारी आंकड़े पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है.
और अगर मौतों के आंकड़े पर संसद में जवाब मांगा जा रहा है, तो बताने में दिक्कत क्या है? क्योंकि, संसद में सच बोलना मजबूरी हो जाती है. ये नहीं भूलना चाहिये कि मौतों पर उठते सवाल सिर्फ राजनीतिक दलों के नहीं हैं, आम लोगों के भी हैं - उनके भी हैं, जो कुंभ में अपनों को गवां चुके हैं.
आखिर कहां चले गये वे लापता लोग?
महाकुंभ में भगदड़ की घटना को हफ्ता भर हो चुके हैं, लेकिन अब भी कई श्रद्धालु ऐसे हैं जिनकी तलाश जारी है. ये वे लोग हैं जिनका नाम ना तो घायलों की सूची में मिला है, न ही मरने वालों की सूची में, और न ही ये लावारिस लाशों में पाये गये है - सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि आखिर 29 जनवरी के हादसे के बाद से ये लोग गये कहां?
पिता की खोज खबर के लिए इलाके में जगह जगह भटक रहे मध्य प्रदेश के सागर निवासी अशोक पटेल की आजतक की टीम से मुलाकात होने पर बिफर उठते हैं. वो अपने पिता तेजई पटेल का पोस्टर लगाकर जगह जगह तलाश कर रहे हैं.
बताते हैं कि वो अपने पिता को पिता को हर जगह तलाश चुके हैं, लेकिन वो न तो अस्पताल में मिले, न पोस्टमार्टम हाउस में.
तेजई पटेल का मामला कोई अकेला नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कहां चले गये ये लापता लोग?