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योगी आदित्यनाथ ने क्यों छेड़ा ‘राग ज्ञानवापी’, समझिये यूपी उपचुनाव के नजरिये से | Opinion

अयोध्या के बाद काशी हिंदुत्व की राजनीति में शुरू से ही बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज्ञानवापी पर बयान से बीजेपी ने खुद को अलग कर लिया है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने पूरा समर्थन दिया है.

ज्ञानवापी पर योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर बीजेपी की सफाई दिलचस्प है. ज्ञानवापी पर योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर बीजेपी की सफाई दिलचस्प है.
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

ज्ञानवापी पर योगी आदित्यनाथ का बयान राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है. योगी आदित्यनाथ की पॉलिटिकल लाइन कट्टर हिंदुत्व पर आधारित है, ऐसे में ज्ञानवापी पर उनका कुछ भी बोलना अयोध्या आंदोलन से अपनेआप जुड़ जाता है.

सवाल है कि क्या योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर की धरती से ज्ञानवापी का जिक्र कर अयोध्या की तरह संघ, बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद की किसी नई मुहिम का संकेत दिया है, या लव-जिहाद और घर वापसी जैसी ही उनकी कोई नई स्कीम की तरफ इशारा है - या फिर, ये महज चुनावी जुमलेबाजी है?

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योगी आदित्यनाथ का दावा है कि ज्ञानवापी कोई मस्जिद नहीं है. योगी आदित्यनाथ के बयान का विश्व हिंदू परिषद ने तो खुला सपोर्ट किया है, लेकिन बीजेपी बचती हुई नजर आ रही है.

यूपी के मुख्यमंत्री के बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का कहना है, ज्ञानवापी मस्जिद सदियों पुराने इतिहास वाली एक ऐतिहासिक मस्जिद है. मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी का कहना है कि योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री हैं, मतलब ये कि किसी धर्म विशेष के नहीं - क्योंकि उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए यूपी के सभी धर्मों के लोगों ने वोट दिया है.

क्या बीजेपी ज्ञानवापी पर योगी की राय से इत्तेफाक नहीं रखती?

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में नाथ पंथ पर एक सेमिनार में हिस्सा ले रहे थे, और उसी दौरान उनका कहना था, दुर्भाग्य से आज जिस ज्ञानवापी को कुछ लोग मस्जिद कहते हैं, वो ज्ञानवापी साक्षात विश्वनाथ जी ही हैं.

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योगी आदित्यनाथ ने कहा, ज्ञानवापी साक्षात विश्वनाथ स्वरूप ही है. भारतीय ऋषियों-संतों की परंपरा सदैव जोड़ने वाली रही है. योगी आदित्यनाथ ने आदि शंकराचार्य की बनारस यात्रा से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए विश्व हिंदू परिषद का कहना है, सच सब जानते हैं और ऐसे में वहां पर मस्जिद की महा जिद करना ठीक नहीं है. 

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं, यूपी के मुख्यमंत्री ने जो भी कहा है, उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिये. ज्ञानवापी मामले का हल जल्द से जल्द होना ही चाहिये. काशी सिर्फ धर्म की ही नहीं बल्कि ज्ञान की नगरी भी है. वहां आदि गुरु शंकराचार्य को भी ज्ञान प्राप्त हुआ था.

क्या अयोध्या की तरह काशी का भी मुद्दा उठाया जा रहा है

हाल ही में वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष की वो याचिका खारिज कर दी जिसमें व्यास तहखाने की छत पर नमाजियों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने हिंदू पक्ष की मरम्मत कराने की मांग भी नहीं मानी, लेकिन ये जरूर कहा कि वहां पूजा चलती रहेगी.

और योगी आदित्यनाथ का बयान भी ऐसे ही समय में आया है. बात सिर्फ इतनी ही हो, ऐसा भी नहीं है - क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 10 सीटों पर जल्दी ही उपचुनाव होने वाले हैं, जिनकी तैयारियां सभी राजनीतिक दल जोर शोर से कर रहे हैं. 

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सवाल ये उठता है कि क्या ये सीजनल सियासत है या काशी को लेकर बीजेपी के लिए किसी नये अभियान की तैयारी चल रही है - क्या अयोध्या की हार के बाद बीजेपी काशी का मुद्दा उठाने जा रही है?

वीएचपी के रिएक्शन से तो इस सवाल का जवाब हां में मिलता है, लेकिन बीजेपी की प्रतिक्रिया से जवाब को ना में भी समझ सकते हैं. 

यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि ज्ञानवापी पर बीजेपी कानून के हिसाब से ही आगे बढ़ेगी. अयोध्या के मामले में भी बीजेपी की यही लाइन रही है, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले जब राम मंदिर को लेकर कानून बनाये जाने की मांग हो रही थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही बात कही थी. 

योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर पूछे जाने पर भूपेंद्र सिंह चौधरी कहते हैं, 'मुझे मालूम नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस परिप्रेक्ष्य में ये बयान दिया है, लेकिन पूरा देश और सब लोग जानते हैं कि हमारे देव स्थानों को लेकर उनका किस प्रकार दृष्टिकोण रहा है.'

बीजेपी के रुख से तो ये मामला मौसमी ज्यादा लगता है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि योगी आदित्यनाथ की दो सीटों पर खास नजर है - मिल्कीपुर और करहल. मिल्कीपुर वो सीट है जहां से अयोध्या के सांसद कहे जा रहे अवधेश प्रसाद विधायक थे, और करहल सीट अखिलेश यादव के कन्नौज से सांसद बन जाने के चलते खाली हुई है. 

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अयोध्या की मिल्कीपुर सीट का जिम्मा योगी आदित्यनाथ ने कमान वैसे ही संभाल रखी है जैसे अमित शाह मुश्किल टास्क अपने हाथ में ले लेते हैं. वैसे तो योगी आदित्यनाथ ने उपचुनाव वाली हर सीट के लिए तीन तीन मंत्रियों की टीम लगा रखी है, लेकिन मिल्कीपुर के लिए चार मंत्री लगे हुए हैं - संभव है ज्ञानवापी में योगी आदित्यनाथ को अयोध्या की हार का मरहम नजर आ रहा हो.

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