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योगी आदित्यनाथ किस तरह की हिंसा को धर्म सम्मत बता रहे हैं? | Opinion

योगी आदित्यनाथ ने हिंसा को वैसे ही धर्म सम्मत बताया है, जैसे उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था कायम रखने के बहाने पुलिस एनकाउंटर को सही ठहराते हैं - क्या ये यूपी के उप चुनावों को देखते हुए कोई मौसमी बयान है?

योगी आदित्यनाथ क्या एनकाउंटर की ही तरह हिंसा को लेकर नया शॉट खेल रहे हैं? योगी आदित्यनाथ क्या एनकाउंटर की ही तरह हिंसा को लेकर नया शॉट खेल रहे हैं?
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 6:59 PM IST

योगी आदित्यनाथ ने पुलिस एनकाउंटर की तरह ही अब हिंसा की वकालत की है, लेकिन उसकी कुछ शर्तें भी हैं. और शर्तें पूरी होती हैं, तो खास मकसद से की गई कोई भी हिंसा धर्म सम्मत मानी जानी चाहिये. 

वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के दुर्गा पूजा समारोह में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी प्रणवानंद ने भी ऐसा ही आह्वान किया था. भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद की मिसाल देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी प्रणवानंद ने सिद्धि तो साधना से ही प्राप्त की थी,  लेकिन मकसद राष्ट्रवाद ही था - और राष्ट्रवाद की रक्षा के प्रसंग में ही योगी आदित्यनाथ ने हिंसा का सपोर्ट किया है. 

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसा को धर्म सम्मत वैसे ही बताया है, जैसे कानून-व्यवस्था कायम रखने के मामले में वो फर्जी पुलिस एनकाउंटर को भी सही ठहराया करते हैं - सवाल है किक्या हिंसा की ये बातें यूपी में होने जा रहे 10 सीटों पर उप चुनावों को देखते हुए कोई मौसमी बयान माना जाये?

या फिर योगी आदित्यनाथ के पुराने पसंदीदा शगल 'लव जिहाद' और 'घर वापसी' जैसे अभियानों की तरह किसी नये मिशन के शुरू होने का संकेत समझा जाये?

योगी आदित्यनाथ ने किया हिंसा का सशर्त सपोर्ट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसा के सपोर्ट में जो शर्तें रखी हैं, वे भी खास हैं. योगी आदित्यनाथ ने देश और बेकसूरों को बचाने के लिए हिंसा को जायज बताया है - और ऐसे ही तत्वों के खिलाफ हिंसा को सही ठहराने को कोशिश की है.

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योगी आदित्यनाथ ने समाज के ऐसे तबके के खिलाफ हिंसा को धर्म सम्मत बताया है, जो हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने, और मूर्तियों को तोड़ने को अपना अधिकार मानता है.

योगी आदित्यनाथ कहते हैं, हिंदू धर्म किसी का अंत नहीं चाहता है… वो ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के साथ ही ‘धर्म हिंसा तथैव च’ की भी बात करता है. 

गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ अपनी बात को समझाते हुए सलाह देते हैं, सेवा के कार्य से जुड़ें... दीन-दुखियों की सेवा के लिए जीवन समर्पित करें, लेकिन राष्ट्र-धर्म की रक्षा और निर्दोषों को बचाने के लिए हिंसा करनी पड़े तो की जा सकती है क्योंकि ये धर्म सम्मत है.

योगी आदित्यनाथ कहते हैं, 'अक्सर जब कोई नफरत व्यक्त करता है तो अशांति पैदा करने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की जाती है' - और लगे हाथ चेता भी रहे हैं, 'कोई भी कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश न करे… जो लोग ऐसा करेंगे उनको सख्त कानूनी परिणाम भुगतने होंगे… कानून व्यवस्था को बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगा.

क्या ये सब योगी उप चुनावों के लिए बोल रहे हैं?

म्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों के कैंपेन में योगी आदित्यनाथ के स्ट्राइक रेट की खूब चर्चा हो रही है - उसकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जाने लगी है. 

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अव्वल तो योगी आदित्यनाथ पहले से ही यूपी की 10 सीटों पर होने जा रहे उप चुनावों की तैयारी में जुटे हुए हैं, लेकिन अब लगता है वो पूरी तरह उप चुनावों पर फोकस करने जा रहे हैं. 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा में 14 और जम्मू में 4 रैलियां की थीं. जम्मू-कश्मीर में बीजेपी भले ही बहुमत हासिल करने से चूक गई हो, लेकिन जिन चार विधानसभा क्षेत्रों में योगी आदित्यनाथ ने कैंपेन किया था, सभी सीटें बीजेपी की झोली में भर दी है. 

और वैसे ही हरियाणा कैंपेन में शामिल 14 सीटों में से 9 पर बीजेपी को जीत दिलाई है - तो क्या हिंसा को लेकर योगी आदित्यनाथ का ताजा बयान उप चुनावों के मकसद से सामने आया है?

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