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योगी-अखिलेश के बयान-बाण, मिल्कीपुर उपचुनाव में आखिरी दौर की लड़ाई किस दिशा में बढ़ रही है?

अयोध्या के मिल्कीपुर की लड़ाई आखिरी दौर में पहुंच चुकी है. योगी आदित्यनाथ जहां अखिलेश यादव को अलग अलग तरीके से घेर रहे हैं, वहीं समाजवादी नेता चुनाव की निष्पक्षता पर पहले से ही सवाल उठाने लगे हैं - आखिर ये बहस क्या इशारे कर रही है?

योगी आदित्यनाथ से मोर्चा ले रहे अखिलेश यादव उपचुनावों को लेकर मायावती जैसी बातें क्यों कर रहे हैं? योगी आदित्यनाथ से मोर्चा ले रहे अखिलेश यादव उपचुनावों को लेकर मायावती जैसी बातें क्यों कर रहे हैं?
मृगांक शेखर
  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव शुरू से ही एक दूसरे पर बरस रहे हैं. धीरे धीरे दोनो ही आक्रामक होकर धावा बोलने लगे हैं. 

नतीजा आना तो दूूर, अभी तो वोटिंग भी नहीं हुई है, और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव पहले से ही निष्पक्ष चुनाव होने को लेकर सवाल खड़ा करने लगे हैं.

मिल्कीपुर की लड़ाई, असल में, बीते दिनों 9 सीटों पर हुए उपचुनावों से भी खास है, क्योंकि ये अयोध्या की लड़ाई का ही दूसरा सीजन है - चाहें तो पिछले दिनों 9 सीटों पर हुए उपचुनावों को टीजर या ट्रेलर मान सकते हैं. 

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लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद की फैजाबाद सीट पर जीत को, अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने अयोध्या में बीजेपी की हार के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजक्ट किया था - मिल्कीपुर की लड़ाई, दरअसल, उसी लड़ाई का फाइनल मैच है. 

मिल्कीपुर में अव्वल तो मुख्य लड़ाई अवधेश प्रसाद के बेटे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अजीत प्रसाद और बीजेपी के चंद्रभान पासवान के बीच है, लेकिन नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के बागी नेता सूरज प्रसाद को उतार कर पेंच फंसा दिया है - और अब मामला ज्यादा से ज्यादा पासवान वोट झटक लेने की है, ताकि जीत पक्की की जा सके. 

तभी तो मिल्कीपुर पहुंचकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दलित लड़की के साथ हुए गैंग रेप को लेकर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को घेर रहे हैं.  

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हिंदुत्व की राजनीति में योगी ने फिट किया दलित एजेंडा

मिल्कीपुर रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलितों के साथ अन्याय किये जाने का मुद्दा आसानी से मिल जाता है. ये मौका भी समाजवादी पार्टी ने ही मुहैया कराया होता है -  और यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ बड़े आराम से अखिलेश यादव को भी मैदान में घसीट लेते हैं. 

जैसे दिल्ली में यमुना नदी की प्रयागराज के संगम से तुलना करते हुए अरविंद केजरीवाल को डुबकी लगाने के लिए चैलेंज करके एक साथ स्थानीय और हिंदुत्व का मुद्दा जोड़ देते हैं, बिल्कुल वैसे ही मिल्कीपुर में हिंदुत्व के एजेंडे वाली राजनीति को दलित मुद्दे से जोड़ देते हैं.  

अगस्त, 2024 में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता मोईद खान को एक नाबालिग के साथ रेप के मामले में गिरफ्तार किया गया था - और योगी आदित्यनाथ अब उसी घटना के जरिये पूरी समाजवादी पार्टी और नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. 

अवधेश प्रसाद को दुर्भाग्य से बने सांसद बताने के साथ ही योगी आदित्यनाथ कहते हैं, एक दलित बेटी के साथ रेप करने वाला मोईद खान इनका हीरो होता है. 

मिल्कीपुर के लोगों को आह्वान करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मिल्कीपुर की जीत का संदेश बहुत दूर दूर तक जाएगा. कहते हैं, जो ऐसी घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं, उन लोगों को कभी भी आगे नहीं बढ़ने देना है… ये मोईद खान को सिर-आंखों पर बैठाने वाले लोग बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं… इसीलिए कहता हूं, देख सपाई, बिटिया घबराई.

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योगी आदित्यनाथ मिल्कीपुर के लोगों से कहते हैं, बेटी तो बेटी है… उस बेटी का सम्मान होना चाहिए था, उसकी सुरक्षा होनी चाहिए थी.

अखिलेश यादव की तरफ इशारा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, ये सफाई दे रहे हैं कि डीएनए जांच होनी चाहिए… अरे बेटी का बयान पर्याप्त है, लेकिन फिर भी ये लोग बेटी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं. यही समाजवादी पार्टी का वास्तविक चरित्र है. 

अखिलेश यादव का उपचुनावों से भरोसा क्योें उठा

अखिलेश यादव पर योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ को लेकर दुष्प्रचार करने और लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया है. 

योगी आदित्यनाथ कहते हैं, आपके उत्साह आपके उमंग को देखकर मुझे प्रयागराज महाकुंभ याद आ रहा है… पुरानी अयोध्या के जिले में पैदा हुए थे राम मनोहर लोहिया… उन्हीं लोहिया जी की पार्टी के लोग जहां प्लाट खाली है उस पर झंडा लगा जाते थे… कब्जा कर लेते थे… इनका झंडा, माफिया और अपराधियों को बचाने के लिए हुआ करता था.

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का आरोप है, भाजपा सबसे बड़ी भूमाफिया पार्टी है… लखनऊ, अयोध्या, गोंडा सहित उत्तर प्रदेश के जिलों में जितनी रजिस्ट्रियां हो रही हैं, वे ज्यादातर भाजपा के नेता करा रहे हैं… भाजपा नेताओं ने भगवान श्रीराम की धरती अयोध्या को भी नहीं छोड़ा है… अगर रजिस्ट्री चेक की जाये तो पता चल जाएगा कि भाजपा के लोगों ने बड़ी संख्या में जमीनों पर कब्जा किया है.

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लखनऊ में अखिलेश यादव ने दावा तो किया है कि मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी ही जीतेगी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पर समजावादी नेता का सवाल उठाना अलग ही इशारे कर रहा है. 

नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी महज दो सीटें ही जीत पाई थी, क्योंकि 7 सीटें बीजेपी ने झटक ली थी - अब जो सवाल उठाते हुए मायावती ने मिल्कीपुर चुनाव से दूरी बना ली थी, वही सवाल अखिलेश यादव उठा रहे हैं.

अखिलेश यादव कह रहे हैं, मिल्कीपुर की जनता जानती है कि भाजपा चुनाव में बेईमानी करना चाहती है… भाजपा ने पुलिस को आगे कर दिया है… एसएचओ और सीओ को निर्देश दिया जा रहा है… डीएम, एसपी और अन्य अधिकारी लखनऊ के इशारे पर काम कर रहे हैं… जनता कह रही है कि निष्पक्ष चुनाव हुए तो समाजवादी पार्टी की ऐतिहासिक जीत होगी.

क्या आगे से अखिलेश यादव भी बीएसपी नेता मायावती की तरह उपचुनावों से दूरी बनाने वाले हैं?

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