
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर दबदबे के बगैर भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी पार्टी दिल्ली पर काबिज नहीं हो सकती है. तभी तो कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता वाया लखनऊ होकर जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रीय राजनीति में अंगद की तरह पैर जमाने के लिए यूपी के शहर वाराणसी को चुना.
2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी में बीजेपी के कमजोर प्रदर्शन के चलते अटकलें लगाई जाने लगीं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुर्सी डांवाडोल हो गई है. हालांकि उपचुनावों में शानदार सफलता के बाद योगी ने अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं. पर आए दिन योगी के खिलाफ पार्टी में अंदरूनी षडयंत्र की खबरें आती रहीं. कहा जाता रहा कि दिल्ली और लखनऊ में आपसी संबंध ठीक नहीं है. इन्हीं बातों को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आ्उटगोइंग सीएम कहकर बीजेपी पर तंज कसने लगे थे. पर गृहमंत्री अमित शाह ने वक्फ बिल पर बहस में भाग लेते हुए योगी के यूपी सीएम के रूप मे तीसरे टर्म में कंटीन्यू होने की बात कहकर अखिलेश यादव की बोलती बंद कर दी. जाहिर है अमित शाह के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में सरगर्मियां बढ़ गईं है. आइये देखते हैं कि क्या वास्तव में योगी आदित्यनाथ का यूपी में तीसरी बार सीएम बनना तय है?
1-योगी का यूपी के सीएम के रूप में तीसरे टर्म क्या लग गई है मुहर ?
यूपी में 2017 में जब पहली बार योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी हुई तो यही कहा गया कि वो पीएम मोदी की पहली पसंद नहीं है. इसी तरह यह भी प्रचार किया गया कि उनके पास प्रशानिक अनुभव की कमी है. पर योगी ने जिस तरह पूरे देश में अपने यूपी मॉडल को पॉपुलर कराया यह हर किसी के लिए आश्चर्यजनक ही था. आज की तारीख में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता चरम पर है. देश भर के बीजेपी नेता उन्हें चुनावों के दौरान उन्हें अपने इलाके में चुनावी रैली में आने के लिए रिक्वेस्ट करते हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी के बाद सबसे अधिक चुनावी सभाएं करने वाले योगी ही थे. योगी के कार्यकाल में यूपी में कानून वयवस्था में सुधार होने के चलते ही 2017 के बाद 2022 में भी उनकी वापसी हुई. फिर योगी के भविष्य पर लगातार अटकलबाजियों का दौर जारी रहा है.
सीएम योगी ने पिछले हफ्ते न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने एक इंटरव्यू में अपने थर्ड टर्म को लेकर कहा कि यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा है. इस बीच उन्होंने एक बार यह भी कहा कि राजनीति उनका स्थाई प्रफेशन नहीं है, वे मुख्यमंत्री नहीं रहे तो मठ में वापस चले जाएंगे. इस तरह की बातों से ऐसी तस्वीर बन रही थी कि योगी की स्थिति बीजेपी में कमजोर हुई पर अब शायद अब ऐसा नहीं है. 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद यूपी में पार्टी के अंदर उनके खिलाफ कई लोग सर उठाने लगे थे. इस बीच अखिलेश यादव ने भी कई बार उन पर तंज कसा. पर अब जिस तरह अमित शाह ने उनके भविष्य को बारे में लोकसभा में बात की है वह गवाह है कि योगी को अभी कही नहीं जाना है. दरअसल कोई भी पार्टी योगी जैसे पॉपुलर नेता के भविष्य को क्यों बरबाद करना चाहेगी?
2-अमित शाह ने अखिलेश को चुप करा कर कयासबाजियों का भी अंत कर दिया
लोकसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह वक्फ संशोधन बिल 2025 पर बोल रहे थे. इस बीच समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने टोकते हुए गृह मंत्री से सवाल किया कि आप हमारे योगी जी के बारे में कुछ नहीं बोलेंगे? अमित शाह ने फौरन अपने अंदाज में जवाब दिया कि वो भी 'रिपीट' होने वाले हैं. दरअसल अखिलेश यादव अकसर योगी बनाम अमित शाह के नाम पर बीजेपी पर तंज कसते रहते हैं. अखिलेश यादव बीजेपी की अंदरूनी कलह पर मजे लेते रहे हैं. अखिलेश समझते रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ केंद्र के लिए एक कमजोर कड़ी हैं. शायद यही कारण है कि अमित शाह ने भी उसी अंदाज में अखिलेश को सबक सिखाने के लिए योगी के तीसरे टर्म की बात कह दी. अमित शाह का जवाब उन सारी कयासबाजियों का मुंह बंद कर सकता है जो यह बताने की कोशिश करते हैं कि बीजेपी में दिल्ली और लखनऊ के बीच सब ठीक नहीं है.
आगरा में पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के राणा सांगा पर दिए गए बयान को लेकर बवाल हुआ. करणी सेना के लोगों ने सांसद के घर पर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान तोड़फोड़ भी हुई. अखिलेश ने इस घटना को लेकर सीधे योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया था. उन्होंने कहा कि आगरा में मुख्यमंत्री के रहते हुए भी एक सांसद के घर हिंसक वारदात रोकी नहीं जा सकी. क्या मुख्यमंत्री का प्रभाव क्षेत्र दिन ब दिन घट रहा है या 'आउटगोइंग सीएम' को अब कोई नहीं सुन रहा है. अगर वो अभी सीएम हैं तो तुरंत कार्रवाई करें, नहीं तो हम मान लेंगे कि ये सब उनकी अनुमति से हुआ है. अखिलेश यादव इतना पर भी नहीं माने. उन्होंने एक्स पर लिखा कि अब बुलडोज़र भी छिन गया क्या? अब बुलडोज़र कोई और चलवा रहा है और कोई और चला रहा है. अब क्या विदाई की बेला में पद के साथ पहचान भी छीन लेंगे. ये अच्छी बात नहीं.
3-क्या योगी को अपने खिलाफ चल रहे अंदरूनी षडयंत्र से मिलेगी मु्क्ति
जिस तरह अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ के तीसरे टर्म पर मुंहर लगा दी है उससे कई संदेश जाते हैं. कम से कम यूपी बीजेपी में कुछ लोग जो लगातार योगी आदित्यानाथ के खिलाफ पड़े हुए हैं उनके क्रियाकलापों पर रोक लग सकेगी. अभी पिछले दिनों लोनी के बीजेपी विधायक ने चीफ सेक्रेटरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बहाने योगी आदित्यनाथ को टार्गेट करने की कोशिश की थी. बाद में उसके साथ प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उनके साथ दादरी में मंच शेयर किया था. यूपी में योगी विरोधी यही प्रचारित करते हैं कि उन पर दिल्ली का हाथ है.
उम्मीद की जानी चाहिए कि इस तरह की घटनाओं पर अब रोक लग सकेगी. पिछले दिनों एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के साथ मतभेद की खबरों को कसकर खारिज किया था. सीएम योगी ने कहा था कि वह पार्टी की वजह से ही सीएम की कुर्सी पर हैं. केंद्रीय नेताओं के साथ मतभेद करके क्या मैं यहां पर बैठा रह सकता हूं? बाकी बोलने के लिए कोई कुछ भी बोलता है, किसी का मुंह थोड़े ही बंद कर सकते हैं. अब मान लिया जाना चाहिए कि बीजेपी लखनऊ और दिल्ली के बीच कोई मतभेद न रहा है और न भविष्य में रहेगा.
4-तीसरा टर्म सीएम का मिलने से बीजेपी विरोधी भी रहेंगे शांत
अखिलेश यादव ने अभी हाल ही में कहा था कि मुझे एक अखबार से पता चला कि एक विधायक कह रहे हैं कि दिल्ली का सबसे अच्छा रिप्लेसमेंट कोई कर सकता है तो योगी जी कर सकते हैं, अब पता नहीं किसका रिप्लेसमेंट होने जा रहा है? अखिलेश यादव ने कहा था कि कौन से बाबा दिल्ली चले गए, महाकुंभ तो खत्म हो गया? यह बात मैं भी नहीं समझ पा रहा हूं कि एक विधायक कौन से बाबा को दिल्ली भेजने की बात कर रहे थे. पूरे देश में मोदी के उत्तराधिकार की बात जब भी होती है तो योगी और अमित शाह के रूप में दो नाम ही सामने आते हैं. अगर योगी को उत्तर प्रदेश सीएम का एक और टर्म मिल जाता है तो जाहिर है बीजेपी में कुछ दिनों के लिए सबसे बड़े पद के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा की चर्चा पर भी विराम लग सकता है. और पार्टी अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे विरोधियों से भी कुछ दिन निश्चिंत रहेगी.