देश को आजाद हुए 65 साल हो गए, लेकिन प्रदूषण से आजादी कब मिलेगी, ये पूरा मुल्क जानना चाहता है. आजाद भारत आज भी साफ सांस का हक मांग रहा है. हम हांफ रहे हैं, क्योंकि हम हवा की शक्ल में जहर पी रहे हैं. दिल्ली के आसमान की तरफ आंखें उठाकर देखिए सिर्फ धुंआ और धूल दिखेगा. ना अदालत का आदेश कारगर हो पा रहा है, ना एनजीटी जैसी एजेंसियों की हिदायत पर अमल हो रही हैं. सरकारों के लिए तो प्रदूषण जैसे मुद्दा ही नहीं. इसलिए हमें ये सवाल उठाना पड़ रहा है कि प्रदूषण पिला-पिलाकर हमारी सेहत के साथ खिलवाड़ कब तक होता रहेगा.