Advertisement

'सिंघम' स्टाइल में रेस्क्यू... बाहर से ताला और अंदर काम, पड़ोसी की छत से कूदकर बचाए बच्चे

जयपुर की भट्टाबस्ती में एक शख्स बिहार से 500-500 रुपये देकर 22 बच्चों को राजस्थान लाया. यहां वह उनसे बंद कमरे में बाल मजदूरी करवा रहा था. वो भी दिन में 18 घंटे. खाने में सिर्फ दो टाइम खिचड़ी देता था. जो बच्चा मजदूरी करने से मना करता उसकी जमकर पिटाई करता. जब इसकी सूचना एक बाल संस्था और पुलिस को मिली तो उन्होंने वहां रेड मारी और बच्चों को रेस्क्यू किया.

22 बच्चों का किया गया रेस्क्यू. 22 बच्चों का किया गया रेस्क्यू.
विशाल शर्मा
  • जयपुर,
  • 14 जून 2023,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

राजस्थान के जयपुर की मशहूर लाख की चूड़ियां या फिर इससे बने गहने किसे पसंद नहीं हैं. हर कोई महिला लाख से बने आभूषणों से खुद का श्रृंगार करना पसंद करती है. लेकिन कभी किसी ने सोचा है कि यह लाख की चूड़ियां कितनी जिंदगियां बर्बाद कर रही हैं. दरअसल, पिंक सिटी की भीतरी गलियों में बनने वाले लाख के गहनों को कोई और नहीं बल्कि छोटे-छोटे बच्चे बनाते हैं.

Advertisement

गहनों को बेशक बाल मजदूर बनाते हैं. लेकिन इनसे मिला मुनाफा सिर्फ मालिक को ही नसीब होता है. क्योंकि वे बाल मजदूरों को दो वक्त की रोटी भी ढंग से नहीं देते हैं. हाल ही में पुलिस को एक संस्था के माध्यम से सूचना मिली थी कि यहां एक मकान में कई बच्चों से बाल मजदूरी करवाकर उनसे लाख के गहने बनाए जा रहे हैं.

बच्चों को दूसरे राज्यों से महज 500-500 रुपये में खरीदकर यहां लाया जाता है. फिर उनसे लाख के गहने बनाने का काम करवाया जाता है. अगर कोई बच्चा काम नहीं करता है तो उसकी लाठी-डंडों और रॉड से पिटाई भी की जाती है. खाने में सिर्फ दो टाइम खिचड़ी दी जाती है.

शायद ही इस बात की किसी को भनक लग पाती. क्योंकि यह काम बंद कमरे में छुपके से करवाया जा रहा था. लेकिन सोमवार को जब कुछ बच्चों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें आईं तो बाहर से गुजर रहे लोगों को शक हुआ. यूं तो ये आवाजें आसपास के लोगों को कई दिनों से आ रही थीं.

Advertisement

लेकिन तब किसी ने भी इस पर गौर नहीं किया. जब सोमवार को कुछ ज्यादा ही जोर की आवाजें आईं तो उन्होंने बचपन बचाओ आंदोलन संस्था को इसकी सूचना दी. फिर भट्टाबस्ती पुलिस को भी यह जानकारी दी गई.

आरोपी शाहनवाज और उसकी पत्नी मौके से फरार
जिसके बाद संस्था के साथ भट्टाबस्ती थाना पुलिस सहित एक साथ 8 रेस्क्यू टीम ने भट्टाबस्ती इलाके में मकान पर दबिश दी. इस दौरान आरोपी मालिक ने घर के बाहर ताला लगा रखा था और अंदर पहली मंजिल पर बच्चों से बाल मजदूरी करवा रहा था.

इसके बाद टीम के एक-एक सदस्य दूसरे मकान की छत से आरोपी के घर में कूदे जिन्हें देख आरोपी मालिक शाहनवाज उर्फ गुड्डू घबरा गया और अपने खुद के चार बच्चों को छोड़ अपनी पत्नी के साथ मौके से फरार हो गया. फिर पुलिस ने एक छोटे से कमरे से बाल मजदूरी करते 22 बच्चों को रेस्क्यू किया, जिनकी उम्र 9 से 16 साल तक की है.

सुबह 6 से रात 12 बजे तक करवाई जाती थी मजदूरी
बचपन बचाओ आंदोलन के डायरेक्टर मनीष शर्मा ने बताया कि बचपन बचाओ आंदोलन संस्था को इन बच्चों के बारे में जानकारी मिली थी. जहां पिछले एक माह से बच्चों की पिटाई और रोने की आवाज आ रही थी. इस पर कॉलोनी के लोगों ने ही बचपन बचाओ आंदोलन को इसकी जानकारी दी तो रेड मारी गई.

Advertisement

इस मकान में बच्चों से सुबह 6 से रात 12 बजे तक काम करवाया जा रहा था. अगर किसी बच्चे की तबीयत खराब होती तो उसे आरोपी शाहनवाज लोहे की रॉड से पीटता था और जबरदस्ती काम करवाता. रेस्क्यू के बाद सभी 22 बच्चों का मेडिकल कराया गया तो इनमें से 11 साल का एक बच्चा जांच में कुपोषित निकला, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

वहीं एक 9 साल के बच्चे ने छाती में दर्द की शिकायत की तो पता चला कि चूड़ी पर सीधे मोती नहीं लगे तो आरोपी ने उसे पहले लोहे की रॉड से मारा और फिर छाती पर लात मारी जिससे बच्चे की पसलियों में सूजन आ गई.

500-500 रुपये में खरीदे बाल मजदूर
बता दें कि इन बच्चों के परिजनों को आरोपी शाहनवाज उर्फ गुड्‌डू 500-500 रुपए एडवांस देकर बिहार के सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर से लेकर आया था. इसके बाद आरोपी उन्हें जयपुर लेकर आया और घर पर 18 घंटे काम लेते हुए बच्चों से जानवरों से भी बुरा बर्ताव करता रहा. यही नहीं कई दिनों तक इन बच्चों को नहाने नहीं दिया जाता, जिससे बच्चों को बीमारियां हो गई हैं.

वहीं खाने में सुबह शाम सिर्फ खिचड़ी दी जाती. जिसे खाकर वह इतने परेशान हो चुके थे कि जब खाना आता तो वह उसकी खुशबू से उल्टी कर देते थे. आरोपी उतना खाना दिया करता था, जिससे बच्चे केवल जिंदा रह सकें. अब पुलिस आरोपी शाहनवाज की तलाश कर रही है.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement