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राजस्थान की BJP सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस विभाग में 33% महिला आरक्षण को दी मंजूरी

कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की. उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बैठक के बाद कहा कि पुलिस महिलाओं से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता के साथ काम कर सकेगी, वहीं इस फैसले से महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर भी मिलेंगे.

भजन लाल सरकार ने राजस्थान पुलिस में 33 फीसदी महिला आरक्षण को दी मंजूरी. (PTI/File Photo) भजन लाल सरकार ने राजस्थान पुलिस में 33 फीसदी महिला आरक्षण को दी मंजूरी. (PTI/File Photo)
देव अंकुर
  • जयपुर,
  • 05 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:51 AM IST

राजस्थान की भाजपा सरकार ने बुधवार को राज्य पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 में संशोधन करने का निर्णय लेते हुए पुलिस बल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को मंजूरी दे दी. राज्य मंत्रिमंडल ने 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए भाजपा द्वारा किए गए वादे को पूरा करते हुए यहां आयोजित अपनी बैठक में यह निर्णय लिया. 

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कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की. उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बैठक के बाद कहा कि पुलिस महिलाओं से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता के साथ काम कर सकेगी, वहीं इस फैसले से महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर भी मिलेंगे. जोगाराम पटेल ने कहा कि कैबिनेट ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 में पेपर लीक के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया.

यह भी पढ़ें: क्या रद्द होगी राजस्थान पुलिस SI भर्ती परीक्षा? कई ट्रेनी कैंडिडेट्स समेत RPSC पूर्व सदस्य तक हिरासत में

बता दें कि इस मामले में कथित संलिप्तता के लिए 42 ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के दो पूर्व सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. जोगाराम पटेल ने कहा कि इस परीक्षा के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवारों का चयन हुआ है, जो योग्य थे. इसे ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने फिलहाल परीक्षा रद्द नहीं करने का फैसला किया है. भ्रष्टाचार और पेपर लीक की घटनाओं के कारण आरपीएससी के पुनर्गठन की विपक्षी कांग्रेस की मांग के बारे में पूछे जाने पर, पटेल ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसे उचित प्रक्रिया के बिना भंग नहीं किया जा सकता है.

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उन्होंने कहा, 'सचिन पायलट जैसे कांग्रेस नेताओं से यह पूछना उचित होगा कि सभी पहलुओं पर विचार किए बिना इतना बड़ा कदम कैसे उठाया जा सकता है.' जोगाराम पटेल ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जनता की राय पर विचार किए बिना और मौजूदा जिलों को विभाजित करने के मानदंडों की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए राज्य में नए जिलों का गठन किया था. मंत्री ने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को ध्यान में रखकर आगे का निर्णय लिया जाएगा. 

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