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चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में कैश की जगह चढ़ाई अफीम, नारकोटिक्स विभाग की टीमें पहुंचीं

दरअसल, पिछले कुछ साल में चढ़ावे के रूप में मंदिर में भक्तों ने अफीम चढ़ाई थी. हालांकि यह पहली बार नहीं है, क्योंकि मेवाड़ और मालवा में अफीम की अच्छी उपज होने की मन्नत पूरी होने पर किसान उसका कुछ हिस्सा सांवलिया सेठ को चढ़ाते हैं. किसान कैश के साथ प्लास्टिक की थैलियों में थोड़ी-सी अफीम भंडार में चढ़ाते हैं और यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.

सांवलिया सेठ मंदिर में किसी ने चढ़ावे में अफीम चढ़ा दी (फाइल फोटो) सांवलिया सेठ मंदिर में किसी ने चढ़ावे में अफीम चढ़ा दी (फाइल फोटो)
शरत कुमार
  • चित्तौड़गढ़ ,
  • 14 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां विश्व प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर के चढ़ावे में रुपये की जगह अफीम मिली है. इसके बाद नीमच, मंदसौर और प्रतापगढ़ से नारकोटिक्स विभाग की टीमें मंदिर पहुंचीं और अफीम का वजन किया. जो 58 किलो से ज्यादा था, जिसे नारकोटिक्स विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया.

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दरअसल, पिछले कुछ साल में चढ़ावे के रूप में मंदिर में भक्तों ने अफीम चढ़ाई थी. हालांकि यह पहली बार नहीं है, क्योंकि मेवाड़ और मालवा में अफीम की अच्छी उपज होने की मन्नत पूरी होने पर किसान उसका कुछ हिस्सा सांवलिया सेठ को चढ़ाते हैं. किसान कैश के साथ प्लास्टिक की थैलियों में थोड़ी-सी अफीम भंडार में चढ़ाते हैं और यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. करीब दो-तीन साल पहले तक इस अफीम को मंदिर के पुजारी खुद के लिए यूज करते थे. साथ ही विशिष्ट भक्तों को प्रसाद के रूप में भी देते थे, इसे लेकर मंदिर चर्चाओं में भी रहा था.

बाद में मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारियों ने एक्शन लेते हुए अफीम को अपने कब्जे में लेना शुरू किया और उसे तहखाने में रख दिया. इसको लेकर काफी समय से इसकी शिकायतें मिल रही थीं. लेकिन किसी ने इसकी शिकायत नारकोटिक्स विभाग से कर दी. इसके बाद अफीम सीज की गई. 

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बता दें कि सांवलिया सेठ के चढ़ावे का भंडार हर महीने खुलता है, जिसमें लगभग 20 करोड़ का चढ़ावा आता है. बीते जनवरी 2025 में 22.92 करोड़ का चढ़ावा आया था, जिसमें सोना-चांदी भी शामिल हैं.

सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जितना चढ़ावा चढ़ाएंगे, उतना ही भगवान सांवलिया सेठ दान में देंगे. यहां सभी तरह के लोग आकर दान देते हैं. उनके दान से कमाई में बरकत होती है. अफीम की तस्करी के लिए कुख्यात इलाके में भी ये मान्यता है कि अफीम के तस्कर भी यहां चढ़ावा चढ़ाकर जाते हैं.

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