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IPS अफसर से हो गई विधायक की बहस... राजस्थान में नए थाने का फीता काटने को लेकर छिड़ा विवाद, Video वायरल

Rajasthan: सीकर के खाटू श्याम जी में सदर थाना खोला गया है. थाने के उद्घाटन कार्यक्रम में आईजी अजय पाल लांबा ने फीता काटने के लिए कैंची भाजपा नेता गजानंद कुमावत को सौंपी. इस पर विधायक वीरेंद्र चौधरी ने कड़ा विरोध जताया.

फीता काटने को लेकर पुलिस के सामने नेताओं में हुआ विवाद. फीता काटने को लेकर पुलिस के सामने नेताओं में हुआ विवाद.
हिमांशु शर्मा
  • सीकर ,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

राजस्थान से विवादों का नाता चोली दामन की तरह है. आए दिन नए विवाद सामने आते हैं. अब राजस्थान के सीकर जिले के खाटू श्याम जी का एक वीडियो देश भर में तेजी से वायरल हो रहा है. दरअसल नए थाने के उद्घाटन के दौरान रिबन काटने को लेकर नेताओं में आपसी विवाद हो गया. इस दौरान जयपुर रेंज के आईजी सहित पुलिस के तमाम अधिकारी मौके पर मौजूद रहे. उद्घाटन के दौरान वीडियो बनाने वाले लोगों के कमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई. यह पूरा मामला और अब चर्चा का विषय बना हुआ है.

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सीकर के खाटू श्याम जी में सदर थाना खोला गया है. थाने के उद्घाटन कार्यक्रम में आईजी अजय पाल लांबा ने फीता काटने के लिए कैंची भाजपा नेता गजानंद कुमावत को सौंपी. इस पर विधायक वीरेंद्र चौधरी ने कड़ा विरोध जताया. 

उन्होंने कहा कि यह प्रोटोकॉल के खिलाफ है कि एक हारे हुए प्रत्याशी को फीता काटने दिया जाए. जबकि क्षेत्रीय विधायक खुद वहां मौजूद हैं. इस पर आईजी लांबा ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों नेताओं से एक साथ फीता काटने का आग्रह किया.

विधायक वीरेंद्र चौधरी इससे असहमत रहे और उन्होंने भाजपा नेता कुमावत के हाथ से कैंची लेकर वापस आईजी लांबा को सौंप दी. लेकिन आईजी लांबा ने फिर से वही कैंची गजानंद कुमावत को दे दी, जिससे माहौल और गरमा गया. 

विधायक चौधरी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रशासन को इस तरह किसी राजनीतिक दल के पक्ष में झुकना नहीं चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पराजित उम्मीदवार को जबरन उद्घाटन में आगे करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. 

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इसी दौरान भाजपा नेता गजानंद कुमावत ने बिना किसी और विवाद के फीता काट दिया. इससे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया. कांग्रेस समर्थकों ने इसे सरकारी तंत्र द्वारा भाजपा के पक्ष में पक्षपात करार दिया. जबकि भाजपा समर्थकों ने इसे औपचारिकता बताते हुए विवाद को अनावश्यक बताया.

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आईजी लांबा और विधायक चौधरी के बीच बहस हुई. कार्यक्रम के बाद भी इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए. मौके पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं नेताओं ने जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. पुलिस अधिकारी पूरे मामले से पल्ला झड़ते हुए नजर आए. विधायक ने इस मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. 

उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार इस तरह की घटना हो चुकी हैं. जब सरकारी कार्यक्रमों में उनको नहीं बुलाया गया. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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