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राजस्थान कांग्रेस को झटका, नागौर से पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा बीजेपी में शामिल

राजस्थान के नागौर से पूर्व सांसद और दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की बेटी ज्योति मिर्धा भाजपा में शामिल हो गई हैं. दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और राजस्थान के भाजपा अध्यक्ष सीपी जोशी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. उनके साथ पूर्व आईपीएस सवाई सिंह भी बीजेपी में शामिल हुए.

जाट वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने लगा दी कांग्रेस में सेंध? जाट वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने लगा दी कांग्रेस में सेंध?
राम किंकर सिंह
  • जयपुर,
  • 11 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक उठापटक के साथ दल बदल का सिलसिला भी शुरू हो चुका है. आज, नागौर से पूर्व सांसद और दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की बेटी ज्योति मिर्धा भाजपा में शामिल हो गई हैं. दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और राजस्थान के भाजपा अध्यक्ष सीपी जोशी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. उनके साथ पूर्व आईपीएस सवाई सिंह भी बीजेपी में शामिल हुए.

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ज्योति मिर्धा का बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है. ज्योति मिर्धा का बीजेपी में शामिल होने से जातिगत तौर पर भी बीजेपी को फायदा पहुंचने वाला है, क्योंकि नागौर संसदीय क्षेत्र जाट बहुल क्षेत्र है और यहां मिर्धा परिवार की अच्छी पकड़ है. ऐसे में ज्योति मिर्धा का बीजेपी में शामिल होना आगामी चुनाव में बीजेपी के लिए एक मुनाफे का सौदा साबित होने वाला है.

BJP नेता ने कांग्रेस पर बोला हमला

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कांग्रेस पर जुबानी हमला बोलते हुए बेशर्म करार दिया और कहा कि राजस्थान में कांग्रेस अब अपनी बची हुई इज्जत भी खो चुकी है और उसका साफ सबूत है कि अभी तक 40 से अधिक कांग्रेस नेता भाजपा जॉइन कर चुके हैं. राजस्थान की जनता भी अब बदलाव का मन बना चुकी है.

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वहीं दूसरी तरफ सीपी जोशी ने राजस्थान में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और कहा कि जिस तरह का माहौल इस वक्त राजस्थान में है उससे महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और उनके सामने बीजेपी ही एकमात्र विकल्प दिखाई दे रही है.

BJP जॉइन करते ही कांग्रेस पर खड़े किए सवाल

बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ज्योति मिर्धा ने कांग्रेस पर ही सवाल खड़े कर दिए और कहा कि कांग्रेस विपरीत दिशा में चल रही है जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को एक नया विजन दिया है. राज्य में चल रही राजनीतिक बयार में इस बार विधानसभा में सत्ता किस करवट लेगी इसका जवाब चुनाव के बाद ही पता चलेगा.

बताते चलें कि ज्योति मिर्धा के भाजपा में आने से शेखावाटी की 25 सीटें प्रभावित होगी. ज्योति मिर्धा हनुमान बेनीवाल के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती हैं. क्योंकि ज्योति मिर्धा नागौर से आती हैं, तो हनुमान बेनीवाल का भी नागौर क्षेत्र में प्रभाव है. 

जाट वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने लगा दी कांग्रेस में सेंध?

ज्योति मिर्धा नागौर से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं. उसके बाद ज्योति ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ा था. हनुमान बेनीवाल से ज्योति मिर्धा को हार मिली थी. ज्योति पश्चिमी राजस्थान में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती हैं. ज्योति मिर्धा की जाट नेता के रूप में भी पहचान है. विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जाट वोट बैंक को साधने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेला है. जाट वोट बैंक के साथ ही शेखावाटी का क्षेत्र भी ज्योति मिर्धा से प्रभावित होगा. क्योंकि उनके परिवार का शेखावाटी क्षेत्र में वर्चस्व है व सालों पुराना ज्योति मिर्धा का नाता है. शेखावाटी क्षेत्र में नीम का थाना, झुंझुनू जिले, सीकर के कुछ हिस्से शामिल हैं. इसके अलावा चुरू, नागौर और अजमेर तक इसका प्रभाव रहता है. इस क्षेत्र में जाट वोट बैंक ज्यादा है. साथ ही भाजपा हनुमान बेनीवाल का तोड़ भी निकलने में जुटी हुई है.

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2009 में लोकसभा चुनाव से की थी करियर की शुरुआत

ज्योति ने साल 2009 में लोकसभा चुनाव जीत कर अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी. उसके बाद दो बार उनको करारी हार का सामना करना पड़ा. ज्योति 2014 में मोदी लहर के चलते हार गई थी. बीजेपी के सीआर चौधरी ने उनको हराया था. तो इसके अलावा कांग्रेस ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में फिर से ज्योति को चुनाव मैदान में उतारा था. उस समय ज्योति को फिर से उम्मीदवार बनाया गया. कांग्रेस के ही स्थानीय नेताओं ने इसका विरोध किया व क्षेत्र में विरोध के स्वर रहे. तो एक बार फिर से ज्योति मिर्धा को करारी हार मिली. राजस्थान में भाजपा का कुनबा बढ़ रहा है. ऐसे में देखना होगा कि लगातार जुड़ रहे नेताओं से भाजपा को कितना फायदा पहुंचता है. भाजपा की तरफ से हर संभव प्रयास किया जा रहे हैं.

हनुमान बेनीवाल के लिए बढ़ सकती है परेशानी

ज्योति मिर्धा खुद जाट नेता हैं व उनका परिवार शेखावाटी क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहा है. ऐसे में आने वाले चुनाव में हनुमान बेनीवाल की परेशानी बढ़ सकती है. क्योंकि हनुमान बेनीवाल नागौर से चुनाव लड़ते हैं और जाट वोट बैंक की बदौलत ही चुनाव जीते हैं. पहले हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा था. लेकिन इस बार वो अकेले चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं. इसलिए भाजपा की तरफ से भी उनकी पूरी घेराबंदी की जा रही है. हरियाणा की पार्टी को भी राजस्थान में सक्रिय किया जा रहा है. जिससे जाटों के वोट बैंक में सेंध लगाया जा सके.

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