
राजस्थान के भीलवाड़ा में 400 रुपये की रिश्वत लेने वाले डॉक्टर को 12 साल बाद सजा सुनाई गई है. डॉक्टर को एक साल जेल की सजा सुनाई गई है जबकि पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. उस वक्त डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कोठारी मांडलगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन शिशु रोग डॉक्टर थे. भीलवाड़ा के भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट के जज राकेश कुमार कटारा ने उनके खिलाफ ये फैसला सुनाया है. डॉक्टर कोठारी प्रतापगढ़ जिले के अरनोद के रहने वाले हैं.
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कोठारी पर आरोप है कि एक प्रसूता के नाम जारी जननी सुरक्षा योजना के एक हजार 400 रुपये का चेक और डिस्चार्ज सर्टिफिकेट देने के बदले में उन्होंने 400 रुपये रिश्वत लिया था. इस मामले में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि दशहरा मैदान बीगोद के रहने वाले मोहम्मद यूनुस लोहार ने 26 अप्रैल 2011 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भीलवाड़ा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र सिंह सिसोदिया को एक शिकायत दर्ज करवाई थी.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटे को दिया जन्म
शिकायत में कहा गया था कि उनकी पत्नी रेहाना बेगम को डिलीवरी के लिए राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मांडलगढ़ में 22 अप्रैल 2011 को सुबह 5 बजे भर्ती कराया था. उसी दिन सुबह 10:30 बजे उनकी पत्नी रेहाना ने एक बेटे को जन्म दिया. इसके बाद 25 अप्रैल 2011 को मोहम्मद यूनुस डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कोठारी से मिले. उन्होंने ही उनकी पत्नी की डिलीवरी कराई थी.
रिश्वत लेते हुए डॉक्टर को रंगे हाथ गिरफ्तार
डॉक्टर कोठारी ने यूनुस से कहा कि जननी सुरक्षा योजना का एक हजार चार सौ रुपये का चेक और डिस्चार्ज सर्टिफिकेट मैं आपको तब दूंगा, जब आप मुझे 500 रुपये देंगे. इसके बाद यूनुस ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से रिश्वत मांगने की शिकायत की. फिर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इसका सत्यापन किया और बाद में 400 रुपये की रिश्वत लेते हुए डॉक्टर को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था.
(रिपोर्ट- प्रमोद तीवारी)