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जयपुर-अजमेर हाईवे का रियलिटी चेक, जहां ट्रक-टैंकर भिड़ंत में चली गई 19 लोगों की जान

हादसे के छठे दिन आजतक उस यू-टर्न पर पहुंचा, जहां हादसे के ज़िम्मेदार एलपीजी टैंकर को अजमेर हाईवे पर यूटर्न लेकर वापस आगरा रोड पर यूटर्न लेना था. जहां हादसा हुआ उसके अगले यूटर्न पर न तो रोड लाइट जल रही थी, न ही कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी था.

जयपुर-अजमेर हाईवे का रियलिटी चेक जयपुर-अजमेर हाईवे का रियलिटी चेक
शरत कुमार
  • जयपुर,
  • 26 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:38 PM IST

जयपुर में अजमेर-दिल्ली हाईवे पर हुए भीषण हादसे में 19 लोग जलकर मर गए और 20 लोग अस्पताल में ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं, लेकिन इतने बड़े हादसे के बाद भी सरकार और एनएचआई की नींद नहीं टूटी है. जहां हादसा हुआ था, वहां ट्रक रिंग रोड पर चढ़ने के लिए यू-टर्न लेते हैं, लेकिन जहां उतरने के बाद यूटर्न लेते हैं, वहां के हालात देखकर आप अंदाज़ा लगाइए कि हमारी और आपकी ज़िंदगी सत्ता में बैठे लोगों के लिए कितनी सस्ती है.

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अभी पिछले शुक्रवार को ही जयपुर में मची चीख पुकार से देश की नींद खुली थी, मगर दिल्ली-अजमेर हाईवे पर हुए भयानक हादसे के बाद की दिल दहला देने वाली तस्वीरों से सरकारों की नींद नहीं खुली है. 

हादसे के छठे दिन आजतक उस यू-टर्न पर पहुंचा, जहां हादसे के ज़िम्मेदार एलपीजी टैंकर को अजमेर हाईवे पर यूटर्न लेकर वापस आगरा रोड पर यूटर्न लेना था. दिन में एक बजे जब राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री निवास में सरकार के तमाम आलाधिकारी और एनएचआई के उच्चाधिकारियों के साथ सीएम हाउस में सड़क हादसों को रोकने के लिए गहन मंथन कर रहे थे, तभी दिन में एक बजे आजतक घटनास्थल पर मौजूद था. 

घटनास्थल के अगले यूटर्न पर ट्रैफिक लाइट तक नहीं जल रही

जहां हादसा हुआ उसके अगले यू-टर्न पर न तो ट्रैफिक लाइट जल रही थी, न ही कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी था. बड़े ट्रक और टैंकर जानलेवा यूटर्न ले रहे थे और जान जोखिम में डालकर हर तरफ से इस व्यस्त हाईवे पर गाड़ियां निकलने की कोशिश कर रही थीं. आजतक का कैमरा देखकर पुलिसवाले तो भागकर आ गए, लेकिन ट्रैफिक लाइट चालू नहीं कर पाए, ट्रैफ़िक लाइट का ज़िम्मा ये एनएचआई पर डाल रहे हैं, जबकि एनएचआई का कहना है कि ये काम जयपुर विकास प्राधिकरण के पास है और वो मेंटेनेंस कर रही है. 

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आज भी बेतरतीब तरीक़े से यूटर्न लेकर निकल रहीं गाड़ियां

जहां टैंकर औऱ ट्रक की भिड़ंत हुई थी वहां आज भी बेतरतीब तरीक़े से यूटर्न लेकर गाड़ियां निकल रही हैं. ये सभी हादसे वाले अजमेर रोड के यूटर्न से घूमकर रिंग रोड पर चढ़कर आगरा हाईवे पर उतर रही हैं. जरा सोचिए धुंध और कोहरे में यहां क्या हालत होगी. एनएचआई का कहना है कि हमारी तरफ से हम सारी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ मजबूरियां स्थानीय स्तर पर हैं.

अधिकारियों का रवैया टालमटोल वाला

जयपुर में हुए सड़क हादसे और अग्निकांड पर सरकार में बैठे अधिकारियों का रवैया अब भी एक दूसरे पर टालने वाला है. आजतक जब हादसे वाली जगह पहुंचा तो वहां टेंपरेरी हैलोजन लाइट्स लगी हुई मिलीं और हाईमास्क लाइट के लिए गड्डा खोदा जा रहा है, रिफ्लेक्टर लगाने के नाम पर लाल धारियां लगा दी गई हैं. लेकिन यूटर्न बंद नहीं हुआ है. 

क्लोअर लीफ़ भी नहीं बनीं

रिंग रोड बन गई, लेकिन उसके उपर चढ़ने के लिए क्लोअर लीफ़ नहीं बनी. 6 साल पहले बनना शुरू हुआ. राज्य सरकार से ज़मीन अधिग्रहण नहीं हुआ, तो ठेकेदार काम छोड़कर 2020 में भाग गया. वसुंधरा और गहलोत सरकार चली गई, अब भजनलाल सरकार है, लेकिन हालात नहीं बदले. अब जाकर एनएचआई ने फिर से टेंडर नई कंपनी को दिया है, जो मार्च 2026 में काम पूरा करेगी. ऐसे चार क्लोअर लीफ़ बनने हैं, ताकि अजमेर-दिल्ली, जयपुर-टोंक, जयपुर-आगरा और जयपुर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर चढ़ा उतरा जा सके. उसके बिना तब तक यू टर्न पर आप अपनी जानमाल की सुरक्षा स्वयं करें.

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कांग्रेस का बीजेपी पर निशाना

उधर कांग्रेस ने इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को ज़िम्मेदार मानते हुए इस्तीफ़ा मांगा है. पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचारियावास ने कहा कि टोल कंपनियां टोल वसूल कर रही हैं, मगर हाईवे के सड़क हादसों पर ध्यान नहीं दे रही हैं.

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