
जयपुर में पुलवामा के शहीदों की पत्नियों के प्रदर्शन पर सियासत गरमा गई है. बीजेपी इस मामले को लेकर गहलोत सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गई है. पिछले कई दिनों से सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है. पुलवामा की वीरांगनाओं के साथ पुलिस ने जो सलूक किया और उनकी आवाज मुखर करने वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा के साथ जो बर्ताव हुआ, उसे लेकर भाजपा ने आंदोलन शुरू किया है.
जयपुर स्थित बीजेपी मुख्यालय से प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में वीरांगनाओं और किरोड़ीलाल मीणा के साथ बदसलूकी को लेकर प्रदर्शन किया गया. इस दौरान पार्टी मुख्यालय से सहकार भवन की ओर निकले सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जब पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो दोनों ओर से जबरदस्त झड़प हुई.
इस बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ी पर हल्का पथराव भी किया, जिसमें पुलिस की गाड़ी के कांच टूट गए. वहीं एक पुलिसकर्मी का डंडा खींचकर कुछ कार्यकर्ताओं ने उस पर हमला कर दिया, लेकिन पदाधिकारियों ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया.
वहीं विरोध-प्रदर्शन के दौरान विधायक मदन दिलावर को चोट लग गई तो पुलिस जवानों के पैरों में ही लेट गए. वहीं बैरीकेड पार करने के प्रयास में प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के पैर में फिर से उसी जगह चोट लगी, जहां पिछले प्रदर्शन में लगी थी.
इस दौरान प्रदर्शन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के साथ उपनेता प्रतिपक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़, सांसद घनश्याम तिवाड़ी सहित कई नेता मौजूद रहे. करीब आधे घंटे के विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियां दीं. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर नेताओं-कार्यकर्ताओं ने सभा भी की.
धरने पर बैठी वीरांगनाओं की ये हैं मांगें
दरअसल, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 3 जवानों की वीरांगनाएं बीते 28 फरवरी से प्रदर्शन कर रही हैं. वह नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कुछ दिनों से सीएम गहलोत से मुलाकात का समय मांग रही थीं. उनकी मांग है कि न सिर्फ उनके बच्चों, बल्कि उनके रिश्तेदारों को भी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए.
उनकी अन्य मांगों में शहीद के नाम पर सड़कों का निर्माण और उनके गांवों में शहीदों की प्रतिमाएं लगाना भी शामिल है. इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साफ कर चुके हैं कि वे किसी शहीद के बच्चे की नौकरी का हक नहीं मारेंगे, लेकिन किसी के रिश्तेदार को नौकरी देना ठीक परंपरा नहीं है.
बात सुनने में ईगो नहीं आगे लानी चाहिएः पायलट
राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा है कि मानना न मामना बाद की बात है, लेकिन बात को सुनने में किसी को ईगो सामने नहीं लाना चाहिए. मेरे घर ये अचानक आ गईं. मैंने उनकी बात सुनी. महिलाएं हैं, भावुक हैं, उनकी मानसिक स्थिति क्या होगी, उन पर क्या बीती होगी. संवेदनशीलता से उनकी बातों को सुना जाना चाहिए था, जो संभव है, बताना चाहिए था. अगर नहीं भी करना है तो उनको बैठकर समझाते या समझाने का काम किया गया होता तो बेहतर तरीके से मामले को निपटाया जा सकता था.
वहीं सचिन पायलट ने कहा कि लोगों के दिल पर जो राज करता है, असली इंसान वही होता है. बड़े-बड़े पदों पर तो बहुत लोग बैठते हैं. उन्होंने कहा है कि वीरांगनाओं को लेकर राजनीति करने से प्रदेश में गलत संदेश जाएगा. बात अगर एक नौकरी की है या दो नौकरी की है तो कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. नियम संसोधन पहले भी हुए हैं और आगे भी होंगे. मैं सैनिकों की शहादत को नमन करता हूं.
BJP के प्रदर्शन के दौरान किरोड़ीलाल मीणा के समर्थक हुए आक्रोशित
आज बीजेपी ने प्रदर्शन का ऐलान किया था, इसमें सबसे ज्यादा किरोड़ीलाल मीणा के ही समर्थक पहुंचे थे, जो आक्रोशित थे. उन्हें प्रदेश पदाधिकारियों ने कई बार शांत भी करवाया, लेकिन वे किसी की भी सुनने को तैयार नहीं थे. ऐसे में सतीश पूनिया सांकेतिक प्रदर्शन कर वापस कदम खींचने लगे. उसी बीच किरोड़ीलाल मीणा के समर्थक उत्तेजित हो गए और पुलिस से धक्कामुक्की करने लगे.
इस बीच पुलिस ने भी उन्हें कड़ा सबक सिखाया. हालांकि जो किरोड़ीलाल पहले अकेले वीरांगनाओं के समर्थन में धरने पर बैठे थे, उस दौरान वे कई बार प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को लेकर बयान दे चुके थे कि पूनिया नहीं आ रहे हैं. ऐसे में अब जब पूनिया सड़कों पर उतरे तो किरोड़ी समर्थकों ने उन्हें भी खरीखोटी सुनाई.
प्रदर्शन के दौरान बिगड़ चुकी है किरोड़ीलाल मीणा की तबीयत
राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को शुक्रवार को जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया. दरअसल, वे अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शहीद रोहिताश लांबा की वीरांगना पत्नी मंजू से मिलने के लिए अस्पताल जा रहे थे. इसी बीच सामोद पुलिस थाने के बाहर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर किरोड़ीलाल मीणा को रोक लिया था.
इसके बाद पुलिस और समर्थकों में बहस शुरू हो गई और पुलिस जबरन सांसद को गाड़ी में बैठाकर ले गई थी, बाद में उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया. इसके बाद जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के बाहर BJP समर्थकों ने भारी हंगामा किया था, जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था. पुलिस ने BJP के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया था.
किरोड़ीलाल मीणा ने पुलिस पर लगाए थे गंभीर आरोप
बता दें कि राजस्थान के जयपुर में पिछले 12 दिन से चल रहे वीरांगनाओं के धरने को पुलिस ने खत्म करा दिया था. इसके बाद किरोड़ीलाल मीणा ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. मीणा ने कहा था कि पुलिस ने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन गरीबों, वीरांगनाओं और बेरोजगारों के आशीर्वाद से मेरी जिंदगी बच गई.
उन्होंने ट्वीट किया था, 'पुलिस ने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन वीरांगनाओं, युवा, बेरोजगारों और गरीबों के आशीर्वाद से बच गया. मुझे चोट आई है. गोविंदगढ़ अस्पताल से मुझे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर किया गया है'.