Advertisement

जयपुर में हजारों बांग्लादेशियों का अवैध कब्जा, सरकारी पेंशन और राशन ले रहे, चुनाव में वोट डालने वाले कई हिस्ट्रीशीटर!

जयपुर बक्शावाला की जेडीए कॉलोनी में रहने वाले 62 वर्षीय बांग्लादेशी फजलू हक के पास आधार-जनआधार है. फजलू और उनकी पत्नी राज्य सरकार की बुजुर्गों को मिलने वाली एक हजार रुपए पेंशन भी ले रहे हैं.

जयपुर में हजारों बांग्लादेशी रह रहे हैं जयपुर में हजारों बांग्लादेशी रह रहे हैं
विशाल शर्मा
  • जयपुर,
  • 01 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 7:57 PM IST

राजस्थान के जयपुर में अवैध रूप से हजारों बांग्लादेशी ना सिर्फ यहां शरण लिए हुए हैं, बल्कि किसी आम भारतीय की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं. यहां तक की बड़ी तादाद में बांग्लादेशी वोट तक डाल रहे हैं. इसमें कई हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हैं, जिनकी जयपुर पुलिस के पास सूची भी है, बावजूद इसके पुलिस इन्हें नहीं पकड़ सकी है. हालांकि, हाल में कुछ बांग्लादेशियों को पुलिस ने पकड़ा जिनके पास कई भारतीय दस्तावेज मिले, जिसे देख पुलिस भी हैरान रह गई.

Advertisement

बक्शावाला में रह रहे बांग्लादेशी
जयपुर बक्शावाला की जेडीए कॉलोनी में रहने वाले 62 वर्षीय बांग्लादेशी फजलू हक के पास आधार-जनआधार है. फजलू और उनकी पत्नी राज्य सरकार की बुजुर्गों को मिलने वाली एक हजार रुपए पेंशन भी ले रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि मिशन बसेरा के तहत जयपुर विकास प्राधिकरण ने उसे मकान तक आवंटित कर दिया. यहां बक्शावाला में 80 बांग्लादेशी रह रहे हैं, पुलिस इन्हें थाने बुलाकर कई बार तस्दीक भी करती है.

सरकारी पेंशन और राशन ले रहे
ऐसे ही जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाली हिना बानो है, जो सांगानेर थाना पुलिस के रिकॉर्ड में बांग्लादेश नागरिक वाली सूची में दर्ज है, फिर भी उसके पास बक्शावाला स्थित जेडीए कॉलोनी में आवंटित जेडीए का मकान है. मिशन बसेरा के तहत दिए इसी मकान के पते का वोटर कार्ड भी है. यहां तक की बीते विधानसभा चुनाव में वह वोट भी डाल चुकी है. हिना के पड़ोस के मकान में रहने वाली हसीना के पास भी वोटर कार्ड है और जेडीए का मकान भी. वह हर माह 1100 रु. की सरकारी पेंशन और राशन भी ले रही है.

Advertisement

पूरे राजस्थान में फैले हैं अवैध बांग्लादेशी
यह तो महज कुछ नाम है जबकि ऐसे हजारों अवैध बांग्लादेशी जयपुर ही नहीं पूरे राजस्थान में कई जिलों में शरण लिए रह रहे हैं, लेकिन जब इन्हें पूछा जाए की कहां से आकर यहां बसे? तो झगड़े पर उतारू हो जाते है. यहां तक की माता-पिता का नाम तक भूल जाते है. इसमें कई बड़े-बड़े आरोपी भी है जो पुलिस थाने की हिस्ट्रीशीट में आते है लेकिन फिर भी पुलिस की नजर में फरार है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement