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'न कोर्ट, न फौज और न कोई सिस्टम रहेगा...', सत्यपाल मलिक का केंद्र सरकार पर हमला

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने रविवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला. कहा कि पीएम अपनी नांक के नीचे भ्रष्टाचार करवाते हैं. अगर, पुलवामा हमले की जांच होती तो गृहमंत्री का इस्तीफा होता और काफी अफसर जेल में होते. 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो). जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो).
संतोष शर्मा
  • अलवर ,
  • 21 मई 2023,
  • अपडेटेड 7:02 AM IST

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा, अगर अगले चुनाव तक जनता ने इनके खिलाफ मतदान नहीं किया तो ये आपको मतदान करने लायक ही नहीं छोड़ेंगे. ये कह देंगे कि जब हम ही चुनाव जीतते है तों चुनाव कराने की क्या जरूरत. न कोर्ट रहेंगे न फोर्स रहेगी न फौज होगी और न कोई ऐसा सिस्टम रहेगा, जिससे इन पर कंट्रोल किया जा सके. 

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सत्यपाल मलिक ने कहा कि ये लोग मुझे गद्दार कहना चाहते हैं. मगर, मैंने ईमानदारी से काम किया है. जम्मू-कश्मीर में मुझे 300 करोड रुपये का ऑफर मिला था, जिसे ठुकरा दिया. अब मुझे नहीं फसा पा रहे हैं, इसलिए मेरे नीचे जो अधिकारी रहे थे, उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई की लगा दी है. इसका मकसद है कि खिलाफ षड्यंत्र रचकर मुझे जेल भेज सकें.

गौरतलब है कि मलिक अलवर जिले के बानसूर दौरे पर पहुंचे थे. यहां बानसूर के गांव फतेहपुर में राम दरबार मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान लोगों ने 21 किलो की माला पहनाकर उनका स्वागत किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यपाल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला.

'पीएम नाक के नीचे भ्रष्टाचार करवाते हैं'

उन्होंने कहा कि अडानी इनका साथी है, जिसने तीन साल में इतनी दौलत बना ली कि देश का सबसे बड़ा इमानदार हो गया. पार्लियामेंट में जब राहुल गांधी ने 20000 करोड़ रुपये के बारे में पूछा तो प्रधानमंत्री बता नहीं पाए. पीएम अपनी नाक के नीचे भ्रष्टाचार करवाते हैं. 

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'इस बार आप इनके राज को पलट सकते हैं'

लोगों को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि इस बार आप इनके राज को पलट सकते हैं. पुलवामा में हमारे 40 सैनिक शहीद हुए थे. तब मैं कश्मीर का गर्वनर था. जब सीआरपीएफ के जवानों की मूवमेंट होती थी वो हमें खबर न देकर गृह मंत्रालय को खबर देते थे. पुलवामा हमले की जांच नहीं हुई. अगर, जांच होती तो गृहमंत्री का इस्तीफा होता और काफी अफसर जेल में होते. 
 

 

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