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जोधपुर: MBBS की छात्रा को मिजोरम में आया हार्ट अटैक, 19 मार्च को थी परीक्षा

जोधपुर शहर के बीजेएस इलाके में रहने वाली एमबीबीएस की छात्रा अनीता की मिजोरम के जोरम मेडिकल कॉलेज में हार्ट अटैक आने से मौत हो गई. अनीता के छोटे पिता उम्मेदसिंह ने बताया कि वह फाइनल एग्जाम पूरे होने के बाद जोधपुर आकर इंटर्नशिप करना चाहती है.

अनीता को आया था हार्ट अटैक अनीता को आया था हार्ट अटैक
अशोक शर्मा
  • जोधपुर,
  • 13 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

राजस्थान के जोधपुर शहर के बीजेएस इलाके में रहने वाली एमबीबीएस की छात्रा अनीता की मिजोरम के जोरम मेडिकल कॉलेज में हार्ट अटैक आने से मौत हो गई. अनीता नागौर मेड़ता तहसील के तालनपुर की रहने वाली है, फिलहाल परिवार जोधपुर में रहता है. 

अनीता डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर तैयारी कर रही थी. 19 मार्च को उसके एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की परीक्षा पूरी होनी थी, लेकिन उससे पहले ही 8 मार्च को उसे हार्ट अटैक आ गया. जिससे उसकी मौत हो गई. अनीता अपने गांव की पहली महिला डॉक्टर बनने वाली थी. अनीता  का 2018 में नीट में सिलेक्शन हुआ था. वह गांव से मिजोरम एमबीबीएस करने के लिए गई, लेकिन वहां की भाषा के साथ पढ़ाई पूरी करना बेहद कठिन था.

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अनीता के छोटे पिता उम्मेदसिंह ने बताया कि वह फाइनल एग्जाम पूरे होने के बाद जोधपुर आकर इंटर्नशिप करना चाहती है. मिजोरम के कॉलेज से 10 मार्च को अनीता का शव गांव पहुंचा और 11 मार्च को उसका दाह संस्कार किया गया. 

पिछले कुछ सालों में दिल की बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. पहले जहां 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही हार्ट अटैक ज्यादा आते थे, वहीं, अब 30 साल या उससे कम उम्र के लोगों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है. बीते कुछ सालों में साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ गया है.

क्या होता है साइलेंट हार्ट अटैक? 
साइलेंट हार्ट अटैक को साइलेंट इस्केमिया के नाम से भी जाना जाता है. साइलेंट हार्ट अटैक आने पर इसके कोई भी लक्षण पहले नजर नहीं आते हैं. आमतौर पर हार्ट अटैक आने पर छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और पसीने आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन साइलेंट हार्ट अटैक में जरूरी नहीं कि किसी व्यक्ति को ये सभी चीजें महसूस हों.

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हार्ट अटैक तब आता है जब आपके दिल को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. आमतौर पर, आर्टरीज में प्लाक जमने के कारण दिल तक खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता है. ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक आया है. बहुत से मामलों में इसका पता तब चलता है जब डॉक्टर्स उनकी जांच करते हैं. ईसीजी (ECG) के साथ ही और भी कई ऐसे टेस्ट हैं जिनके जरिए साइलेंट हार्ट अटैक का पता चल सकता है. कई बार हार्ट अटैक के लक्षणों को लोग किसी और समस्या के लक्षण समझकर इग्नोर कर बैठते हैं.

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