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राजस्थान के अलवर जिले में आरती बालिका गृह में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची की इलाज के अभाव में मौत हो गई. बच्ची ब्रेन टीबी से पीड़ित थी और उसकी हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका. इस मामले में बालिका गृह संचालक और प्रशासन एक-दूसरे पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहे हैं.
बच्ची दो साल पहले अरावली विहार थाना क्षेत्र में काला कुआं इलाके में लावारिस हालत में मिली थी. पुलिस ने उसे चाइल्डलाइन के हवाले किया, जिसके बाद उसे आरती बालिका गृह भेजा गया. वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रही थी.
इलाज के अभाव में बच्ची की मौत
31 जनवरी को बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अलवर के सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया गया. बाद में शिशु चिकित्सालय भेजा गया, जहां एमआरआई में उसके ब्रेन में टीबी की पुष्टि हुई. डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और जयपुर रेफर करने की सलाह दी, लेकिन रेफर करने में देरी हुई. 11 फरवरी को इलाज के अभाव में बच्ची की मौत हो गई.
बालिका गृह संचालक चेतराम सैनी ने आरोप लगाया कि बाल अधिकारिता विभाग पिछले चार सालों से अनुदान नहीं दे रहा था और रेफरल के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई. दूसरी तरफ बाल अधिकारिता विभाग ने आरोप लगाया कि बालिका गृह ने समय रहते बच्ची की स्थिति की सूचना नहीं दी, जिससे समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल सका.
दो साल से बालिका गृह में रह रही थी लड़की
मौत के बाद बच्ची के आधार कार्ड से उसके परिजनों की पहचान हुई. उसके ताऊ ने शव को पोस्टमार्टम के बाद लिया. इस पूरे मामले में सरकारी विभागों की लापरवाही उजागर हुई है. बढ़ते विवाद को देखते हुए जिला कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं.