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'मैं एक कंकड़ हूं, घड़ा फोड़ दूंगा...', सिर्फ 9 दिन में BJP से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले रवींद्र भाटी की कहानी

राजस्थान में विधासभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. वहां राज तो बदला लेकिन रिवाज नहीं बदला. बीजेपी ने सत्ता में वापसी कर ली है लेकिन इस दौरान जिस एक प्रत्याशी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो शिव सीट से चुनाव जीतने वाले 26 साल के युवा रवींद्र सिंह भाटी है जिन्होंने बीजेपी-कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को धूल चटा दी है.

सिर्फ 26 साल की उम्र में विधायक बने रवींद्र सिंह भाटी सिर्फ 26 साल की उम्र में विधायक बने रवींद्र सिंह भाटी
aajtak.in
  • बाड़मेर,
  • 04 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:49 AM IST

राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं जिसमें वहां का राज तो बदल गया लेकिन रिवाज नहीं बदला. बीजेपी ने सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की और 115 सीटों पर कब्जा जमा लिया. वहीं कांग्रेस को सिर्फ 69 सीटों से संतोष करना पड़ा. लेकिन राजस्थान चुनाव परिणाम आने के बाद जो एक सीट और उसका उम्मीदवार चर्चा में है वो हैं बाड़मेर के शिव सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे रवींद्र सिंह भाटी.

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इस विधानसभा चुनाव में शिव सीट पर 26 साल के इस नौजवान युवक रवींद्र सिंह भाटी ने बीजेपी और कांग्रेस को पछाड़ते हुए ये बड़ी जीत हासिल की है. भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने के बाद महज 9 दिनों में बागी हुए रवींद्र भाटी ने अपने पहले ही चुनाव में बाजी मारी है. 26 साल में वो विधायक बन गए हैं जबकि भारत में चुनाव लड़ने की उम्र ही 25 साल है.

चुनाव के दौरान हमारे सहयोगी चैनल द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में रवींद्र सिंह भाटी ने कहा था, 'वो एक कंकड़ हैं और इस बार घड़ा फोड़ देंगे.' उन्होंने जैसा कहा था, वैसा कर भी दिया. जोधपुर से आने वाले 26 साल के इस नौजवान ने BJP और कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों के पसीने छुड़ा दिए और 3950 वोटों से चुनाव जीतकर महज 26 साल की उम्र में विधायक बन गए. 

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9 दिनों में ही क्यों बागी हो गए थे रवींद्र सिंह भाटी.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रवींद्र सिंह भाटी ने 28 अक्टूबर 2023 को BJP ज्वाइन की थी. इसके बाद ही वो सिर्फ नौ दिनों बाद बागी हो गए. टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और सेब के चुनाव चिह्न पर निर्दलीय चुनाव जीतकर अब विधानसभा पहुंच गए हैं.

शिव विधानसभा सीट पर रवींद्र सिंह भाटी ने बीजेपी के स्वरूप सिंह खारा, कांग्रेस के अमीन खां जैसे कद्दावर नेताओं को धूल चटाकर मैदान मार लिया. साल 2018 में कांग्रेस के टिकट पर अमीन खां यहां से विधानसभा चुनाव जीते थे. इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अमीन खान तीसरे नम्बर पर रहे. 

रवींद्र सिंह भाटी का पॉलिटिकल करियर

अब अगर रवींद्र सिंह भाटी के पॉलिटिकल करियर की बात करें तो उन्होंने बेहद कम समय में यूनिवर्सिटी की राजनीति से विधानसभा तक का सफर तय किया है. भाटी साल 2019 से 2022 तक जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं. हालांकि छात्रसंघ अध्यक्ष का कार्यकाल एक साल का ही होता है लेकिन कोरोना की वजह से दो साल चुनाव नहीं होने की वजह से वही अध्यक्ष बने रहे. 

भाटी बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा क्षेत्र में ही दुधोड़ा गांव के रहने वाले हैं. बीते एक साल से भाटी यहां अपनी राजनीतिक जमीन बनाने में लगे हुए थे जिसका फायदा उन्हें इस चुनाव में मिला.

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भाटी ने बीते साल ‘रन फॉर रेगिस्तान’ नाम की मैराथन निकालकर हजारों की संख्या में युवाओं को इकठ्ठा कर अपना शक्ति प्रदर्शन भी किया था लेकिन बीजेपी ने जब टिकट देने से इनकार किया तो वो महज 9 दिनों में बागी हो गए.  इसके बाद रवींद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और सेब के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल कर मीडिया की सुर्खियां बन गए हैं.

 

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