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जैसलमेर में दो तहसीलदार 15 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई

एसीबी ने जैसलमेर में बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार सुमित्रा चौधरी और शिवप्रसाद शर्मा को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. ये दोनों जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और पैमाइश के बदले 60 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे. एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

जैसलमेर रिश्वत कांड. जैसलमेर रिश्वत कांड.
शरत कुमार
  • जैसलमेर,
  • 17 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 9:30 PM IST

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जैसलमेर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भणियाणा और फतेहगढ़ तहसील के दो तहसीलदारों को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में तहसील भणियाणा की तहसीलदार सुमित्रा चौधरी और तहसील फतेहगढ़ के तहसीलदार शिवप्रसाद शर्मा शामिल हैं. एसीबी की स्पेशल यूनिट (जयपुर) ने यह कार्रवाई एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर की.

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60 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप

दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के महानिदेशक डॉ. रवि प्रकाश मेहरडा ने बताया कि एसीबी स्पेशल यूनिट को शिकायत मिली थी कि जैसलमेर जिले में तहसीलदार सुमित्रा चौधरी और शिवप्रसाद शर्मा ने किसी व्यक्ति की खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और पैमाइश के बदले 60 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी.

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एसीबी की टीम ने चलाया अभियान

शिकायतकर्ता को लगातार परेशान किया जा रहा था और काम के बदले मोटी रकम मांगी जा रही थी. इस पर जयपुर एसीबी स्पेशल यूनिट की टीम ने एक जाल बिछाया और दोनों तहसीलदारों को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उपमहानिरीक्षक पुलिस (डीआईजी) अनिल कयाल के सुपरविजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने किया. साथ ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चक्रवती सिंह और उनकी टीम का भी अहम योगदान रहा.

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राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में मामले की गहन जांच की जा रही है. राजस्थान में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एसीबी लगातार छापेमारी कर रही है और सरकारी अधिकारियों पर निगरानी रख रही है. वहीं, गिरफ्तार किए गए तहसीलदारों से पूछताछ जारी है. एसीबी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि इस घूसखोरी में और कौन-कौन लोग शामिल थे.

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