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Adhik Maas Amavasya 2023: 15 या 16 अगस्त कब है अधिकमास अमावस्या? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Adhik Maas Amavasya 2023: मान्यताओं के अनुसार, कई लोग अमावस्या को अमावस भी कहते हैं. इस बार अधिकमास की अमावस्या 16 अगस्त को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पूजा-पाठ करने का खास महत्व होता है. अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए पूजा पाठ और श्राद्ध कर्म करवाना बेहद फलदायी माना जाता है.

अधिकमास अमावस्या 2023 अधिकमास अमावस्या 2023
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

Adhik Maas Amavasya 2023: पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास की अमावस्या पितृ शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास की अमावस्या के दिव पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं. इस बार अधिकमास की अमावस्या का व्रत 16 अगस्त, बुधवार को रखा जाएगा. अधिकमास की यह अमावस्या 3 साल में एक बार आती है. अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. सनातन धर्म में अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कि अधिकमास की अमावस्या का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है. 

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अधिकमास अमावस्या शुभ मुहूर्त (Adhik Maas Amavasya 2023 Shubh Muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तिथि को अमावस्या का त्योहार मनाया जाता है. इस बार अधिकमास की अमावस्या तिथि 15 अगस्त को दिन में 12 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 16 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर होगा. साथ ही इस दिन वरीयान योग का निर्माण भी होने जा रहा है जिसका समय 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 33 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 16 अगस्त को शाम 6 बजकर 31 मिनट पर होगा. 

अधिकमास अमावस्या पूजन विधि (Adhik Maas Pujan Vidhi)

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें. आषाढ़ अमावस्या के दिन गंगा स्नान का अधिक महत्व है. इसलिए गंगा स्नान जरूर करें. अगर आप स्नान करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें. इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना चाहिए. आषाढ़ अमावस्या के दिन अपनी योग्यता के अनुसार दान जरूर देना चाहिए. पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि कर सकते हैं. 

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अधिकमास अमावस्या नियम (Adhik Maas Amavasya Niyam) 

इस दिन का व्रत बिना कुछ खाए पिए रहा जाता है. अमावस्या तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर गायत्री मंत्र का 108 बार जप करें और सूर्य और तुलसी को जल अर्पित करें. इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. गाय को चावल अर्पित करें. तुलसी को पीपल के पेड़ पर रखें. इसके साथ ही इस दिन दही, दूध, चंदन, काले अलसी, हल्दी, और चावल का भोग अर्पित करें. पेड़ के चारों ओर 108 बार धागा बांधकर परिक्रमा करें. विवाहित महिलाएं चाहें तो इस दिन परिक्रमा करते समय बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, आदि भी रख सकती हैं. इसके बाद पितरों के लिए अपने घर में भोजन बनाएं और उन्हें भोजन अर्पित करें. गरीबों को वस्त्र, भोजन, और मिठाई का दान करें. गायों को चावल खिलाएं.
 
अधिकमास अमावस्या उपाय (Adhik Maas Amavasya Upay)

1. अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में जा कर स्नान करें या फिर अपने नहाने के पानी में गंगा जल मिलाएं. 

2. अमावस्या के दिन सुबह समय पर उठ जाएं और स्नान आदि करने के बाद हनुमान जी का पाठ करें और उन्हें लड्डू का भोग लगाएं. यदि आप पाठ नहीं कर पा रहे तो हनुमान बीज मंत्र का जाप भी कर सकते हैं. आप पूजा करते समय हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दिया जलाएं. 

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3. घर में पूजा करने के अलावा आप मंदिर जाएं और अन्न का दान करें. अन्न दान को हिन्दू धर्म में बहुत बड़ा पुण्य माना गया है और यदि इस कार्य को अमावस्या के दिन किया जाए तो यह और भी शुभ होता है.

4. इस दिन शनि देव को तेल का दान करें. साथ में आप काली उड़द और लोहा भी दान कर सकते है.
 

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