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Angarki Chaturthi 2021: फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

ज्योतिष के मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है. यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो यह अति शुभकारक मानी गई है. मंगलवार के दिन पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी भी कहते हैं.

Angarki Chaturthi 2021: फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि Angarki Chaturthi 2021: फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST
  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से विघ्न-बाधाएं दूर
  • मंगलवार को पड़ने की वजह से कहते हैं अंगारकी चतुर्थी

Angarki Chaturthi 2021: हिंदू कैलेंडर के आखिरी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी आज यानी 2 मार्च को है. ज्योतिष के मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है. यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो यह अति शुभकारक मानी गई है. मंगलवार के दिन पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी भी कहते हैं. गणेश अंगारकी चतुर्थी का व्रत करने से पूरे साल भर के चतुर्थी व्रत के करने का फल प्राप्त होता है.

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क्यों कहते हैं अंगारकी चुतुर्थी
अंगारक (मंगल देव) के कठिन तप से प्रसन्न होकर गणेश जी ने वरदान दिया और कहा कि चतुर्थी तिथि यदि मंगलवार को होगी तो उसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा. इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी काम बिना किसे विघ्न के सम्पूर्ण हो जाते हैं. भक्तों को गणेश जी की कृपा से सारे सुख प्राप्त होते हैं.

इस दिन कैसे करें भगवान गणेश की पूजा?
प्रातःकाल स्नान करके गणेश जी की पूजा का संकल्प लें. दिन भर जलधार या फलाहार ग्रहण करें. संध्याकाल में भगवान् गणेश की विधिवत उपासना करें. भगवान को लड्डू, दूर्वा और पीले पुष्प अर्पित करें. चन्द्रमा को निगाह नीची करके अर्घ्य दें. भगवान गणेश के मन्त्रों का जाप करें. जैसी कामना हो, उसकी पूर्ति की प्रार्थना करें

शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि आरंभ: 02 मार्च 2021, मंगलवार, सुबह 05 बजकर 46 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 03 मार्च 2021, बुधवार, रात 02 बजकर 59 मिनट तक

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विशेष मंत्र का जाप
1. श्री महागणपति प्रणव मूलमंत्र: ऊँ.
ऊँ वक्रतुण्डाय नम: .
पंचामृत अर्पित करें

 2. श्री महागणपति प्रणव मूलमंत्र: ऊँ गं ऊँ .
महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ..
चंदन की धूप जलायें

3. ऊं गं गणपतये नम:.
ऊँ श्री गणेशाय नम: .
दूर्वा जरूर अर्पित करें

4. ऊँ नमो भगवते गजाननाय .
ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् .
पंचामृत अर्पित करें

5. श्री गणेशाय नम: .
महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ..
पूजा में आरती जरूर करें

6. ऊँ श्री गणेशाय नम: .
ऊँ गं गणपतये नम:.
दूर्वा जरूर अर्पित करें

7. ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् .
ऊँ गं ऊँ .
चंदन की धूप जलाएं

8. ऊँ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:.
लड्डू का भोग लगाएं.

9. हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्र्तये नम: .
ऊँ गं गणपतये नम:.
पंचामृत अर्पित करें

10. हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय .
 ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् .
दूर्वा जरूर अर्पित करें

 

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