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Chaitra Navratri 2022: अष्टमी तिथि को लेकर दूर करें कंफ्यूजन, जानें कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और नियम

Chaitra Navratri 2022 Ashtami Tithi: चैत्र नवरात्रि में पूरे नौ दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना का विधान है. नवरात्रि में अष्टमी-नवमी का खास महत्व होता है. अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. इस साल अष्टमी तिथि शनिवार को पड़ रही है. चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2022 को है. 

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST
  • अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है
  • नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है

Chaitra Navratri 2022 Ashtami Tithi Shubh Muhurat: संपूर्ण देश में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस दौरान मां दुर्गा (Goddess Durga) के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है. कई लोग सप्तमी तक व्रत रखते हैं और अष्टमी पूजन करते हैं. वहीं, कुछ लोग अष्टमी तिथि तक व्रत रखकर नवमी पूजते हैं. लेकिन इस बार लोगों को अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर काफी कंफ्यूजन रहती है. तो आइए जानते हैं कब है अष्टमी तिथि. साथ ही जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और नियम-

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चैत्र नवरात्रि 2022 अष्टमी तिथि शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 Ashtami Shubh Muhurat)

बता दें कि इस साल अष्टमी तिथि शनिवार को पड़ रही है. अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2022 को है. 

प्रारम्भ - 8 अप्रैल रात 11 बजकर 5 मिनट से शुरू
समाप्त- 10 अप्रैल सुबह 1 बजकर 23 मिनट पर समाप्त

अष्टमी पूजा विधि (Ashtami 2022 Puja Vidhi)

- अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें.

- इसके बाद पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें.

-  पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर रखें. 

- इसके बाद मां के आगे घी का दीपक जलाएं. फिर फूल और फल अर्पित करें.

- फिर अंत में मां दुर्गा की आरती उतारें.

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कन्या पूजा की विधि (Kanya pujan vidhi 2022 )

पूजन से पहले सभी कन्‍याओं को एक दिन पहले ही उनके घर जाकर निमंत्रण दिया जाता है. घर में सभी नौ कन्याओं का प्रवेश होने पर उन्हें आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाएं. सभी के पैरों को दूध से भरे थाल में रखकर अपने हाथों से उनके पैर स्‍वच्‍छ पानी से धोएं. कन्‍याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं. भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें. 

कन्या पूजन के समय रखें इन बातों का ख्याल 

- कन्या पूजन के समय ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र 2 वर्ष से कम और 10 वर्ष से ज्यादा ना हो.

- कन्या पूजन के दौरान सभी कन्याओं को पूर्व की ओर मुख करके बैठाएं. 

- कन्या पूजन के दौरान एक लड़के को अवश्य बैठाएं. पूजन के दौरान लड़का भैरव बाबा का रूप माना जाता है. 

- कन्या पूजन के दौरान बनने वाले प्रसाद में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता. 

- ध्यान रहें कि कन्या पूजन के लिए बनने वाला खाना बिल्कुल ताजा हो. 

- कन्या पूजन के दौरान सभी कन्याओं के पैर धोएं. उन्हें आसन पर बिठाएं और उन्हें टीका लगाएं. इसके बाद उनके पैस छूकर आशीर्वाद लें. 

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