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Yogini Ekadashi 2022 Date: कब है योगिनी एकादशी? यहां जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Yogini Ekadashi 2022: योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है. जो व्यक्ति योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है, उसे पाप से मुक्ति मिलती है. माना जाता है कि योगिनी एकादशी व्रत करने वाले लोगों को मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के चरणों में जगह प्राप्त होती है.

Yogini Ekadashi 2022 Date shubh muhurat and puja vidhi Yogini Ekadashi 2022 Date shubh muhurat and puja vidhi
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2022,
  • अपडेटेड 7:25 AM IST
  • योगिनी एकादशी के दिन की जाती है भगवान विष्णु की खास पूजा-अर्चना
  • सभी पापों से मिलती है मुक्ति

Yogini Ekadashi 2022:  आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार योगिनी एकादशी 24 जून 2022 को पड़ रही है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से 88 ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है. योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की खास पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं. तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि के बारे में- 

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योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त

योगिनी एकादशी शुक्रवार, जून 24, 2022 को
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 23, 2022 को रात 09 बजकर 41 मिनट पर शुरू 
एकादशी तिथि समाप्त - जून 24, 2022 को रात 11बजकर 12 मिनट पर खत्म 
पारण का समय- 25 जून सुबह 05 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट पर 

योगिनी एकादशी पूजा विधि

- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और व्रत का संकल्प लें.

- इसके बाद भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं. 

- मंदिर की अच्छी तरह से सफाई करें और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें. 

- भगवान विष्णु के आगे घी का दीपक जलाएं और उन्हें हलवे या खीर का भोग लगाएं. भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें.

- इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही तुलसी की पूजा भी की जाती है क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु  की प्रिय है. 

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योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है.

योगिनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में अलकापुरी नगर में राजा कुबेर के यहां हेम नामक एक माली रहता था. उसका कार्य रोजाना भगवान शंकर के पूजन के लिए मानसरोवर से फूल लाना था. एक दिन उसे अपनी पत्नी के साथ स्वछन्द विहार करने के लिए कारण फूल लाने में बहुत देर हो गई. वह दरबार में विलंब से पहुंचा. इस बात से क्रोधित होकर कुबेर ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया. श्राप के प्रभाव से हेम माली इधर-उधर भटकता रहा और एक दिन दैवयोग से मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा. ऋषि ने अपने योग बल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया. तब उन्होंने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा. व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई.

इस समय ना करें पूजा 

राहुकाल- सुबह 10 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
विडाल योग-  सुबह 05 बजकर 51 मिनट  से 08 बजकर 04 मिनट तक 
यमगण्ड- शाम 03 बजकर 51 मिनट से 05 बजकर 31 मिनट तक  
गुलिक काल-  सुबह 07 बजकर 31 मिनट से 09 बजकर 11 मिनट तक

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