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Chanakya Niti In Hindi: इन चीजों के कारण हमेशा दुखी रहता है मनुष्य, नहीं मिलता सुख-चैन

कुशल अर्थशास्त्री और नीति शास्त्र के महान ज्ञानी आचार्य चाणक्य ने भी अपने नीतिशास्त्र में कुछ परिस्थितियों का उल्लेख किया है जिसके कारण मनुष्य हमेशा दुखी रहता है. वो कहते हैं कि व्यक्ति को सुख-चैन प्राप्त करने के लिए कुछ चीजों में बदलाव करना चाहिए. आइए जानते हैं इन चीजों के बारे में... 

Chanakya Niti In Hindi Chanakya Niti In Hindi
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 10:55 AM IST

Chanakya Niti In Hindi: मनुष्य अपने जीवन में तमाम तरह की परेशानियों से घिरा रहता है. वो परेशान रहते हुए भी सुख-चैन की तलाश करता रहता है. कुशल अर्थशास्त्री और नीति शास्त्र के महान ज्ञानी आचार्य चाणक्य ने भी अपने नीतिशास्त्र में कुछ परिस्थितियों का उल्लेख किया है जिसके कारण मनुष्य हमेशा दुखी रहता है. वो कहते हैं कि व्यक्ति को सुख-चैन प्राप्त करने के लिए कुछ चीजों में बदलाव करना चाहिए. आइए जानते हैं इन चीजों के बारे में... 

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कुग्रामवासः कुलहीन सेवा कुभोजन क्रोधमुखी च भार्या।
पुत्रश्च मूर्खो विधवा च कन्या विनाग्निमेते प्रदहन्ति कायम्॥

  • आचार्य चाणक्य ने कहा है कि मनुष्य को ऐसी जगह पर नहीं रहना चाहिए जो पहले से ही बदनाम हो. ऐसी जगह पर रहने वाले लोग बुरे होते हैं. ऐसे में वो लोग किसी भी दूसरे के लिए भला नहीं सोच सकते. यही कारण है कि वहां रहने से संतानों पर बुरा असर पड़ता है और हानि होने का खतरा रहता है.
  • गलत कार्यों में शामिल लोगों की मदद नहीं करना चाहिए, चाणक्य ऐसे लोगों को मदद करने को अधर्म मानते हैं. वो कहते हैं कि बुरे कार्यों में लिप्त व्यक्ति का साथ बर्बाद कर देता है. अच्छे से अच्छा व्यक्ति भी ऐसे लोगों का संगत पाकर तबाह हो जाता है. इसलिए ऐसे लोगों की सेवा नहीं करना चाहिए.
  • इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को उतना ही भोजन ग्रहण करना चाहिए जितने की जरूरत हो. ज्यादा भोजन करना हानिकारक होता है. साथ ही जो भोजन आप कर रहे हैं वो बेहतर होना चाहिए. भोजन ठीक न हो तो तबीयत पर असर पर पड़ता है और व्यक्ति दूसरे काम नहीं कर पाता है.
  • व्यक्ति को अगर बेहतर महिला का साथ मिले तो वो कठिन से कठिन पड़ाव को भी पार कर जाता है. पत्नि अच्छी हो तो वो आसानी से सफलता को प्राप्त कर लेता है. वहीं जीवन संगीनी अगर द्वेष पालने वाली हो तो दिक्कत बढ़ जाती है. ऐसे व्यक्ति हमेशा अंदर ही अंदर कुंठित रहते हैं और कुछ भी नहीं कर पाते.
  • संतान अगर मूर्ख हो तो मां-बाप के लिए सबसे बड़ा संकट उसके साथ रहना होता है. चाणक्य कहते हैं कि ऐसी संतान को त्याग देना चाहिए. मूर्ख संतान हमेशा परेशानी उत्पन्न करता है.
  • चाणक्य कहते हैं कि विधवा बेटी के पिता का जीवन सबसे कठिन माना जाता है. ऐसा पिता हमेशा दुखी रहता है.

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