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सीता का अपहरण नहीं बल्कि इन छह श्रापों की वजह से हुआ रावण का अंत, वंश का भी हो गया नाश

कई वरदानों की वजह से रावण ने अपनी आयु एक हजार साल से अधिक कर ली थी और मौत भी उसका आसानी से कुछ नहीं बिगाड़ सकती थी. एक तरह रावण अमरता हासिल कर चुका था लेकिन उसने इतने पाप किए थे जिसकी वजह से कई लोगों ने उसे श्राप दिया. हालांकि उसे सजा देना आम इंसान के बस की बात नहीं थी. यही वजह है कि रावण के अंत के लिए भगवान विष्णु को खुद राम के रूप में धरती पर जन्म लेना पड़ा.

इन छह श्रापों की वजह से हुआ रावण का अंत इन छह श्रापों की वजह से हुआ रावण का अंत
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

रामायण भगवान श्री राम की कहानी है लेकिन अगर इसमें रावण का उल्लेख ना हो तो ये कहानी अधूरी है. राम ने अपनी पत्नी सीता के अपहरण के बाद युद्ध में रावण का अंत कर दिया था. रावण के अंत के साथ ही रामायण का महाकाव्य समाप्त हो जाता है लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि केवल सीता के अपहरण की वजह से ही रावण का अंत नहीं हुआ था. बल्कि इसके पीछे उस पर लगे छह श्राप भी थे.

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ढेरों तप-तपस्याएं और वरदानों की वजह से रावण ने अपनी आयु एक हजार साल से अधिक कर ली थी और मौत भी उसका आसानी से कुछ नहीं बिगाड़ सकती थी. एक तरह रावण अमरता हासिल कर चुका था लेकिन उसने इतने पाप किए थे जिसकी वजह से कई लोगों ने उसे श्राप दिया. हालांकि उसे सजा देना आम इंसान के बस की बात नहीं थी. यही वजह है कि रावण के अत्याचार से धरती के लोगों को बचाने के लिए भगवान विष्णु को खुद राम के रूप में जन्म लेना पड़ा.

लंका के राजा रावण को उसके जीवनकाल में इतने श्राप मिले जिसकी वजह से ना केवल उसकी मृत्यु हुई बल्कि उसके वंशज का भी नामोनिशान मिट गया. आइए जानते हैं उसे किसने और क्यों श्राप दिया.

रघुवंशी अनारनय का श्राप 
रघुवंश वंश में एक प्रतापी राजा था जिसे अनारनय के नाम से जाना जाता था. रावण पूरे विश्व को जीतना चाहता था जिसकी शुरुआत करने पर सबसे पहले उसका युद्ध राजा अनारनय से हुआ. उनके बीच लंबे वक्त तक भयंकर युद्ध चला. हालांकि राजा अनारनय ने इस युद्ध में अपनी जान गंवा दी लेकिन उन्होंने मरने से पहले रावण को श्राप दिया कि उसका अंत अनारनय के वंश में जन्म लेने वाले एक व्यक्ति द्वारा किया जाएगा. इसके बाद भगवान राम का अनारनय वंश में जन्म हुआ और उन्होंने रावण का वध किया.

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नंदी का श्राप
एक बार रावण भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत गया. रावण भगवान शिव का परम भक्त था. लेकिन कैलाश में वो शिव के रक्षक नंदी बैल का उपहास करने लगा. नंदी कोई सामान्य बैल नहीं था बल्कि उसके पास कई शक्तियां थीं. इसके बाद नंदी ने क्रोध में आकर रावण को श्राप दिया कि रावण की मृत्यु का कारण एक वानर बनेगा और उसकी लंका का सर्वनाश करेगा जो बात बिलकुल सच हुई. वानर रूप में भगवान हनुमान ने लंका में आग लगा दी और उन्होंने रावण के खिलाफ युद्ध लड़ने में भगवान राम की सहायता की.

विष्णु की पूजा कर रही महिला ने दिया श्राप
एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से यात्रा कर रहा था, तब रास्ते में उसने एक सुंदर महिला को भगवान विष्णु की पूजा करते हुए देखा. वो महिला भगवान विष्णु से विवाह करने के लिए तपस्या कर रही थी लेकिन रावण उसकी सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गया और उसने उस स्त्री के बाल पकड़कर उसे अपने साथ लंका ले जाने लगा. उस स्त्री ने उसी जगह अपने प्राणों की आहुति दे दी और रावण को श्राप दिया कि उसका अंत एक महिला की वजह से होगा. हम सभी को पता है कि रावण की मौत भी सीता की वजह से हुई थी.

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स्वर्ग की अप्सरा रंभा का श्राप 
रावण को उसकी बहू रंभा ने श्राप दिया था. रंभा स्वर्ग की एक अप्सरा थी. ऐसा कहा जाता है कि रावण की मुलाकात रंभा से स्वर्ग की यात्रा के दौरान हुई थी. वह उसकी ओर आकर्षित हुआ और उसे हासिल करने के लिए रावण ने उसे पकड़ लिया. रंभा ने रावण को चेताया कि वह उसे ना छुए क्योंकि वो उसके बड़े भाई कुबेर के पुत्र नलकुबेर की पत्नी बनने जा रही है. रावण को उसे अपनी बहू के रूप में देखना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए लेकिन वो रावण ठहरा, किसी की बात मानना उसके अहंकार को चोट पहुंचाता इसलिए रंभा की चेतावनी के बावजूद रावण ने उसकी बात नहीं मानी. जब नलकुबेर को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने क्रोधित होकर रावण को श्राप दे दिया कि अगर उसने कभी किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध छूने की कोशिश की तो उसका सिर 100 टुकड़ों में कट जाएगा.

रावण को उसकी प्यारी बहन शूर्पनखा ने भी दिया था श्राप

शूर्पनखा के पति विद्युतजिन थे जो कालके राजा की सेना में सेनापति थे. रावण पूरे विश्व को जीतना चाहता था और अपनी इस ख्वाहिश के लिए उसने कालके राजा के साथ भी युद्ध किया जिस दौरान विद्युतजिन की मौत हो गई. शूर्पनखा ने इस युद्ध में अपने पति को खो दिया जिसके बाद उसने अपने भाई रावण को श्राप दिया कि वो खुद एक दिन रावण की मृत्यु का कारण बनेगी. आगे चलकर वनवास के दौरान शूर्पनखा ने भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण के सामने शादी का प्रस्ताव रखा लेकिन लक्ष्मण ने इनकार कर दिया जिस पर शूर्पनखा ने लक्ष्मण को सीता को मारने की धमकी दी. इस धमकी को सुन लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काट दी. इसके बाद वो क्रोधित होकर रावण के पास गई तब रावण ने अपनी बहन को आश्वासन दिया कि वो उसके इस अपमान का बदला लेकर रहेगा. रावण ने उसके बाद सीता का अपहरण किया. ऐसा माना जाता है कि शूर्पणखा ने रावण से अपने पति के वध का बदला लेने के लिए ये सब किया था हालांकि इसके कोई साक्ष्य नहीं मिलते हैं.

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परिवार की एक स्त्री ने भी दिया श्राप
ये सच है कि रावण की वासना और अहंकार ने ही उसके जीवन का अंत किया. यहां तक कि उसने अपनी पत्नी मंदोदरी की बड़ी बहन माया को भी नहीं बख्शा. माया के पति शंभर वैजयंतपुर के राजा थे. एक दिन रावण शम्भर से मिलने गया. वहां रावण ने माया को अपने जाल में फंसा लिया और जब शंभर को इस बात का पता चला तो उसने रावण को कैद कर लिया. उसी समय, राजा दशरथ ने रावण पर हमला किया और परिणामस्वरूप युद्ध में शम्भर की मृत्यु हो गई. जब माया ने अपने पति की मृत्यु के बाद खुद को मारने का फैसला किया तो रावण ने उसे अपने साथ आने के लिए कहा. माया ने क्रोध में रावण को श्राप देते हुए कहा कि तुम्हारी वासना की वजह से मेरे पति की मृत्यु हो गई, तुम्हारा अंत भी इसी वजह से होगा.

 

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