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Gangotri Yatra 2024: 10 मई को अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे गंगोत्री धाम के कपाट, चैत्र नवरात्रि में घोषित हुआ शुभ मुहूर्त

Gangotri Yatra 2024: श्री गंगोत्री धाम के कपाट 10 मई को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोले जाएंगे. इस दिन गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में 12 बजकर 25 मिनट पर खोले जाएंगे. श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति के कार्यालय में मंगलवार को कपाटोद्घान का यह मुहूर्त निकाला गया है.

10 मई अक्षय तृतीया को दोपहर को खुलेंगे गंगोत्री धाम के कपाट 10 मई अक्षय तृतीया को दोपहर को खुलेंगे गंगोत्री धाम के कपाट
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

Gangotri Yatra 2024: उत्तरकाशी जिला स्थित श्री गंगोत्री धाम के कपाट 10 मई को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोले जाएंगे. इस : दिन गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में 12 बजकर 25 मिनट पर खोले जाएंगे. श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति के कार्यालय में मंगलवार को कपाटोद्घान का यह मुहूर्त निकाला गया है. प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. इस बार भी यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए पंजीकरण करना अनिवार्य रहेगा.

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उल्लेखनीय है कि इस साल श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार, 12 मई को सुबह 6 बजे खोले जाएंगे. वहीं, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 10 मई को सुबह 7 बजे खुलेंगे. वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भी 10 मई को खोले जाएंगे. अभी यमुनोत्री मंदिर समिति द्वारा कपाट खुलने का समय तय किया जाना है.

पंच केदार में प्रतिष्ठित द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी के कपाट खुलने की तिथि और तृतीय केदार श्री तुंगनाथ जी के कपाट खुलने की तिथि शनिवार, 13 अप्रैल बैशाखी के शुभ अवसर पर तय की जाएगी.

गंगोत्री धाम का महत्‍व
धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार गंगोत्री धाम वही स्‍थान है, जहां धरती पर मां गंगा अवतरित हुई थीं. यहां मां गंगा का पवित्र मंदिर है. यहां मौजूद एक शिला को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है. गंगा में पानी का स्‍तर नीचे जाता है तभी इसके दर्शन होते हैं. इस जगह का भगवान राम से भी नाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम के पूर्वज राजा भागीरथ ने यहीं पर भगवान शिव की तपस्या की थी.

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यमुनोत्री धाम का महत्व
यमुनोत्री में यमुना देवी का मंदिर है. इसके आसपास गर्म पानी के कई स्‍त्रोत हैं, जो कई कुंडों में गिरते हैं. जो लोग यहां आते हैं, वे यहां के गर्म पानी के कुंड में भोजन पकाते हैं और उसे देवी को चढ़ाते हैं. सबसे ज्‍यादा प्रसिद्ध सूर्य कुंड है, जहां का पानी काफी गर्म रहता है. इस कुंड के पास दिव्य शाला नाम से एक शिला है, लोग माता की पूजा से पहले इसकी पूजा करते हैं.

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