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भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म? ये है इसके पीछे का विशेष कारण

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष महिमा है. साथ ही, भगवान सावन की शिवरात्रि पर भी भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है. शास्त्रों में शिवजी के स्वरूप के संबंध कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं. जैसे, शिवजी की पूजा में भस्म का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है. लेकिन क्यों, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं.

सावन शिवरात्रि 2023 सावन शिवरात्रि 2023
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 7:22 AM IST

Sawan Shivratri 2023: शिवरात्रि भगवान शिव के सबसे प्रिय पर्वों में से एक माना जाता है और सावन में आने वाली शिवरात्रि बेहद खास मानी जाती है. शिवरात्रि वाले दिन सभी भक्त शिवलिंग पर राख, बेलपत्र और भांग अर्पित करते हैं. भगवान शिव को जो बात सबसे अलग करती है वह यह है कि उन्हें दैवीय आभूषण और वस्त्र नहीं बल्कि राख यानी 'भस्म' पसंद है. भगवान शिव अपने शरीर पर केवल भस्म लगाते हैं और भस्म ही उनका आभूषण है. लेकिन, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं. आइए जानते हैं इसका कारण. 

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भगवान शिव के शरीर पर भस्न लगाने का कारण

भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाकर रखते हैं. इसलिए, शिवजी के भक्त उस राख का प्रयोग तिलक के रूप में करते हैं. शिव पुराण में इस बात का जिक्र है कि भगवान शिव शरीर पर राख का प्रयोग क्यों करते हैं. 

एक कथा प्रचलित है कि जब सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था, उस वक्त महादेव उनका शव लेकर धरती से आकाश तक हर जगह घूमे थे. विष्णु जी से उनकी यह दशा देखी नहीं गई और उन्होंने माता सति के शव को छूकर भस्म में तब्दील कर दिया. अपने हाथों में भस्म देखकर शिव जी और परेशान हो गए और सति की याद में वो राख अपने शरीर पर लगा ली.

धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर वास करते थे. वहां बहुत ठंड होती थी. ऐसे में खुद को सर्दी से बचाने के लिए वह शरीर पर भस्म लगाते थे. आज भी बेल, मदार के फूल और दूध चढ़ाने के अलावा लगभग हर शिव मंदिर में भस्म आरती होती है. 

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दूसरी कथा

एक कथा और प्रचलित है, जिसका जिक्र शिव पुराण में भी है. कथा के अनुसार, एक साधु था जो बहुत तपस्या करके शक्तिशाली बन गया था. वह केवल फल और हरी पत्तियां खाता था, इसलिए उसका नाम 'प्राणाद' पड़ा. उस साधु ने अपनी तपस्या से जंगल के सभी जानवरों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था. एक बार साधु अपनी कुटिया की मरम्मत के लिए लकड़ी काट रहा था तभी उसकी उंगली कट गई. साधु ने देखा कि उंगली से खून की जगह पौधे का रस निकल रहा है.

साधु को लगा कि वह इतना पवित्र हो गया है कि उसका शरीर खून से नहीं बल्कि पौधों के रस से भर गया है. इससे वह बहुत खुश हुआ और गर्व से भर गया. इस घटना के बाद साधु खुद को दुनिया का सबसे पवित्र व्यक्ति मानने लगा. जब भगवान शिव ने यह देखा तो उन्होंने एक बूढ़े व्यक्ति का रूप धारण किया और वहां पहुंच गए. बूढ़े व्यक्ति के वेश में भगवान शिव ने साधु से पूछा 'वह इतना खुश क्यों हैं?' साधु ने कारण बताया. सब कुछ जानकर भगवान ने उनसे पूछा कि यह तो पेड़-पौधों और फलों का रस ही है, लेकिन जब पेड़-पौधे जल जाते हैं तो वे भी राख बन जाते हैं. अंत में राख ही शेष रह जाती है.

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भगवान शिव ने एक बूढ़े व्यक्ति का रूप धारण करके तुरंत अपनी उंगली काटकर दिखाई तो उसमें से राख निकली. भिक्षु को एहसास हुआ कि भगवान स्वयं उसके सामने खड़े हैं. साधु ने अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा मांगी. ऐसा कहा जाता है कि तभी से भगवान शिव ने अपने शरीर पर भस्म लगाना शुरू कर दिया ताकि उनके भक्तों को यह बात हमेशा याद रहे. शारीरिक सुंदरता पर अहंकार न करें, परम सत्य को हमेशा याद रखें.
 

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