
Shardiye Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. मां कालरात्रि तीन नेत्रधारी हैं. मां कालरात्रि के गले में विद्युत् की अद्भुत माला है. इनके हाथों में खड्ग और कांटा है. इनका स्वरूप भले ही कितना भी भयंकर क्यों न हो, पर ये सदैव अपने भक्तों का कल्याण करती हैं. इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है.
ज्योतिषविदों के के अनुसार, इस साल सप्तमी और अष्टमी एक ही दिन 10 अक्टूबर को पड़ रही हैं. लेकिन शास्त्रों में सप्तमी युक्त अष्टमी को निषेध माना गया है. इसलिए अष्टमी पर महागौरी की पूजा और कन्या पूजन दोनों शुक्रवार, 11 अक्टूबर को ही किए जाएंगे. इसी दिन महानवमी का भी कन्या पूजन होगा.
क्यों लाभकारी है मां कालरात्रि की पूजा?
शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करने के लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है. इनकी उपासना से भय, दुर्घटना और रोगों का नाश होता है. इनकी उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का (तंत्र-मंत्र) असर नहीं होता है. ज्योतिष में शनि नामक ग्रह को नियंत्रित करने के लिए इनकी पूजा करना अदभुत परिणाम देता है.
क्या है मां कालरात्रि की पूजन विधि?
मां के समक्ष घी का दीपक जलाएं. मां कालरात्रि को लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. साथ ही गुड़ का भोग लगाएं. मां के मंत्रों का जाप करें. या सप्तशती का पाठ करें. लगाएं गए गुड़ का आधा हिस्सा परिवार में बाटें. बाकी आधा गुड़ किसी ब्राह्मण को दान कर दें. काले रंग के वस्त्र धारण करके या किसी को नुकसान पंहुचाने के उद्देश्य से पूजा न करें
मां कालरात्रि की पूजा से कैसे शांत होंगे शत्रु?
श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके रात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करें. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं. इसके बाद 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक एक लौंग चढ़ाते जाएं. नवार्ण मंत्र है- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे". उन 108 लौंग को इकठ्ठा करके अग्नि में डाल दें. आपके विरोधी और शत्रु शांत होंगे
उपाय
नवरात्रि में किसी भी रात्रि को मां लक्ष्मी की पूजा करें. उन्हें गुलाब का फूल अर्पित करें और दीपक जलाएं. इसके बाद सोलह बार श्री सूक्तम का पाठ करें. आपकी धन सम्बन्धी समस्याएं दूर हो जाएंगी.