इस्तांबुल के हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदलने के फैसले की कई देशों में आलोचना की जा रही है. पोप फ्रांसिस ने भी तुर्की सरकार के इस फैसले पर निराशा जताई है. पोप का कहना है कि वो सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदलने के फैसले से बहुत दुखी हैं.
सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपनी साप्ताहिक प्रार्थना सभा के दौरान पोप ने कहा, 'मेरा ध्यान इस्तांबुल की तरफ जा रहा है. सेंट सोफिया के बारे में सोचकर मुझे बहुत दुख होता है.' दरअसल, ये म्यूजियम मूल रूप से एक चर्च था, उस्मानिया सल्तनत के दौरान इस चर्च को मस्जिद में बदला गया. फिर 1930 के दशक में तुर्की में मस्जिद को फिर से म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया था.
तुर्की के राष्ट्रपति तैयब एर्दोगन का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद इस प्राचीन स्मारक को एक बार फिर मस्जिद मे तब्दील कर दिया गया है और यहां पहली नमाज 24 जुलाई को पढ़ी जाएगी.
वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज ने एर्दोगन से म्यूजियम को मस्जिद में बदलने का फैसला वापस लेने की मांग की है. वहीं वर्ल्ड आर्थोडॉक्स क्रिश्चियन के इस्तांबुल के धार्मिक नेता पैट्रिआर्क बार्थोलोम्यू ने इसे निराशाजनक बताया है.
राष्ट्रपति तैयब एर्दोगन ने कहा कि लगभग 1500 साल पुराना हागिया सोफिया, जो कभी चर्च था, वो अब मुस्लिमों, ईसाईयों और विदेशी लोगों के लिए खुला रहेगा.
एर्दोगन ने कहा कि तुर्की ने अपने संप्रभुता के अधिकार के तहत इसे मस्जिद में बदला है और इस कदम की आलोचना को हमारे संप्रभुता पर हमले के रूप में देखा जाएगा.
ग्रीस ने भी तुर्की सरकार के इस कदम की आलोचना की है. वहीं UNESCO ने कहा कि उसकी विश्व धरोहर समिति हागिया सोफिया की स्थिति की समीक्षा करेगी.
तुर्की सरकार के इस फैसले से इसके महत्वपूर्ण वैश्विक सीमाओं और धरोहरों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं.