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कुंडली में कौन से ग्रह मां के कष्टों के लिए जिम्मेदार? ये उपाय करने से मिलेगा लाभ

इस सृष्टि में सबसे ज्यादा पवित्र और करुणामयी सत्ता मां ही है. इसलिए भक्त भी ईश्वर को मां के रूप में पुकारते हैं. ऐसा करने से उन्हें ईश्वर की निकटता का जल्द अनुभव होता है और मां रूपी ईश्वर का लगातार दुलार मिलता रहता है.

इस सृष्टि में सबसे ज्यादा पवित्र और करुणामयी सत्ता मां ही है. इसलिए भक्त भी ईश्वर को मां के रूप में पुकारते हैं. ऐसा करने से उन्हें ईश्वर की निकटता का जल्द अनुभव होता है और मां रूपी ईश्वर का लगातार दुलार मिलता रहता है. इस सृष्टि में सबसे ज्यादा पवित्र और करुणामयी सत्ता मां ही है. इसलिए भक्त भी ईश्वर को मां के रूप में पुकारते हैं. ऐसा करने से उन्हें ईश्वर की निकटता का जल्द अनुभव होता है और मां रूपी ईश्वर का लगातार दुलार मिलता रहता है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2021,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

मानव जीवन का सृजन करने के लिए ईश्वर ने नारी का निर्माण किया है. जब नारी अपनी शक्ति का प्रयोग करके जीवन का सृजन करती है तो उसे मां कहा जाता है. इस सृष्टि में सबसे ज्यादा पवित्र और करुणामयी सत्ता मां ही है. इसलिए भक्त भी ईश्वर को मां के रूप में पुकारते हैं. ऐसा करने से उन्हें ईश्वर की निकटता का जल्द अनुभव होता है और मां रूपी ईश्वर का लगातार दुलार मिलता रहता है.

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मां का संबंध किन ग्रहों और राशियों से?
ज्योतिष में चन्द्रमा को मां का कारक मानते हैं. कुछ अंशों में शुक्र का संबंध भी वात्सल्य से होता है. कर्क राशि और चतुर्थ भाव का संबंध भी मां से होता है. चतुर्थ भाव के स्वामी ग्रह और चन्द्रमा को मिलाकर मां की स्थिति देख सकते हैं. वैसे चन्द्रमा से काफी हद तक मां की स्थिति जान सकते हैं.

मां का सम्मान न करने का क्या है परिणाम?
व्यक्ति को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. किसी न किसी कारण से जीवन में उलझन बानी रहती है. व्यक्ति को मानसिक रोग या अवसाद होने की  होती है. यात्राओं में व्यक्ति को समस्या होती है. व्यक्ति को जीवन में कभी भी स्थिरता नहीं मिलती है.

मां का सम्मान करने से क्या होता है लाभ?
चन्द्रमा सरलता से मजबूत हो जाता है. व्यक्ति की बीमारियों में शीघ्र लाभ होता है. व्यक्ति का मन प्रसन्न रहता है. जीवन सामान्यतः आराम से कट जाता है. संतान पक्ष की हर समस्या का हल निकल जाता है.

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चन्द्रमा की वजह से मां को कष्ट हो तो...
सोमवार के दिन सफेद वस्त्रों में शिव जी की पूजा करें. जहां तक हो सके इस दिन अधिक से अधिक "नमः शिवाय"का जप करें. सोमवार को ही निर्धनों में सफेद मिठाई या खीर बांटें. मोती सोच समझकर ही पहनें.

 

 

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