
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर चीजों के सही रख-रखाव के नियम बताए गए हैं. लेकिन इसमें भी घर के अलग-अलग हिस्सों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है. हर स्थान किसी न किसी ग्रह से संबंध रखता है, जिसको बेहतर करके हम कुंडली में ग्रहों की स्थिति को मजबूत बना सकते हैं. आइए जानते हैं कि घर के प्रत्येक स्थान को लेकर वास्तु शास्त्र में क्या कहा गया है.
घर का मुख्य द्वार
घर के मुख्य द्वार से घर में खुशियां भी आती हैं और समस्याएं भी. इसे दुरुस्त करके ही घर में खुशियां लाई जा सकती हैं. इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें. यहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें. एक नेम प्लेट भी लगाएं, जो काले रंग की न हो. मुख्य द्वार पर शनिवार को दीपक जलाना विशेष शुभ होता है.
ड्रॉइंग रूम
इस स्थान से घर में आनंद और रिश्ते देखे जाते हैं. इसे दुरुस्त करके जीवन के अवसाद और तनाव को दूर किया जा सकता है. इस स्थान को हमेशा प्रकाशित रखें. यहां हल्की सुगंध की व्यवस्था भी करें. इस स्थान पर ढेर सारे फूल या फूलों के चित्र लगाएं. बेहतर होगा कि यहां पर जूते चप्पल न रखे जाएं.
घर की रसोई
इस स्थान से घर के लोगों का स्वास्थ्य देखा जाता है. रसोई घर में सूर्य का प्रकाश आये तो बहुत उत्तम होगा. रसोई घर में चीजों को व्यवस्थित रखें. इस स्थान पर हर व्यक्ति को प्रवेश न करने दें. साथ ही रसोई घर में पूजा के बाद धूपबत्ती जरूर दिखाएं.
शयन कक्ष
इस स्थान से सुख और समृद्धि देखी जाती है. शयनकक्ष का रंग हल्का रखें. हल्का हरा या गुलाबी रंग सर्वोत्तम होगा. शयनकक्ष में टेलीविजन न लगाएं. हल्के संगीत की व्यवस्था कर सकते हैं. जहां तक हो सके इस स्थान पर खाना खाने से भी बचें. शयनकक्ष में सूर्य के प्रकाश और हवा की व्यवस्था हो तो बहुत उत्तम होगा.
बाथरूम
इस स्थान से जीवन की समस्याएं नियंत्रित होती हैं. बाथरूम को हमेशा साफ रखें. इस स्थान पर पानी की बर्बादी न करें. बाथरूम में नीले या बैंगनी रंग का प्रयोग अत्यंत लाभकारी होता है. बाथरूम में हल्की सुगंध आती रहे तो काफी अच्छा होगा.
सीढ़ियां
सीढ़ियां किसी भी घर की उन्नति से संबंघ रखती हैं. यह जीवन के उतार-चढ़ाव से संबंध रखती हैं. कुल मिलाकर सीढ़ियों का सम्बन्ध राहु केतु से होता है. गलत सीढ़ियां जीवन में आकस्मिक समस्याएं पैदा कर देती हैं. नैऋत्य कोण में सीढ़ियां सबसे उत्तम मानी जाती हैं. सीढ़ियों का निर्माण उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए या पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. सीढ़ियां जितनी कम घुमावदार होंगी उतना ही अच्छा होगा.