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इस गुरुद्वारे में हलवे का नहीं, मिलता है चने का प्रसाद...

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली 'पटना साहिब' के बारे में आपने कई बातें सुनी होंगी. पर क्या आपको ये पता है कि गुरुगोविंद सिंह के इस गुरुद्वारे में हलवे की जगह चने का प्रसाद क्यों चढ़ता है. आप भी जानिये...

पटना साहिब पटना साहिब
मेधा चावला/IANS
  • पटना,
  • 04 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना में 350वें प्रकाशोत्सव को लेकर तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के दर्शन के लिए देश-विदेश से लोगों के आने का सिलसिला जारी है.

श्रद्धालुओं के लिए यह गुरुद्वारा गुरुगोविंद सिंह की बाल लीलाओं का प्रतीक है. मान्यता है कि गुरु यहीं अपनी बाल लीलाएं किया करते थे. यहां आज भी संगतों को प्रसाद के रूप में घुघनी (चने की सब्जी) दी जाती है.

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श्री हरमंदिर जी पटना साहिब का कोना-कोना प्रकाशोत्सव को लेकर बढ़िया ढंग से सजाया गया है. गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म इस जगह 1666 ईस्वी में हुआ था. तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब से थोड़ी दूर हरिमंदिर गली में स्थित बाललीला साहिब (मैनी संगत) गुरुद्वारा है.

बाललीला गुरुद्वारा के प्रधान संत बाबा कश्मीर सिंह भूरीवाले ने बताया कि बचपन में गुरु महाराज ने यहां चमत्कार किया था. फतह चंद मैनी बड़े जमींदार थे, उनको राजा का खिताब मिला था. उनकी पत्नी विश्वंभरा देवी को कोई संतान नहीं थी. गोविंद राय (गुरु गोविंद सिंह के बचपन का नाम) साथियों के साथ यहां खेलने आते थे.

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रानी विश्वंभरा देवी गोविंद राय जैसे बालक की कामना कर रोज प्रभु से प्रार्थना करती थी. इसी दौरान एक दिन गोविंद राय रानी की गोद में बैठ गए और उन्हें मां कहकर पुकारा. रानी खुश हुई और उन्हें धर्मपुत्र स्वीकार कर लिया.

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बाल गोविंद ने रानी से कहा, 'बहुत जोर से भूख लगी है, कुछ खाने को दो.' रानी के घर में उस समय चने की घुघनी के अलावा कुछ नहीं था. रानी ने गोविंद को वही खाने को दे दिया, जिसे गोविंद ने स्वयं खाया और दोस्तों को भी खिलाया.

गुरु गोविंद सिंह जन्मदिवस

बाललीला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव सरदार राजा सिंह ने बताया कि तभी से यहां संगतों को प्रसाद के रूप में चने की घुघनी दी जाती है.

बाद में हालांकि विश्वंभरा रानी को चार पुत्र हुए. यहीं बालक गोविंद बाग में खेलते थे. इसी कारण इस स्थान पर बाललीला गुरुद्वारा बना.

सिंह ने बताया कि गुरुपर्व की तैयारी यहां पूरी कर ली गई है. संगतों के ठहरने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाललीला गुरुद्वारे में नवनिर्मित 81 कमरोंवाला राजा फतहचंद मैनी यात्री निवास मंगलवार को संगत को समर्पित कर चुके हैं. पटना में प्रकाश उत्सव को लेकर तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. पटना के सभी गुरुद्वारों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है.

प्रकाश उत्सव का मुख्य आयोजन पांच जनवरी को ऐतिहासिक गांधी मैदान में होना है, जहां अस्थायी गुरुद्वारा बनाया गया है. पांच जनवरी को यहीं दीवान सजेगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग लेंगे.

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सिख श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र 'कंगन घाट'

पटना आने वाले श्रद्धालुओं का जत्था गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब में मत्था टेकने के बाद गंगा तट 'कंगन घाट' जाना नहीं भूलते. मान्यता है कि गुरु गोविंद सिंह जी का एक कंगन बचपन में यहां खेलते समय गुम हो गया था. यह घाट सिख संप्रदाय की श्रद्धा से जुड़ा हुआ है. तख्त हरमंदिर साहिब के रागी कविन्दर सिंह बताते हैं 'गुरु जी महाराज बचपन में एक दिन कंगन घाट पर खेलने आए थे, तभी उनका एक कंगन गुम हो गया. जब उनकी मां ने उनके कंगन के विषय में पूछा, तब उसने दूसरे हाथ का कंगन भी फेंक दिया. कहा जाता है कि इसके बाद जो भी व्यक्ति गंगा नदी में कंगन ढूंढ़ने गया, उसे ही कंगन मिलता रहा. इस घटना में गुरु जी के चमत्कार सामने आने के बाद इस घाट का नाम 'कंगन घाट' पड़ गया.

कंगनघाट की एक विशेषता यह भी है कि यहां पर तीन जिलों की सीमाएं मिलती हैं. घाट का कुछ हिस्सा पटना, कुछ वैशाली और कुछ सारण जिले के अंतर्गत आता है. घाट के निर्माण और सुंदरीकरण कार्य के पहले तीनों जिलों के जिलाधिकारियों से सहमति ली गई थी.


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