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Chitragupta Puja 2020: भाई दूज पर क्यों होती है चित्रगुप्त की पूजा? जानें विधि और शुभ मुहूर्त

पुराणों के मुताबिक, चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर न्याय करते थे. व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह दिन नए साल की शुरुआत जैसा है. इस दिन नए बहियों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है.

भाई दूज पर क्यों होती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा? जानें विधि और शुभ मुहूर्त भाई दूज पर क्यों होती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा? जानें विधि और शुभ मुहूर्त
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:18 AM IST
  • पाप-पुण्य का लेखा-जोखा तैयार करते थे चित्रगुप्त
  • इस दिन नए बहियों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है

भाई दूज (Bhai Dooj 2020) के शुभ अवसर के साथ ही आज चित्रगुप्त (Chitragupta puja 2020) भगवान की भी पूजा की जाएगी. चित्रगुप्त हिंदुओं के प्रमुख देवता माने जाते हैं. पुराणों के मुताबिक, चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर न्याय करते थे. व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह दिन नए साल की शुरुआत जैसा है. इस दिन नए बहीखातों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है.

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हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अगर चचेरी, ममेरी, फुफेरी या कोई भी बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी आयु बढ़ती है. साथ ही जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं.

कौन हैं चित्रगुप्त महाराज और क्या है इनकी महिमा?
चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था. इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है. मुख्य रूप से इनकी पूजा भाई दूज के दिन होती है. इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है.

कैसे करें चित्रगुप्त की पूजा?
पूजा स्थान को साफ कर के एक कपड़ा बिछा कर वहां चित्रगुप्त जी की फोटो रखें. दीपक जला कर गणेश जी को चन्दन, रोली, हल्दी, अक्षत लगा कर पूजा करें. चित्रगुप्त जी को भी चन्दन, रोली, हल्दी, अक्षत लगा कर पूजा करें. इसके बाद फल, मिठाई, पान सुपारी और दूध, घी, अदरक, गुड़ और गंगाजल से बने पंचामृत का भोग लगाएं.

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अब परिवार के सभी सदस्य अपनी किताब, कलम की पूजा कर चित्रगुप्त जी के सामने रख दें. इसके बाद एक सफेद कागज पर स्वस्तिक बना कर उस पर अपनी आय और व्यय का विवरण देकर उसे चित्रगुप्त जी को अर्पित कर पूजन करें.

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त
16 नवंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 45 मिनट से दोपहर 02 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से दोपहर 02 बजकर 36 मिनट तक है. आप इनमें से किसी भी समय चित्रगुप्त महाराज की पूजा कर सकते हैं.

 

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