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Karwa Chauth 2024: करवा चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है. ये व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. करवा चौथ में पूजन सामग्री के रूप में छन्नी, करवा और दीपक का खासतौर से इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आपको पता है कि पति-पत्नी के आपसी समर्पण से जुड़े करवा चौथ पर ये प्रतीकात्मक पूजन सामग्री क्यों महत्वपूर्ण मानी गई हैं. इनके धार्मिक और पारंपरिक के साथ वैज्ञानिक रूप में क्या मायने हैं.
मिट्टी का करवा क्यों है खास?
शास्त्रों के अनुसार, मिट्टी का करवा पंच तत्व का प्रतीक माना गया है, मिट्टी को पानी में गलाकर करवा बनाते हैं. जो भूमि तत्व और जल तत्व का प्रतीक है. फिर उसे धूप और हवा में सुखाया जाता है, जो आकाश तत्व और वायु तत्व के प्रतीक हैं. फिर आग में तपाकर करवा तैयार किया जाता है.
चूंकि भारतीय संस्कृति में पानी परब्रह्म माना गया है और जल ही सब जीवों की उत्पत्ति का केंद्र है, ऐसे में मिट्टी के करवे से पानी पिलाकर पति-पत्नी अपने रिश्ते में पंचतत्व और परमात्मा दोनों को साक्षी बनाकर अपने दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने की कामना करते हैं.
करवा चौथ पर छन्नी का प्रयोग
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, करवा चौथ को लेकर मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे नहीं देखी जाती हैं. उसके बीच किसी पात्र या छन्नी के जरिए देखने की परंपरा है. क्योंकि चंद्रमा की किरणें अपनी कलाओं में विशेष प्रभावी रहती हैं, जो लोक परंपरा में चंद्रमा के साथ पति-पत्नी के संबंध को खुशियों से भर देती हैं. चंद्र दर्शन के बाद तुरंत उसी छन्नी से पति का मुख देखा जाता है.
करवा चौथ में दीपक का महत्व
दीये की रोशनी का करवा चौथ में विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, धरती पर सूर्य का बदला रूप अग्नि माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि अग्नि को साक्षी मानकर की गई पूजा सफल होती है. वहीं प्रकाश या रोशनी ज्ञान का प्रतीक भी कहे जाते हैं. ज्ञान मिलने से अज्ञानता दूर होती है. ऐसे में रोशनी का प्रतीक दीया भी नकारात्मक ऊर्जा दूर भगाता है. इसलिए करवा चौथ पर दीपक के प्रयोग को शुभ माना गया है.