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Pitru Paksh: पितृपक्ष में करें इन पांच वस्तुओं का प्रयोग, होगी पितरों की कृपा

पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा पाठ किए जाते हैं. कहा जाता है कि इन दिनों दान करने और ब्राम्हण को भोजन कराने से पूर्वजों की कृपा बनी रहती है. पितृपक्ष में पितरों के आशीर्वाद के लिए पांच वस्तुओं का प्रयोग बहुत शुभ माना जाता है.

पितृपक्ष में दान करना बहुत शुभ माना जाता है पितृपक्ष में दान करना बहुत शुभ माना जाता है
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST
  • पितृपक्ष में पाएं पितरों का आशीर्वाद
  • पितृपक्ष में दान का खास महत्व
  • पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा

पितृपक्ष में पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है. माना जाता है कि इन दिनों हमारे पितर धरती पर आकर हमें अपना आशीर्वाद देते हैं. पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं ताकि हम पर पूर्वजों की कृपा बनी रहे. कहा जाता है कि इन दिनों श्राद्ध कर्म से मनुष्य की आयु बढ़ती है और पितरगण वंश विस्तार का आशीर्वाद देते हैं. पितृपक्ष में पांच वस्तुओं का प्रयोग बहुत शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं इनके बारे में.

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जल- मानव के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण मूर्त चीज़ जल है. बिना जल के ना तो जीवन और ना ही किसी प्रकार के अनुष्ठान की कल्पना की जा सकती है. जल में खड़े होकर ,अंजुली में जल लेकर पितरों को जल देना सर्वोत्तम होता है.  पितृपक्ष में सूर्योदय के पूर्व पीपल में जल डालने से पितरों को शांति प्राप्त होती है. पितृपक्ष में अगर जल की बर्बादी की जाय तो पितृ पूजा स्वीकार नहीं करते हैं.

अग्नि- सृष्टि में सबसे पवित्र तत्व अग्नि को माना जाता है. अग्नि की पवित्रता इतनी ज्यादा है कि किसी भी कार्य को सुदृढ़ करने के लिए और शपथ लेने के लिए अग्नि का ही प्रयोग होता है. ऐसा माना जाता है कि अग्नि में दी हुई आहुति सीधी देवताओं तक पहुंचती है. पितरों के श्राद्ध में सम्पूर्ण भोजन की सबसे पहली आहुति अग्नि में ही दी जाती है. नियमित रूप से अग्नि में सुगंध की पांच आहुति देने से पितरों को और स्वयं को शांति मिलती है.  
 
उरद की दाल- उरद की दाल ज्योतिष में शनि और राहु से सम्बन्ध रखती है. पितरों को अर्पित की जाने वाली खाने वाली वस्तुओं में उरद की वस्तुओं की प्रधानता होती है. असामायिक मृत्यु हो जाने की दशा में , भैरव देव को उरद की बनी हुई वस्तुएं ही अर्पित की जाती हैं. अगर पितरों की याद के कारण या किसी के देहांत के कारण भय लग रहा हो तो शनिवार को पीपल के नीचे साबुत उरद रखकर उस पर दही और सिन्दूर का तिलक करना चाहिए, इससे भय गायब हो जाएगा.

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काले तिल- काले तिल को सम्पन्नता और शांति का प्रतीक माना जाता है. काले तिल का दान अज्ञात बाधाओं से मुक्ति दिलाता है. काले तिल डाल कर सूर्य को जल देने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. अग्नि में काले तिल की आहुति देने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और अतृप्त आत्माएं शांत होती हैं .

कुश- माना जाता है कि कुश श्री हरि विष्णु के अंश से बना है. यह भी माना जाता है कि कुश के अन्दर अमृत तत्व का वास है. कुश के जल से शिव जी का अभिषेक करने से तमाम तरह की बाधाएँ दूर होती हैं और पितरों को मुक्ति प्राप्त होती है. कुश हाथ में लेकर पितरों को जल अर्पित करने से ही श्राद्ध की प्रक्रिया पूरी होती है. पितृ पक्ष में जल में कुश डालकर स्नान करने से मन की पीड़ा दूर होती है , साथ ही कुश का शरबत पीने से स्फूर्ति और ऊर्जा आती है.

 

 


 

 

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