साल 2020 में शराब पीने की वजह से पूरी दुनिया में 7.41 लाख से ज्यादा नए कैंसर केस सामने आए हैं. यह खुलासा हुआ है कि मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट ऑन्कोलॉजी (The Lancet Oncology) के प्रकाशित नई रिसर्च रिपोर्ट से. दुनिया भर में जितने भी कैंसर के केस सामने आए हैं, उनमें से 741,300 नए मामले शराब पीने की वजह से आए हैं, यानी 4.1 फीसदी. अब दुनियाभर में फिर से शराब के कार्सिनोजेनिक प्रभावों को लेकर जागरुकता फैलाने की बात कही जा रही है. (फोटोः पिक्साबे)
द लैंसेट ऑन्कोलॉजी (The Lancet Oncology) में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग लगातार और रोज शराब पीते हैं, उन्हें लिवर, छाती, कोलन और मुंह का कैंसर होने की पूरी आशंका रहती है. ये बात पहले से प्रमाणित है कि शराब पीने से इन अंगों में होने वाले कैंसर का सीधा संबंध है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में एसिटलडिहाइड (Acetaldehyde) की मात्रा बढ़ती जाती है. यह इथेनॉल (Ethanol) में मिलने वाले खतरनाक कार्सिनोजेनिक मेटाबोलाइट है, जो कोशिकाओं और डीएनए को बर्बाद करने लगता है. (फोटोः गेटी)
लगातार पीने की वजह से एस्ट्रोजेन्स (Estrogens) और एंड्रोजेन्स (Endrogens) जैसे हार्मोन्स का स्तर बिगाड़ता है. वहीं इथेनॉल एक प्रभावी सॉल्वेंट है जो कई कार्सिनोजेनिक रसायनों को शरीर में मिलाता है. खासतौर से कैंसर पैदा करने वाले वो रसायन जो आमतौर पर सिगरेट्स में मिलते हैं. यानी शराब के सिगरेट का मिश्रण शरीर के लिए ज्यादा खतरनाक हो जाता है. (फोटोः गेटी)
ये पता करने के लिए कि शराब की वजह से कैंसर कैसे होता है, यह स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों ने साल 2010 में शराब उत्पादन, बिक्री और कंज्यूम करने के आंकड़ों को जुटाया. उसके बाद उन्होंने दस साल यानी साल 2020 तक के शराब के उपयोग और कैंसर डायग्नोसिस के आंकड़ों का विश्लेषण किया. यानी दस साल के आंकड़ों का विश्लेषण करके वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि पिछले साल शराब पीने की वजह से 7.41 लाख मामले ज्यादा आए हैं. (फोटोःगेटी)
वैज्ञानिकों ने यह भी अंदाजा लगाया कि दुनिया के हर देश में में प्रति व्यक्ति शराब की खपत कितनी है. फिर उसे साल 2020 में सामने आए कैंसर के मामलों से एनालिसिस किया. जिससे पता चला कि हर दिन छह ड्रिंक्स से ज्यादा पीने वाले 346,400 लोगों में शराब की वजह से कैंसर हो गया. पिछले साल शराब पीने की वजह से 741,300 लोग कैंसर के मरीज बने. इसमें 346,400 लोग यानी 47 फीसदी हर रोज 6 पेग से ज्यादा पीते थे. (फोटोः गेटी)
वहीं, हर रोज 2 से 6 पेग पीने वाले लोगों की संख्या 39 फीसदी है. जबकि सिर्फ 2 या उससे कम पेग पीने वालों की संख्या 14 फीसदी ही है. ऐसा नहीं है कि इन लोगों को शराब की वजह से कैंसर नहीं हुआ. इन्हें भी हुआ. यानी शराब पीने से कैंसर होता है, ये तय है. चाहे आप कम पीएं या फिर ज्यादा. द लैंसेट की रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी है. (फोटोः पिक्साबे)
इस स्टडी को करने वाले साइंटिस्ट हैरियट रमगे ने एक बयान में कहा है कि हमें तत्काल दुनियाभर में शराब पीने के नुकसानों पर जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है. नीति निर्माताओं को और जनता को यह बताना जरूरी है कि शराब और कैंसर के बीच सीधा और खतरनाक संबंध है. इसके अलावा दुनियाभर में शराब के उत्पादन को सीमित करने, उन पर यह लेबल लगाया जाए कि इससे कैंसर होता है, मार्केटिंग पर प्रतिबंध लगाने से शराब से संबंधित कैंसर के केस कम होंगे. (फोटोः पिक्साबे)
पिछले साल शराब पीने से कैंसर के जितने नए मामले सामने आए हैं, उनमें आहार नाल कैंसर के 189,700 मामले, लिवर कैंसर के 154,700 केस और 98,300 ब्रेस्ट कैंसर के मामले हैं. शराब पीने की वजह से सबसे ज्यादा कैंसर के मामले मंगोलिया (Mongolia) में सामने आए हैं. यहां पर साल 2020 में सामने आए कैंसर के मामलों में से 10 फीसदी शराब पीने की वजह से है. सिर्फ कुवैत (Kuwait) ऐसा देश है, जहां शराब पीने की वजह से कैंसर के मामले सामने नहीं आए, क्योंकि यहां पर शराब पीना बेहद असामान्य है. (फोटोः पिक्साबे)
अमेरिका में पिछले साल शराब पीने की वजह से कैंसर के 3 फीसदी नए मामले सामने आए हैं, जबकि यूके में यह आंकड़ा करीब 4 फीसदी है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह आंकड़ें एक पारंपरिक तरीके से बनाए गए फॉर्मूले से निकाले गए हैं. इनकी संख्या ज्यादा हो सकती है या फिर कम. क्योंकि इसमें धूम्रपान को शामिल नहीं किया गया है. ये भी हो सकता है कि इनमें से कुछ मामले शराब के साथ तंबाकू का सेवन करने की वजह से हुए हों, लेकिन उसकी पुष्टि इस स्टडी में नहीं होती है. (फोटोः पिक्साबे)
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कितनी शराब पीना खतरनाक है. लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक 20 ग्राम अल्कोहल प्रतिदिन लेने वाले को मॉडरेट ड्रिंकर कहते हैं. 20 से 60 ग्राम पीने वाले को रिस्की ड्रिंकर कहेंगे. 60 ग्राम से ज्यादा पीने वाले को हैवी ड्रिंकर कहा जाएगा. ऐसा नहीं है कि मॉडरेट वाले को कैंसर नहीं हो सकता. लेकिन उसकी आशंका कम रहती है. 741,300 कैंसर केस में से 346,400 हैवी ड्रिंकर, 291,800 रिस्की ड्रिंकर और 103,100 मॉडरेट ड्रिंकर्स हैं. (फोटोःपिक्साबे)
शराब पीने की आदत देश और मौसम के हिसाब से बदलती रहती है. कई यूरोपियन देशों में प्रति व्यक्ति शराब खपत में कमी आई है, खासतौर से पूर्वी यूरोप में. वहीं, कई एशियाई देशों में प्रति व्यक्ति शराब की खपत बढ़ गई है. चीन, भारत और वियतनाम में शराब की खपत काफी तेजी से बढ़ी है. इसके अलावा सब-सहारा अफ्रीका के देशों में भी शराब की खपत बढ़ी है. इन देशों में शराब की खपत बढ़ने की वजह से कैंसर का बर्डेन दुनिया भर में बढ़ा है. (फोटोः पिक्साबे)
चीन और भारत में शराब की खपत बढ़ने को लेकर एक दबाव अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है. कई एशियाई देशों में शराब उद्योग की वजह से काफी ज्यादा आर्थिक मदद मिलती है. लेकिन इसका नुकसान भी होता है. इतना ही नहीं, जिन देशों में विकासशील हैं, वहां पर शराब से जुड़े कैंसर के मामले ज्यादा आ रहा है. हैरानी की बात ये है कि अब तो महिलाओं में शराब पीने की वजह से कैंसर के मामले काफी ज्यादा आ रहे हैं. (फोटोः गेटी)