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ट्रंप ने जिस Animal को बचाने से इंकार किया, ओबामा-बाइडेन ने उसी के लिए उठाया बड़ा कदम

आजतक साइंस डेस्क
  • वॉशिंगटन,
  • 30 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 7:17 PM IST
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दो साल पहले अमेरिका के यलोस्टोन नेशनल पार्क में दुर्लभ जीव वॉल्वरिन दिखा था. इससे एक साल पहले अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ये कहा था कि 100 सालों के बाद यह जीव वॉशिंगटन स्थित माउंट रेनियर नेशनल पार्क में देखा गया था. अब इस जीव को अमेरिकी सरकार ने खतरे में पड़ी प्रजातियों की सूची में डाल दिया है. (फोटोः पिक्साबे)

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नॉर्थ अमेरिकन वॉल्वरिन एक खतरनाक पहाड़ी शिकारी होता है. यह भालू जैसा दिखता है लेकिन उससे कहीं ज्यादा तेज और घातक होता है. डोनाल्ड ट्रंप के समय इस प्रजाति की थ्रेटेंड स्पीसीज की लिस्ट से बाहर कर दिया गया था. लेकिन वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे वापस उसी सूची में डाल दिया. (फोटोः पिक्साबे)

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इस जीव की प्रजाति धीरे-धीरे खत्म हो रही है. वजह है क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन. इस जीव को एन्डेंजर्ड स्पीसज एक्ट के तहत सूचीबद्ध किया गया है. सबसे पहले इस जीव को बचाने के लिए बराक ओबामा की सरकार ने इसे खतरे में पड़ी प्रजातियों की लिस्ट में डालने को कहा था. ये 2013 की बात है. (फोटोः पिक्साबे)

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अब जाकर यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस ने इस जानवर को बचाने की मुहिम शुरू की है. फिलहाल पूरे अमेरिका में सिर्फ 300 वॉल्वरिन बचे हैं. ये मोंटाना, इडाहो, व्योमिंग और वॉशिंगटन में घूमते दिख जाते हैं. हालांकि ये नियम अलास्का और कनाडा पर लागू नहीं होता. वहां इनकी संख्या हजारों में है. (फोटोः फ्रीपिक)

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वैज्ञानिक बताते हैं कि एक समय में इनकी संख्या काफी ज्यादा थी. ये उत्तरी कैसकेड्स, रॉकी माउंटेंस और सियेरा नेवादा के पहाड़ों पर घूमते दिख जाते थे. लेकिन इन्हें पकड़ने और जहर देकर मारने की वजह से इनकी आबादी घटती चली गई. बायोलॉजिस्ट कहते हैं कि अब रॉकी और कैसकेड्स के पहाड़ों पर कुछ वॉल्वरिन ही बचे हैं. (फोटोः पिक्साबे)

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वजह है बढ़ता तापमान और घटती बर्फ की परत. इसकी वजह से इनकी हालत खराब होती जा रही है. पर्यावरण समूहों ने इस जीव को बचाने के लिए 1994 में ही अपील की थी. अर्थजस्टिस एटॉर्नी टिमोथी प्रेसो ने कहा कि यह काम बहुत दिनों से पेंडिंग था. जिसे अब जाकर पूरा किया गया है. वॉल्वरिन अब खुद को बचाने के प्रयास में जुटे हैं. (फोटोः फ्रीपिक)

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वॉल्वरिन ऊंचे पहाड़ों पर अपनी मांद बनाते हैं. वहीं बच्चे पैदा करते हैं. खाना स्टोर करते हैं. वो भी ऐसी जगह जहां पर बहुत सारी बर्फ हो. यह अपने आकार के शिकार को आसानी से चित कर देता है. ये मांसाहारी भी है और शाकाहारी भी. यह किसी छोटे भालू जैसा दिखता है लेकिन होता उसे कई गुना तेज और घातक. (फोटोः पिक्साबे)

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एक नई रिसर्च से पता चला है कि हाइवे और शहरों के तेजी से बढ़ने की वजह से कनाडा से अमेरिका की तरफ मादा वॉल्वरिन नहीं आ पा रही हैं. इसलिए अमेरिका में इनकी संख्या कम होती जा रही है. इससे इनके जेनेटिक मैटेरियल में भी बदलाव नहीं आ पा रहा है. जो कि इन जीवों के लिए बेहद जरूरी है. (फोटोः फ्रीपिक)

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एक वॉल्वरिन खाने की तलाश में एक दिन में 19 किलोमीटर की दूरी भी तय कर सकता है. इसलिए इनके घूमने की रेंज लगातार बढ़ती और बदलती रहती है. ये एक जगह पर टिक कर कम ही रहते हैं. कई बार किसी और जानवर के लिए लगाए गए ट्रैप में यह फंस जाता है. इसकी वजह से भी इनकी मौत हो जाती है. (फोटोः अनस्प्लैश)

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