अपने ट्वीट्स के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने 6 अप्रैल 2022 को एक ट्वीट किया. ट्वीट में महिंद्रा ने लिखा कि इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी (Istanbul Technical University) द्वारा सड़कों पर विंड टरबाइन लगाए गए हैं. ये गाड़ियों के आने-जाने से बहने वाली हवा से घूमते हैं. भारत की यातायात को देखते हुए हम भी पवन ऊर्जा (Wind Energy) में वैश्विक ताकत बन सकते हैं. गडकरी जी...क्या हम इसे अपनी सड़कों और हाईवे पर लगा सकते हैं? (फोटोः डेवेसीटेक)
आनंद महिंद्रा ने एरिक सोलहीम के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यह सवाल केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से यह सवाल पूछा. एरिक सोलहीम ग्रीन बेल्ट एंड रोड इंस्टीट्यूट के प्रेसीडेंट हैं. उनके ट्वीट के बाद ही महिंद्रा ने ट्वीट किया. असल में यह तकनीक ऐसी है कि इस टरबाइन के अगल-बगल से जितनी भी गाड़ियां गुजरती हैं, उनके गुजरने से हवा का बहाव बनता है, जो इसे तेजी से घुमाता है. इससे बिजली पैदा होती है. इस्तांबुल में यह प्रयोग काफी ज्यादा सफल रहा है. दुनिया में इसकी तारीफ भी हो रही है. (फोटोः डेवेसीटेक)
अब आपको बताते हैं इस तकनीक के बारे में. इस विंड टरबाइन का नाम है ENLIL. ये हवा के बहाव से घूमते हैं. ये बहाव गाड़ियों के चलने से पैदा होता है. इसके अलावा इसके ऊपर सोलर पैनल्स भी लगे हैं, जो सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करते हैं. यानी एक ही यंत्र की मदद से दो तरीके से बिजली पैदा की जा रही है. इस काम को किया है इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी और टेक फर्म डेवेसीटेक (Devecitech) ने. (फोटोः डेवेसीटेक)
आपने यह तो महसूस किया ही होगा कि जब आपके बगल से तेजी से कोई गाड़ी जाती है, तो हवा का तेज बहाव आता है. ENLIL के लंबे पंख नुमा टरबाइन इसी हवा का फायदा उठाते हैं. इसके ब्लेड्स के अगल-बगल गाड़ियां चलती रहें तो ये हर घंटे एक किलोवॉट ऊर्जा पैदा करते हैं. अगर सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली भी जोड़ दी जाए तो एक ENLIL तुर्की के दो मकानों के दिनभर की बिजली खपत पूरी कर सकता है. (फोटोः डेवेसीटेक)
ENLIL के विंड टरबाइन्स 20 साल तक कार्य करने के योग्य बनाए गए हैं. इसकी साधारण डिजाइन ही इसकी खासियत है. यह कम क्षेत्रफल में लगने वाला यंत्र है, जो सड़कों के बीच डिवाइडर पर लगाया जा सकता है. या फिर किसी भी तेज हवा वाले इलाके या इमारत के ऊपर. यह कम जगह घेर कर पर्याप्त मात्रा में बिजली पैदा करता है. (फोटोः डेवेसीटेक)
ENLIL सिर्फ बिजली ही नहीं पैदा करता. इसके ब्लेड्स घूमते समय आसपास के तापमान, आद्रता, कार्बन फुटप्रिंट और भूकंपीय गतिविधियों का भी रिकॉर्ड रखते हैं. इससे मिलने वाली हर जानकारी स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणीय वैज्ञानिकों के लिए काम की है. असल में इसका आइडिया बिजनेसमैन और आंत्रप्रन्योर करेम डेवेसी (Kerem Deveci) के दिमाग में आया था. (फोटोः डेवेसीटेक)
कुछ साल पहले जब करेम डेवेसी सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर रहे थे, तभी उन्होंने इसका डिजाइन बनाया था. डेवेसी इस्तांबुल की मेट्रोबस सेवा में आते-जाते थे. उन्होंने देखा कि ये बस सेवा काफी ज्यादा हवा पैदा करती है. हर इमरजेंसी इवेक्यूएशन के फ्लैप्स इन हवाओं की वजह से लगातार लहराते रहते थे. बस उनका लहराना ही ENLIL के पैदा होने की वजह बनी. (फोटोः डेवेसीटेक)
करेम डेवेसी ने इस तकनीक का प्रोटोटाइप अपने बेडरूम में बैठकर बनाया. इसके बाद इसे विकसित करने के लिए उन्होंने इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मदद ली. स्थानीय प्रशासन, यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों की मदद से टरबाइन बनकर तैयार हुआ. अब यह इस्तांबुल की सड़कों पर बिजली पैदा कर रहा है. इसी की बात आनंद महिंद्रा कर रहे हैं. (फोटोः डेवेसीटेक)
ENLIL अभी बेहद शुरुआती स्टेज का प्रोजेक्ट है. लेकिन इसे क्लाइमेटलॉन्चपैड अर्बन ट्रांजिशन अवॉर्ड और मर्सिडीज-बेंज टर्किश स्टार्टअप अवॉर्ड भी मिल चुका है. वह भी तब जब यह अपने प्रायोगिक स्तर पर था. ऐसा कहा जा रहा है कि कुछ दिनों में यह तकनीक कुछ यूरोपीय देशों में भी उपयोग की जा सकती है. (फोटोः डेवेसीटेक)