आप सामाजिक बंधन कैसे बनाते हैं. पार्टियों में जाकर, लोगों से फोन पर बात करके या सोशल मीडिया के जरिए. या ऐसी ही तरीकों से आप सामाजिक बंधनों से सूचनाएं हासिल करते हैं. लेकिन चींटियों के पास नायाब तरीका है सामाजिक बंधन, दोस्ती और सूचनाओं के लिए. वो एकदूसरे के मुंह में उल्टी (Vomit) करती हैं. आपको यह सुनने में थोड़ा गंदा लग सकता है लेकिन ये चींटियों का तरीका है, इंसानों की तरह ही एक समाज में रहती हैं. (फोटोः गेटी)
चींटियों के शरीर में मुंह से लेकर मलद्वार तक तीन प्रमुख हिस्से होते हैं. फोरगट (Foregut) यानी अग्रांत्र, मिडगट (Midgut) यानी आद्यमध्यांत्र और हाइंडगट (Hindgut) पश्चांत्र. खैर ये तो शुद्ध हिंदी में मतलब हुआ. सामान्य भाषा में फोरगट का मतलब मुंह से लेकर पेट के शुरुआती हिस्से तक. मिडगट यानी पेट से लेकर आंत की शुरुआत तक और हाइंडगट यानी आंत से लेकर मलद्वार तक. लेकिन चींटियों और मधुमक्खी जैसे अन्य कीड़ों के फोरगट यानी मुंह वाला हिस्सा उनका सामाजिक पेट (Social Stomach) होता है. (फोटोः गेटी)
स्विट्जरलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिबोर्ग में लेबोरेटरी ऑफ सोशल फ्लूड्स विभाग की असिसटेंट प्रोफेसर आद्रिया लीबूफ ने कहा कि चींटियां इस सामाजिक पेट (Social Stomach) का इस्तेमाल सिर्फ सामाजिक दोस्ती बढ़ाने और सूचनाएं प्राप्त करने के लिए करती हैं. जबकि मिडगट और हाइंडगट उनके खाने को पचाने के लिए होता है. (फोटोः गेटी)
चींटियां फोरगट में मौजूद तत्वों यानी उल्टी को सिर्फ इसी सामाजिक बंधन बनाने के काम में लाती हैं. एक के मुंह से दूसरे के मुंह में किसी प्रकार का खाद्य पदार्थ डालने की प्रक्रिया को ट्रोफैलैक्सिस (Trophallaxis) कहते हैं. यह प्रक्रिया चींटियों में बेहद सामान्य तौर पर पाई जाती है. ट्रोफैलैक्सिस (Trophallaxis) के दौरान चींटियां मुंह के जरिए सामाजिक पेट में जमा पोषक तत्व और प्रोटीन दूसरे के मुंह में डालती हैं. (फोटोः गेटी)
आद्रिया ने बताया कि यह प्रक्रिया सीरीज में होती है. आपने देखा होगा कि कई बार अगर दो चींटियां एक दूसरे की तरफ अलग-अलग दिशाओं से आ रही हैं, तो वो रुककर आपस में मुंह सटाती है. असल में वो ये बता रही होती हैं कि वो जिस इलाके से आईं हैं, वहां पर क्या है. आमतौर पर खाने को लेकर सूचना प्रदान करती हैं. इसी सूचना के आधार पर इन चींटियों के बीच एक सामाजिक बंधन बनता है. मुंह में उस खाने के पदार्थ की उल्टी होती है, जिसे वो दूसरी तरफ से आ रही चींटी के मुंह में डाल देती है. (फोटोः गेटी)
ट्रोफैलैक्सिस (Trophallaxis) के जरिए चींटियां एक से दूसरे के मुंह में उल्टी डालकर खबर पहुंचाती रहती है. इससे पूरी कॉलोनी को एक नई सूचना प्राप्त हो जाती है. इसके बाद वो खाने की तरफ एक साथ लाइन बनाकर चल देती हैं. आद्रिया ने बताया कि कारपेंटर चींटियां (Camponotus) सामान्य तौर पर अपने सामाजिक पेट (Social Stomach) में मौजूद पोषक तत्वों को ट्रोफैलेक्सिस प्रक्रिया के जरिए एक दूसरे के मुंह में डालती चली जाती हैं. अगर आप चींटियों की कॉलोनी के एक मिनट ध्यान से देखेंगे तो आपको ऐसी 20 घटनाएं देखने को मिल जाएंगी. (फोटोः गेटी)
आद्रिया कहती हैं कि सामाजिक पेट (Social Stomach) और ट्रोफैलैक्सिस (Trophallaxis) को लेकर पांच साल पहले एक जर्नल eLife में एक रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. लेकिन हाल ही में हुई स्टडी में पता चला कि ये सिर्फ खाने का आदान-प्रदान नहीं करती, बल्कि ये हॉर्मोन्स, कॉलोनी में प्रजनन के लिए तैयार नर या मादा की सूचना, छोटे RNA और कई अन्य चीजें भी बांटती हैं. (फोटोः गेटी)
चींटियों का सामाजिक नेटवर्क सिर्फ बातचीत के लिए नहीं होता. बल्कि यह पूरे समाज के पोषण का ख्याल रखता है. ये पूरे समाज का पेट भरने का एक नायाब तरीका है. ताकि इनकी ऊर्जा बनी रहे और एक दूसरे ये खाने की सूचना के बहाने जोड़कर रख सकें. यह ठीक वैसा ही है जैसे इंसानों के दिमाग से निकलने वाला हॉर्मोन हमारे रक्त संचार प्रणाली और लिवर या किसी अन्य अंग को यह बताता है कि तुम्हें कैसे ठीक रहना है, क्या काम करना है. (फोटोः गेटी)
आद्रिया कहती हैं कि चींटियों की कॉलोनी में व्यक्तिवाद की बात नहीं है. जैसे इंसान समाज में रहते हुए भी सिर्फ अपने बारे में सोचता है. सिर्फ अपने विकास, खाने और सफल होने के लिए काम करता है. लेकिन चींटियों की कॉलोनी में हर चींटी एक कॉलोनियल सुपरऑर्गेनिज्म होती हैं. यहां हर चींटी का काम विभाजित होता है. उसे ये हर हाल में पूरा करती हैं, लेकिन किसी छोटे काम की चीटीं को अगर बड़ी सूचना मिलती है तो वह कॉलोनी की प्रमुख चींटी के मुंह में उल्टी करके बता सकता है. इंसानों की तरह छोटे-बड़े का भेदभाव नहीं है यहां पर. (फोटोः गेटी)
आद्रिया लीबूफ और उनकी साथी सांजा हकाला ने जब लैब में चींटियों की उल्टियों की जांच की तो पता चला कि वो 519 तरह के प्रोटीन को उल्टी के जरिए बांटती हैं. इनमें से 27 प्रोटीन तो हर सैंपल में मिले. चींटियों में कर्मचारी चीटियां खाने की खोज करती हैं. उसके बाद उससे संबंधित जानकारी को यानी प्रोटीन को दूसरी चीटीं के मुंह में उल्टी करके सूचना आगे बढ़ाती हैं. (फोटोः गेटी)
कॉलोनी में खाने को सुरक्षित रखा जाता है. जैसे-जैसे कॉलोनी विकसित होती है, वहां पर खाना और प्रोटीन की मात्रा बढ़ती जाती है. ताकि बुरे समय में पूरी कॉलोनी इस खाने को खाकर जिंदा रह सके. इन कॉलोनियों में कुछ वयस्क चींटियां हमेशा नहीं खातीं. वो एक बार खाकर कई चींटियों के लिए पोषक तत्व अपने फोरगट यानी सामाजिक पेट में रख लेती हैं और सैनिक चींटियों या कर्मचारी चींटियों के मुंह में उलट देती हैं. (फोटोः गेटी)
आद्रिया और सांजा की यह स्टडी हाल ही में जर्नल eLife में प्रकाशित हुई है. जिसमें उन्होंने बताया है कि आप प्रोटीन की स्टडी करके यह बता सकते हैं कि चींटियों की कॉलोनी नई है या पुरानी. यहां कितनी चींटियां काम कर रही होंगी. किस तरह की सूचनाएं जमा हो रही होंगी. (फोटोः गेटी)