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बहराइच में हुए हमलों में क्या भेड़िये ही हैं जिम्मेदार... पुरानी थ्योरी पर उठ रहे हैं सवाल?

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST
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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले समेत कई जिलों की वन विभाग की टीम और प्रशासन उस आखिरी भेड़िये को खोज रहा है, जिसने 9 इंसानी बच्चों को मारा है. कई लोगों को जख्मी किया है. खोजबीन जारी है. ड्रोन लगे हैं. थर्मल कैमरा लगा है. लेकिन अब भी कई सवालों के जवाब बाकी हैं. मुद्दा ये हैं कि भेड़ियों ने अचानक इंसानों पर हमला क्यों किया? क्या सच में हमले भेड़ियों ने किए, सियारों ने किए या जंगली कुत्तों ने? (सभी फोटोः पेक्सेल)

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कुछ वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स अब भी पुख्ता सबूतों के इंतजार में हैं. ताकि सारे सबूतों की जांच करने के बाद ही भेड़ियों या उनके पूरे समूह पर इंसानों को मारने का ठीकरा फोड़ सकें. रिपोर्ट्स आईं थी कि भारतीय भेड़िये (Canis lupus pallipes) घर के बाहर या खुले में सो रहे बच्चों को खींचकर ले जा रहे हैं. कई भेड़िये पकड़े गए. एक अब भी फरार है. 

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भारतीय वन विभाग के अधिकारी आकाशदीप बधावन ने कहा कि यह पूरा इलाका गन्ने के खेतों से भरा पड़ा है. इसलिए एक भेड़िये को पकड़ना आसान नहीं है. क्योंकि इन खेतों के आसपास कुत्ते, लोमड़ी, सियार जैसे कैनिड्स परिवार के अन्य जीव भी रहते हैं. ऐसे में किसी एक भेड़ियों को पहचानना बेहद मुश्किल है. 

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बीच में भेड़ियों के बदला लेने की बात आई थी. लेकिन वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट वाईवी झाला ने कहा कि भेड़िये बदला नहीं लेते. यह सारे हमले किसी एक भेड़िये का काम है. जिसे इंसानों को मारने और खाने में मजा आ रहा है. क्योंकि जब भेड़ियों का समूह हमला करता है, तब वह अपने शिकार को बोटी-बोटी में फाड़ डालता है. 

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यहां पर पीड़ितों के शरीर पर एक-एक बाइट के निशान हैं. यानी कोई एक भेड़िया है, जो कत्ल-ए-आम मचा रहा है. भेड़ियों का समूह ऐसा हमला नहीं करता, जैसे निशान ज्यादातर जख्मी इंसानों के ऊपर दिख रहा है. या मरे हुए लोगों और बच्चों के शवों पर देखने को मिला. भेड़िये या अन्य शिकारी जानवर इंसानों पर तब तक हमला नहीं करते, जब तक उनका डर न खत्म हो जाए. 

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झाला ने बताया कि जंगली जानवर इंसानों से डरते हैं. वो तभी हमला करेंगे जब उन्हें घबराहट होगी या फिर उनका डर खत्म हो जाए. कई बार इंसान भेड़ियों को खिलाते-पिलाते भी हैं. जिससे भेड़ियों का डर खत्म हो जाता है. वो अपने घरेलू कुत्तों के साथ ब्रीडिंग करने भी देते हैं. बहराइच के लोग तो इस तरह के खतरे के बेहद नजदीक हैं. यहां जंगली कुत्तों, सियारों की भी अच्छी-खासी आबादी है. ये भी हमला कर सकते हैं. 

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बहराइच के लोगों का जंगल से वास्ता करीबी है. उसके बाद यहां के समाज में गरीबी है. घर मजबूत नहीं. दरवाजे ढंग के नहीं. टॉयलेट्स नहीं हैं. खाने की कमी रहती है, ऐसे में भेड़िये जैसे शिकारी फायदा उठाते हैं. इसलिए भेड़ियों को इंसानी बच्चे आसान शिकार नजर आए. या किसी एक भेड़िये को ये बात समझ आई. 
 

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वाईवी झाला ने कहा कि किसी भी जीव के बच्चे सबसे आसान शिकार होते हैं. जब उन्हें इंसान के बच्चे का शिकार करने को मिलता है, तब उन्हें इंसानों का डर नहीं रहता. पिछले कुछ वर्षों में भेड़ियों के हमले बढ़े हैं. बिहार में 1981-1982 में 12 बच्चे मारे गए थे. 1996 में उत्तर प्रदेश में कम से कम 38 बच्चे मारे गए थे. 

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