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जापानी वैज्ञानिकों ने किया Chandrayaan-4 को लेकर नया खुलासा, जानिए क्या है मिशन

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली/,
  • 19 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST
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भारत-जापान मिलकर नया मून मिशन शुरू कर रहे हैं. मिशन का नाम भारत में चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) के नाम से जाना जा रहा है. जबकि उसका असली नाम LUPEX है. यानी लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन. इस मिशन के बारे में बता रही हैं, जापानी स्पेस एजेंसी की दो साइंटिस्ट इनोऊ हिरोका (बाएं) और फुजियोका नात्सू. (सभी फोटोः JAXA)

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लूपेक्स असल में अंतरराष्ट्रीय मिशन है. जिसे मुख्य रूप से ISRO और जापानी स्पेस एजेंसी JAXA मिलकर कर रहे हैं. जाक्सा चांद पर चलने वाला रोवर बनाएगी. इसरो लैंडर बनाएगी. नासा (NASA) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) इसमें लगने वाले ऑब्जरवेशन इंस्ट्रूमेंट्स बनाएंगे. ये यंत्र रोवर के ऊपर लगे होंगे. 

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लूपेक्स मिशन मिशन में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर-रोवर उतारा जाएगा. यह मिशन 2026-28 के बीच पूरा हो सकता है. इसे लेकर चारों देशों के साइंटिस्ट काफी सकारात्मक हैं. भारत को इस मिशन के लिए लैंडर बनाना है. जबकि रोवर और रॉकेट जापान का होगा. फोटो में... लेजर से चांद के सतह के अंदर पानी खोजता लूपेक्स का रोवर. 

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भारत और जापान के वैज्ञानिक चंद्रयान-4 मिशन में काफी कुछ बदलाव करेंगे. इस साल अप्रैल में जापानी डेलिगेशन भारत आया था. इनोउ हिरोका उस डेलिगेशन में शामिल थीं. डेलिगेशन ने चंद्रमा पर लैंडिंग साइट के बारे में इसरो से बातचीत की थी. आइडिया शेयर किए गए थे. साथ ही अन्य लैंडिंग लोकेशन को भी खोजा गया था. फोटो में... रोवर अपने ड्रिलर से चांद की सतह के अंदर से सैंपल ले रहा है. 

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इसके अलावा रोवर, एंटीना, टेलीमेट्री और पूरे प्रोजेक्ट के एस्टीमेट पर भी चर्चा की गई थी. पूरे मिशन का कुल वजन 6000 KG होगा. जबकि पेलोड का वजन 350 KG के आसपास होगा. साल 2019 में भारत और जापान ने लूपेक्स मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को भी शामिल करने की चर्चा की थी. फोटो में... सैंपल लेने के बाद उसे रोवर के अंदर जांच के लिए डालता रोवर का आर्म. 

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अगर यह मिशन सफल होता है तो भारत-जापान मिलकर चंद्रमा की सतह पर 1.5 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर वहां से मिट्टी का सैंपल लाएंगे. इसमें ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार (GPR) का इस्तेमाल भी हो सकता है. गड्ढा करने से पहले रोवर मिट्टी के अंदर मौजूद पानी की खोज करेगा. इसके लिए वह लेजर तकनीक की मदद लेगा. फोटो में... सैंपल रोवर के अंदर डाला जा चुका है.

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लेजर को जब मिट्टी के अंदर पानी की मौजूदगी दिखाई देगी, तब वह अपने ड्रिलिंग मशीन के जरिए मिट्टी का सैंपल जमा करेगा. उसके बाद उस सैंपल को वह अपने अंदर मौजूद एक यंत्र में डालकर उसकी जांच करेगा. इस जांच से यह पता चलेगा कि चंद्रमा की सतह के नीचे पानी का खजाना मौजूद है या नहीं. फोटो में... रोवर के अंदर सैंपल को गर्म करके देखा जाएगा कि उसमें पानी है या नहीं. 

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