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Chile's Hanging Glacier: आंखों के सामने टूट कर गिरा चिली का मशहूर 'हैंगिंग ग्लेशियर', वजह बढ़ता तापमान

aajtak.in
  • सैंटियागो,
  • 14 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST
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चिली (Chile) का मशहूर हैंगिंग ग्लेशियर (Hanging Glacier) 13 सितंबर 2022 यानी मंगलवार को टूटकर गिर गया. यह ग्लेशियर क्यूलट नेशनल पार्क (Queulat National Park) में स्थित दो पहाड़ों के बीच बनी घाटी के ऊपर 656 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. नेशनल पार्क घूमने गए कुछ पर्यटकों ने टूटते हुए ग्लेशियर का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. उसके बाद तो वीडियो वायरल हो चला. 

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इस ग्लेशियर का नाम है वेंतिस्क्वेरो कोलगांते (Ventisquero Colgante). यह चिली की राजधानी सैंटियागो से 1200 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित पैटागोनिया (Patagonia) में है. यूनिवर्सिटी ऑफ सैंटियागो के क्लाइमेट साइंटिस्ट रॉल कॉरडेरो ने कहा कि बर्फ का टूटना सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन इस समय जितनी तेजी से बर्फ पिघल रही है. ग्लेशियर टूट रहे हैं. वह बड़ी चिंता का विषय है. (फोटोः गेटी)
 

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चिली का हैंगिंग ग्लेशियर यानी वेंतिस्क्वेरो कोलगांते दो वजहों से टूटा है. बढ़ता हुआ तापमान और उसके बाद हुई तेज बारिश. दोनों से ही ग्लेशियर कमजोर हो गया. सिर्फ चिली की ये स्थिति नहीं है. पूरी दुनिया में यही हो रहा है. लगातार बदलते मौसम की वजह से स्विट्जरलैंड, यूरोप और हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं. जिससे लोगों को खतरा है. (फोटोः ट्विटर/नेचरडिस्कवर)

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रॉल कॉरडेरो ने कहा कि चिली में भी बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल रहा है. यह प्रक्रिया बेहद असामान्य है. पैटागोनिया में बारिश से पहले औसत से ज्यादा तापमान काफी दिनों से देखने को मिल रहा था. उसके बाद बारिश हुई लेकिन तापमान में कमी नहीं आई. इस वजह से कमजोर हुआ हैंगिंग ग्लेशियर टूटकर गिर गया. (फोटोः रॉयटर्स)

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पैटागोनिया के ऊपर एक वायुमंडलीय नदी बह रही है. जिसमें उमस से भरी गर्म हवा है. जब यह एंडियन या पैटागोनियन इलाकों के ऊपर आकर पहाड़ों से टकराती है, तब बड़े घने और गहरे बादल बनते हैं. जो काफी ज्यादा मात्रा में बारिश करते हैं. रॉल बताते हैं कि लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन यानी मौसम के अचानक बदलने की प्रक्रिया या किसी मौसम का लंबे समय तक टिके रहना खतरनाक है. (फोटोः गेटी)

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रॉल ने बताया कि ऐसा ही कुछ महीनों पहले हिमालय और एल्प्स के पहाड़ों पर भी हुआ था. वहां भी ज्यादा तापमान की वजह से ग्लेशियर पिघले थे. दुनियाभर के वैज्ञानिक यह मानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) की वजह से ऐसी हालत है. यह इंसानों द्वारा किए जा रहे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का नतीजा है. (फोटोः गेटी)
 

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संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट साइंस पैनल ने इस साल के शुरुआत में कहा था कि अगर दुनिया भर के देशों की सरकारें और उद्योग अपने ऊर्जा उपयोग को ग्रीन नहीं करेंगे, तो बड़ी मुसीबत आएगी. जीवाश्म ईंधन को जलाना बंद करना होगा. इनकी वजह से लगातार तापमान बढ़ रहा है. ग्लेशियर और हिमखंड पिघलेंगे तो समुद्री जलस्तर बढ़ने की आशंका है. (फोटोः ट्विटर/कैंपरकैट)

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अभी दो दिन पहले की बात है जब, स्विट्जरलैंड का एक ग्लेशियर पिघल गया और पथरीला रास्ता निकल आया. 2000 साल में पहली बार ऐसा हुआ था कि जब ग्लेशियर 3000K स्की रिजॉर्ट की बर्फ बहुत ज्यादा पिघली. इस साल पड़ी भयानक गर्मी की वजह से पिछले दस साल के औसत पिघलाव से तीन गुना ज्यादा बर्फ पिघली. इससे Scex Rouge और Zanfleuron ग्लेशियरों के बीच पथरीला रास्ता निकल आया है. (फोटोः ट्विटर/दिसइसचिली)

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